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Year Ender 2025: यह साल FIIs की बिकवाली और DIIs की लिवाली के नाम

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विश्लेषकों का मानना है कि कैलेंडर वर्ष 2026 में कम घरेलू ब्याज दरों, स्थिर महंगाई और बेहतर कमाई की उम्मीदों के कारण भारतीय शेयर बाजारों में ज्यादा विदेशी पूंजी वापस आ सकती है

Last Updated- December 24, 2025 | 9:45 PM IST
FIIs vs DIIs

दलाल पथ कैलेंडर वर्ष 2025 का समापन भारतीय इक्विटी में अब तक की सबसे खराब वैश्विक फंड बिकवाली के साथ करने जा रहा है। हालांकि घरेलू संस्थानों के लगातार निवेश ने उनकी बिकवाली का दबाव कम किया और बाजार को बड़ी गिरावट से बचाया। लेकिन विश्लेषकों का मानना है कि कैलेंडर वर्ष 2026 में कम घरेलू ब्याज दरों, स्थिर महंगाई और बेहतर कमाई की उम्मीदों के कारण भारतीय शेयर बाजारों में ज्यादा विदेशी पूंजी वापस आ सकती है, बशर्ते कि रुपया-डॉलर का समीकरण अनुकूल बना रहे। इस साल अब तक विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) ने 1.51 लाख करोड़ रुपये के शेयर बेचे हैं।

सेबी के पास उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार यह किसी भी कैलेंडर वर्ष में अब तक का सबसे अधिक बिकवाली का आंकड़ा है। इसके उलट, घरेलू म्युचुअल फंडों ने इस साल एसआईपी के जरिये मिले मजबूत निवेश के बल पर अब तक सबसे ज्यादा 4.84 लाख करोड़ रुपये का निवेश किया है।

आईएनवीऐसेट पीएमएस के पार्टनर और फंड मैनेजर अनिरुद्ध गर्ग ने कहा कि इस साल की एफआईआई बिकवाली काफी हद तक वैश्विक पूंजी के दुबारा आवंटन का नतीजा थी, न कि भारत की संरचनात्मक कहानी के पुनः आकलन का। उन्होंने कहा, ‘ऊंची वैश्विक ब्याज दरों, विशेष रूप से अमेरिका में, से जोखिम-मुक्त रिटर्न में सुधार आया और उभरते बाजार इक्विटी के सापेक्ष आकर्षण कम हुआ।’

विश्लेषकों ने बताया कि मुद्रा में कमजोरी से 2025 में एफआईआई निवेश पर और दबाव पड़ा। भारतीय रुपया इस साल अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 4.73 प्रतिशत कमजोर होकर एशिया में सबसे खराब प्रदर्शन करने वाली मुद्रा बन गया है।

बाजार में घरेलू संस्थानों ने संभाला मोर्चा

वैश्विक अनिश्चितता और जोखिम वाली संपत्तियों में बिकवाली के बावजूद निफ्टी 50 पिछले कुछ महीनों में मजबूत घरेलू निवेश के समर्थन से एक दायरे में बना रहा। भविष्य के उतार-चढ़ाव की संभावना बताने वाला इंडिया वीआईएक्स मंगलवार को 9.49 के सर्वाधिक निचले स्तर पर आ गया।

वेल्थ1 के सीईओ नरेन अग्रवाल ने कहा कि मजबूत डीआईआई निवेश घरेलू बचत के वित्तीयकरण में वृद्धि का संकेत है, जिसने पूंजी का एक स्थिर पूल बनाया है और यह काफी हद तक बाजार के अल्पकालिक उतार-चढ़ावों से प्रभावित नहीं होता। उन्होंने कहा, ‘यही कारण है कि गिरावट पर दहशत में तेजी से बिकवाली नहीं हुई बल्कि घरेलू खरीदारी ने इसे संभाल लिया।’

खुदरा निवेशकों के बारे में विश्लेषकों का कहना है कि भारत की दीर्घावधि विकास कहानी में उनका भरोसा बना हुआ है, लेकिन जोखिम के प्रति अधिक सतर्क और सचेत दृष्टिकोण से यह कम हो गया है। अग्रवाल ने कहा कि खुदरा निवेशक तेजी का पीछा करने के बजाय व्यवस्थित साधनों के माध्यम से पूंजी निवेश कर रहे हैं, जिससे दहशत में बिकवाली कम हो रही है।

विदेशी निवेश पर नजरिया

बेंचमार्क दशकों में वैश्विक प्रतिस्पर्धियों की तुलना में सबसे खराब प्रदर्शन दर्ज करने के कगार पर हैं। हालांकि फिर भी निफ्टी 50 सूचकांक इस साल अब तक 10.7 प्रतिशत बढ़ार है जबकि 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 9.5 प्रतिशत चढ़ा है। विश्लेषकों का मानना है कि भारतीय शेयर बाजार 2026 में एफआईआई के लिए अपेक्षाकृत आकर्षक गंतव्य के रूप में उभरेगा।

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First Published - December 24, 2025 | 9:39 PM IST

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