अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता विफल रहने के बाद शेयर बाजार में आज गिरावट देखी गई। युद्ध विराम पर अनिश्चितता के बीच निवेशकों का भरोसा कमजोर हुआ और कच्चे तेल की कीमतें फिर से 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गईं।
कारोबार के दौरान 2.2 फीसदी या 1,682 अंक तक गिरने के बाद सेंसेक्स नुकसान की काफी हद तक भरपाई करते हुए 703 अंक की गिरावट के साथ 76,848 पर बंद हुआ। निफ्टी भी 208 अंक के नुकसान के साथ 23,843 पर बंद हुआ। बंबई स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण 2 लाख करोड़ रुपये घटकर 449 लाख करोड़ रुपये रह गया। बाजार में उतार-चढ़ाव मापने वाला सूचकांक इंडिया वीआईएक्स 8.75 फीसदी बढ़कर 20.5 पर पहुंच गया। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने करीब 2,000 करोड़ रुपये की बिकवाली की जबकि शुक्रवार को उन्होंने शुद्ध लिवाली की थी।
ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत टूट जाने के बाद निवेशकों की जोखिम उठाने की प्रवृत्ति कमजोर पड़ गई। बातचीत विफल होने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने होर्मुज स्ट्रेट की नाकेबंदी करने की धमकी दी और अमेरिकी सेना ने भी संकेत दिया कि वह ईरानी बंदरगाहों से आने-जाने वाले समुद्री यातायात को प्रतिबंधित कर सकती है।
तनाव बढ़ने से इस ईंधन की आपूर्ति में संभावित रुकावटों को लेकर चिंता बढ़ गई है। यह क्षेत्र वैश्विक ऊर्जा प्रवाह के लिए अहम रास्ता है। होर्मुज स्ट्रेट से दुनिया की करीब 20 फीसदी तेल की आवाजाही होती है। टकराव बढ़ने की आशंका से ब्रेंट क्रूड की कीमतें 7 फीसदी बढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गईं। पिछले हफ्ते शेयर बाजार में 5 साल से भी ज्यादा समय की सबसे मजबूत साप्ताहिक बढ़त दर्ज होने के बाद आज गिरावट देखी गई। इस बढ़त को अमेरिका और ईरान के बीच संभावित संघर्ष विराम को लेकर बनी उम्मीदों से मदद मिली थी, जिससे आपूर्ति से जुड़ी चिंता कुछ समय के लिए कम हो गई थी।
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स में शोध प्रमुख विनोद नायर ने कहा, ‘बाजारों को पिछले हफ्ते के युद्ध विराम से सीमित समर्थन मिला था जो अभी भी बरकरार है। बातचीत टूटने और अमेरिका की नाकेबंदी की धमकी पर शुरुआती नकारात्मक प्रतिक्रिया के बावजूद यह युद्ध विराम चुनिंदा खरीदारी और गिरावट पर खरीदारी को बढ़ावा दे रहा है।’ आगे की दिशा के लिए निवेशकों की नजर चौथी तिमाही के नतीजों पर रहेगी।
नायर ने कहा, ‘लंबे समय तक तनाव बने रहने से चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही पर ज्यादा अहम असर पड़ सकता है। बाजार में उठापटक ज्यादा रहने के आसार हैं और निवेशक कंपनियों की कमाई और प्रबंधन की टिप्पणियों के साथ-साथ भू-राजनीतिक घटनाक्रम पर भी बारीकी से नजर रखेंगे।’
इक्विनॉमिक्स के संस्थापक जी चोकालिंगम ने कहा, ‘युद्ध ने वैश्विक अर्थव्यवस्था पर काफी दबाव डाला है और सभी पक्षों पर बातचीत की मेज पर लौटने का दबाव होगा।’
बीएसई पर 2,640 शेयर गिरावट में और 1,754 लाभ में बंद हुए। सेंसेक्स के 4 शेयरों को छोड़कर बाकी सभी नुकसान में रहे। एचडीएफसी बैंक 2.02 फीसदी गिरावट में रहा और रिलायंस इंडस्ट्रीज में भी 2.6 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई।
निफ्टी मिडकैप में 0.6 फीसदी और स्मॉलकैप में 0.5 फीसदी की गिरावट आई। निफ्टी के सभी क्षेत्रीय सूचकांक भी गिरावट में रहे।