भारतीय बाजार में इस महीने काफी उतार-चढ़ाव दिखा जिसकी वजह अमेरिका-इजरायल का ईरान के खिलाफ युद्ध है। महीने के दौरान निफ्टी 50 में 7.7 फीसदी की गिरावट आई, निफ्टी मिडकैप 150 भी 6.2 फीसदी नीचे फिसल गया और निफ्टी स्मॉलकैप 250 करीब 6.2 फीसदी लुढ़क गया। पहले ये आंकड़े इससे भी खराब दिख रहे थे मगर पिछले कुछ सत्रों के दौरान इसमें सुधार हुआ है। इस बीच, फरवरी 2026 में समाप्त वर्ष के दौरान डीमैट खातों की संख्या में 3.2 लाख या 17 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। ऐसे में कई नए निवेशक पहली बार बाजार में इतना बड़ा उतार-चढ़ाव देख रहे होंगे।
बाजार में भारी गिरावट के दौरान निवेशक अक्सर व्यवहारिक गलतियां कर जाते हैं। उदाहरण के लिए, उन्हें बाजार के निचले स्तर पर घबराकर बिकवाली करने जैसी भावनात्मक प्रतिक्रियाओं से बचना चाहिए। आनंद राठी वेल्थ के संयुक्त मुख्य कार्याधिकारी फिरोज अजीज ने कहा, ‘अस्थायी गिरावट के दौरान बाहर निकलने से निवेशक सुधार का फायदा उठाने से चूक सकते हैं।’
निवेशकों को हालिया घटनाओं के आधार पर फैसला लेने की आदत से भी बचना चाहिए। कोटक सिक्योरिटीज के इक्विटी अनुसंधान प्रमुख श्रीकांत चौहान ने कहा, ‘ऐसा न मानें कि मौजूदा गिरावट भी किसी अन्य हालिया गिरावट जैसी ही होगी।’ उन्होंने कहा कि 2020 में कोविड-19 के कारण भारी गिरावट और 2025 में टैरिफ आधारित गिरावट के दौरान घबराहट में निचले स्तर तक जाने के बाद तेजी से सुधार हुआ लेकिन सभी गिरावट का रुख एक जैसा नहीं होता।
निवेशकों को भारी गिरावट वाले शेयरों के पीछे आंख मूंदकर नहीं भागना चाहिए। एचडीएफसी सिक्योरिटीज के अनुसंधान प्रमुख देवर्ष वकील ने कहा, ‘गिरते हुए शेयरों की बुनियादी बातों की पड़ताल किए बिना खरीदारी करने से बचें।’
गिरते हुए शेयरों को पकड़ने के लालच से भी बचना चाहिए। चौहान ने कहा, ‘उतार-चढ़ाव वाले दौर में एकमुश्त निवेश करने से बचें क्योंकि बाजार के सबसे निचले स्तर का सही समय तय करना मुश्किल होता है।’
अपने पोर्टफोलियो को बहुत ज्यादा केंद्रित रखना भी जोखिम भरा हो सकता है। एमके इन्वेस्टमेंट मैनेजर्स के फंड मैनेजर और अनुसंधान प्रमुख कश्यप जावेरी ने कहा, ‘ऐसा पोर्टफोलियो बनाना समझदारी है जिसमें किसी भी समय 20 से कम शेयर न हों।’
निवेशकों को व्यापक बाजार में उतार-चढ़ाव के कारण शेयर मूल्य में गिरावट और बुनियादी स्थिति खराब होने के कारण गिरावट के बीच अंतर करना चाहिए। अजीज ने कहा, ‘बुनियादी स्थिति सही होने के बावजूद वैश्विक अनिश्चितता, भू-राजनीतिक घटनाओं और कमोडिटी की कीमतों में उतार-चढ़ाव के कारण व्यापक बाजार में गिरावट आ सकती है।’ शेयर खरीदने के मूल कारणों पर नए सिरे से विचार करें। निवेशकों को यह भी आकलन करना चाहिए कि क्या कंपनी का बहीखाता दमदार बना हुआ है, ऋण का सही तरीके से प्रबंधन किया जा रहा है और आय वृद्धि स्थिर है या उसमें सुधार हो रहा है। उन्हें यह भी देखना चाहिए कि क्या लंबी अवधि में कंपनी का प्रतिस्पर्धात्मक लाभ बरकरार है।
निवेशकों को टिकाऊ प्रतिस्पर्धात्मक लाभ या मजबूत आधार वाले शेयरों को रखना चाहिए। उन्हें उन कंपनियों में निवेश जारी रखना चाहिए जो लगातार वृद्धि कर दर्ज कर रही हैं और जिनका नकदी प्रवाह दमदार दिख रहा है। वकील ने कहा, ‘केवल ऐतिहासिक आय पर निर्भर रहने के बजाय अगले तीन से पांच वर्षों में अपेक्षित वृद्धि का आकलन करना जरूरी है।’ किसी शेयर को बरकरार रखने का निर्णय लेते समय प्रबंधन की गुणवत्ता, कंपनी प्रशासन, रिटर्न अनुपात, पूंजीगत खर्च और उस क्षेत्र की स्थिति पर विचार करें। किसी भी पुनर्मूल्यांकन के दौरान उस मूल्य को भी ध्यान में रखना चाहिए जिस पर शेयर खरीदा गया था।
