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Stock Market Crash: सेंसेक्स 8 माह के निचले स्तर पर, 1996 के बाद निफ्टी पहली बार लगातार पांचवें महीने गिरावट में

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बंबई स्टॉक एक्सचेंज पर सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण 4 लाख करोड़ रुपये घटकर 398 लाख करोड़ रुपये रह गया।

Last Updated- February 24, 2025 | 10:19 PM IST
Stock Market

बेंचमार्क सूचकांकों में आज लगातार पांचवें कारोबारी सत्र में गिरावट आई और सेंसेक्स तथा निफ्टी लुढ़क कर 8 महीने के निचले स्तर पर बंद हुए।  अमेरिकी अर्थव्यवस्था की चिंता, कंपनियों के कमजोर  नतीजे और विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की  बिकवाली से बाजार में गिरावट आई है।

सेंसेक्स 857 अंक या 1.1 फीसदी टूटकर 74,454 पर और निफ्टी 243 अंक का गोता लगाकर 22,553 पर बंद हुआ, जो 6 जून, 2024 के बाद सबसे निचला स्तर है। दोनों सूचकांकों को पिछले 14 कारोबारी सत्र में से 13 में गिरावट का सामना करना पड़ा है।  सर्वकालिक उच्चतम स्तर से सेंसेक्स 13.2 फीसदी और निफ्टी 14 फीसदी टूट चुका है। बिकवाली के दबाव से बाजार में चौतरफा गिरावट देखी गई। निफ्टी मिडकैप 0.9 फीसदी और स्मॉलकैप 1.02 फीसदी नुकसान में बंद हुआ। मिडकैप अपने उच्चतम स्तर से 17.8 फीसदी और स्मॉलकैप 21.3 फीसदी लुढ़क चुका है। 

बंबई स्टॉक एक्सचेंज पर सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण 4 लाख करोड़ रुपये घटकर 398 लाख करोड़ रुपये रह गया। सर्वकालिक उच्चतम स्तर से बाजार पूंजीकरण में 80 लाख करोड़ रुपये की कमी आई है। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने 6,287 करोड़ रुपये की शुद्ध बिकवाली की। 2025 में उन्होंने अभी तक 1.05 लाख करोड़ रुपये की बिकवाली की है।

अमेरिका भारतीय आईटी कंपनियों का प्रमुख बाजार है, ऐसे में वहां महंगाई बढ़ने की आशंका से आईटी शेयरों पर सबसे ज्यादा मार पड़ी। निफ्टी आईटी सूचकांक 2.7 फीसदी लुढ़क गया।

अल्फानीति फिनटेक के सह-संस्थापक यूआर भट्ट ने कहा, ‘अमेरिकी नीतियों में बदलाव से वहां मुद्रास्फीति बढ़ सकती है। ऐसे में दर कटौती की संभावना धूमिल पड़ेगी और संभव है कि ब्याज दरें बढ़ानी भी पड़े। यह भारत जैसे उभरते बाजारों के लिए नुकसानदायक होगा क्योंकि जोखिम वाली संपत्तियों से उच्च रिटर्न की उम्मीद में ​पूंजी की निकासी बढ़ सकती है। अमेरिका के वैश्विक व्यापार संबंधों में स्थिरता आने तक बाजार में उथल-पुथल बनी रह सकती है।’ 

अमेरिका में उपभोक्ता मुद्रास्फीति के दीर्घकालिक अनुमान तीन दशकों में अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गए हैं, क्योंकि इस बात की चिंता सता रही है कि राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप की नीतियों से कीमतें बढ़ सकती हैं।

मि​शिगन यूनिवर्सिटी के अनुसार अमेरिकी उपभोक्ताओं को अब लग रहा है कि अगले पांच से दस साल में कीमतें 3.5 फीसदी की वार्षिक दर से बढ़ेंगी, जो 1995 के बाद से सबसे अधिक है।

मुद्रास्फीति का दबाव और अमेरिका की व्यापार नीति पर अनि​श्चितता फेडरल रिजर्व के ब्याज दरों पर नजरिये को प्रभावित कर सकता है। कंपनियों की आय वद्धि नरम रहने, ऊंचे मूल्यांकन और विदेशी बिकवाली से घरेलू शेयर बाजार में अक्टूबर 2024 से ही दबाव देखा जा रहा है। चीन के बाजार में मूल्यांकन कम होने के कारण विदेशी निवेशक भारत से दूर जा रहे हैं। 

बंबई स्टॉक एक्सचेंज पर 2,879 शेयर नुकसान में और 1,157 लाभ में रहे। इन्फोसिस में 2.8 फीसदी और एचडीएफसी बैंक में 0.9 फीसदी की गिरावट आई।

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First Published - February 24, 2025 | 10:17 PM IST

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