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इस तेजी की सबसे बड़ी वजह भारत में मजबूत मांग और स्थिर लागत है, जिससे कंपनियों की कमाई भी बेहतर हो रही है

Last Updated- April 07, 2026 | 10:53 AM IST
Steel

स्टील सेक्टर में इन दिनों जबरदस्त तेजी देखने को मिल रही है। घरेलू बाजार में स्टील की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं और अब करीब तीन साल के ऊंचे स्तर के आसपास पहुंच गई हैं। नोमुरा की रिपोर्ट के मुताबिक, इस तेजी की सबसे बड़ी वजह भारत में मजबूत मांग और स्थिर लागत है, जिससे कंपनियों की कमाई भी बेहतर हो रही है।

भारत में स्टील की कीमतों में तेज उछाल

रिपोर्ट के अनुसार, 3 अप्रैल 2026 को खत्म हुए हफ्ते में भारत में हॉट रोल्ड कॉइल यानी एचआरसी की कीमतें करीब 1,900 रुपये प्रति टन बढ़कर 59,600 रुपये प्रति टन पहुंच गईं। वहीं, सरिया यानी रीबार की कीमतें भी बढ़कर 60,300 रुपये प्रति टन हो गईं। दोनों ही कीमतें पिछले तीन साल के उच्च स्तर के करीब पहुंच चुकी हैं। खास बात यह है कि एचआरसी की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं, जिससे फ्लैट और लॉन्ग प्रोडक्ट के बीच का अंतर भी कम हो गया है।

कंपनियों की कमाई में सुधार

स्टील की बढ़ती कीमतों का सीधा फायदा कंपनियों के मार्जिन पर दिख रहा है। अप्रैल 2026 में अब तक एचआरसी का औसत मार्जिन करीब 38,000 रुपये प्रति टन तक पहुंच गया है, जो पिछले महीने से काफी ज्यादा है। इसका मतलब साफ है कि कंपनियां अब हर टन स्टील पर ज्यादा मुनाफा कमा रही हैं, क्योंकि कच्चे माल की लागत अभी ज्यादा नहीं बढ़ी है।

चीन और यूरोप में भी तेजी का असर

सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि चीन और यूरोप में भी स्टील की कीमतों में बढ़ोतरी देखी जा रही है। चीन में एचआरसी की एक्सपोर्ट कीमतें बढ़कर 500 डॉलर प्रति टन तक पहुंच गई हैं, जबकि यूरोप में कीमतें 715 यूरो प्रति टन के आसपास हैं। यूरोप में नए कार्बन टैक्स नियम लागू होने से वहां की कीमतों को और सहारा मिला है।

कच्चे माल की कीमतें स्थिर, लेकिन कुछ बढ़ोतरी भी

कच्चे माल की बात करें तो कोकिंग कोल की कीमतों में हल्की बढ़ोतरी हुई है, जबकि वैश्विक आयरन ओर की कीमतें लगभग स्थिर बनी हुई हैं। हालांकि, भारत में एनएमडीसी ने आयरन ओर की कीमतों में बढ़ोतरी की है, जिससे आगे लागत पर थोड़ा असर पड़ सकता है।

गैस सप्लाई का खतरा फिलहाल काबू में

पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव की वजह से गैस सप्लाई को लेकर चिंता जरूर बनी हुई है, लेकिन अभी स्थिति नियंत्रण में है। ज्यादातर कंपनियों के पास करीब एक महीने का स्टॉक मौजूद है, जिससे तुरंत कोई बड़ा असर नहीं दिख रहा। इसके अलावा, कई कंपनियां वैकल्पिक ईंधन का इस्तेमाल भी शुरू कर रही हैं, ताकि सप्लाई में रुकावट का असर कम हो सके। सरकार ने भी राहत देते हुए इंडस्ट्री के लिए एलपीजी सप्लाई बढ़ा दी है, जिससे निकट भविष्य में उत्पादन पर ज्यादा असर पड़ने की संभावना कम है।

ब्रिटेन ने अपनी स्टील इंडस्ट्री को मजबूत करने के लिए नई रणनीति बनाई है। इसके तहत स्टील आयात पर सख्ती बढ़ाई जाएगी और ज्यादा शुल्क लगाया जाएगा। इससे वहां घरेलू कंपनियों को फायदा मिलेगा और भारत की टाटा स्टील जैसी कंपनियों को भी सकारात्मक असर मिल सकता है।

आगे का नजरिया क्या कहता है?

रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के स्टील सेक्टर को लेकर नजरिया अभी भी सकारात्मक बना हुआ है। घरेलू मांग मजबूत है और कीमतों में तेजी जारी है, जिससे कंपनियों की कमाई पर ज्यादा असर नहीं पड़ने वाला। हालांकि, वैश्विक हालात और कच्चे माल की कीमतों पर नजर रखना जरूरी रहेगा। अगर कोई बड़ा झटका नहीं आता, तो स्टील कंपनियों के लिए आगे का समय अच्छा रह सकता है। रिपोर्ट में टाटा स्टील, जेएसडब्ल्यू स्टील, जिंदल स्टील और लॉयड्स मेटल्स जैसे शेयरों पर भरोसा जताया गया है और इन्हें खरीदने की सलाह दी गई है।

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First Published - April 7, 2026 | 10:53 AM IST

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