निवेशकों को उस स्थिति में शेयर बेच देना चाहिए जब निवेश का मूल आधार अब मान्य न हो और भविष्य में आय वृद्धि की संभावना भी कम हो। अगर कारोबारी इंजन विफल हो रहा हो तो उस कमजोरी की झलक आखिरकार शेयर मूल्य में दिखेगी। वकील ने कहा, ‘आय वृद्धि के बावजूद घटते मार्जिन भी प्रतिस्पर्धी लाभ के नुकसान या लागत के बढ़ते दबाव का संकेत दे सकते हैं।’
निवेशकों को चक्र के कमजोर छोर पर अत्यधिक चक्रीय कारोबार के प्रति सतर्क रहना चाहिए। उन्हें तगड़ी प्रतिस्पर्धा वाले उद्योगों में नकदी खर्च करने वाली कंपनियों से भी बाहर निकल जाना चाहिए। वकील ने कहा, ‘शीर्ष प्रबंधन में बार-बार होने वाले बदलाव, लेखांकन संबंधी अनियमितताएं और कंपनी प्रशासन से जुड़े मुद्दे भी बिकवाली के अन्य कारण हैं।’
बाजार में गिरावट के दौरान सही कीमत पर सही शेयर खरीदने के अवसर सृजित होते हैं। द वेल्थ कंपनी के मैनेजिंग पार्टनर एवं प्रमुख (बाजार रणनीति) अक्षय चिंचालकर ने कहा, ‘गिरावट के दौरान व्यापक तौर पर मूल्यांकन में कमी आती है और अच्छी गुणवत्ता वाले कारोबार में निवेश के अवसर दिखते हैं।’ जावेरी ने कहा, ‘वाहन और वाहन संबंधी अन्य उत्पाद, पूंजीगत वस्तु, वित्तीय क्षेत्र और स्मॉलकैप एवं मिडकैप शेयरों में नए अवसर सृजित हो रहे हैं। ऐसा खास तौर पर अलग-अलग शेयरों के स्तर पर देखा जा रहा है।’
चिंचालकर ने कहा, ‘लार्जकैप शेयरों में और विशेष रूप से निजी बैंकों, चुनिंदा आईटी सेवा कंपनियों और सीधे तौर पर ग्राहकों से जुड़े निश्चित कमाई वाले कारोबार में मूल्यांकन पिछले दो साल के मुकाबले अब सही दिख रहा है। फार्मा और पूंजीगत वस्तु क्षेत्र के मिडकैप शेयरों में काफी गिरावट आई है और अब उनमें निवेश के ऐसे अवसर दिख रहे हैं जो तेजी के दौर में उपलब्ध नहीं थे।’ निवेशकों को उन क्षेत्रों के प्रति सतर्क रहना चाहिए जहां मूल्यांकन काफी अधिक थे और गिरावट के बाद भी उनके फंडामेंटल्स यानी बुनियादी हालत में कोई सुधार नहीं हुआ है।
निवेशकों को 10 से 12 कंपनियों की पहचान करनी चाहिए जहां वे 3 से 5 साल तक निवेश बरकरार रख सकते हैं। साथ ही उन्हें बाजार के बिल्कुल निचले स्तर पर जाने का इंतजार करने के बजाय मौजूदा स्तरों पर निवेश शुरू कर देना चाहिए। निवेशकों को बाजार के बिल्कुल निचले स्तर को पकड़ने की कोशिश नहीं करनी चाहिए क्योंकि ऐसा लगातार नहीं किया जा सकता। निवेश की रकम को तीन हिस्सों में बांट लेना चाहिए और बाजार में गिरावट के दौरान समय-समय पर निवेश करते रहना चाहिए। इस प्रकार बाजार के सही समय का अंदाजा लगाने के जोखिम को कम किया जा सकता है।
जिन निवेशकों का निवेश दायरा 3 से 5 साल का है उन्हें रोजाना अपना पोर्टफोलियो नहीं देखना चाहिए क्योंकि ऐसा करने से गलत फैसले लिए जा सकते हैं। चिंचालकर ने कहा, ‘अच्छी गुणवत्ता वाले शेयरों की एक निगरानी सूची बनाएं। उसमें खरीद लक्ष्य वाले मूल्य का भी उल्लेख हो। निवेशकों को घबराहट में नहीं बल्कि सोच-समझकर एवं समझदारी से निर्णय लेना चाहिए।’ बहरहाल कुछ न करने को पंगु हो जाने की स्थिति समझने की गलती न करें।