Closing Bell: आज के कारोबारी सत्र में घरेलू शेयर बाजार ने शुरुआती बढ़त गंवा दी। मेटल, PSU बैंक और रियल्टी सेक्टर में बिकवाली के दबाव के चलते प्रमुख सूचकांक अपने दिन के उच्च स्तर से नीचे आ गए।
निफ्टी 50 अंत में 27.15 अंक यानी 0.12 प्रतिशत की गिरावट के साथ 23,214.95 पर बंद हुआ। वहीं, सेंसेक्स 64.42 अंक यानी 0.09 प्रतिशत की बढ़त के साथ 73,983.18 पर स्थिर हुआ।
निफ्टी 50 के प्रमुख लूजर्स में हिंदाल्को इंडस्ट्रीज, कोल इंडिया और ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉर्पोरेशन (ONGC) सबसे आगे रहे। इन दिग्गज शेयरों में कमजोरी का सीधा असर पूरे बाजार पर देखने को मिला।
ब्रॉडर मार्केट में भी दबाव साफ नजर आया। निफ्टी मिडकैप इंडेक्स 1.49 प्रतिशत गिरा, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स 1.33 प्रतिशत की कमजोरी के साथ बंद हुआ।
सेक्टरवार प्रदर्शन में भी स्पष्ट विभाजन देखने को मिला। निफ्टी मीडिया, PSU बैंक और रियल्टी सेक्टर सबसे कमजोर रहे। इसके विपरीत, FMCG, प्राइवेट बैंक और केमिकल सेक्टर में मजबूती देखी गई, जिससे बाजार की गिरावट कुछ हद तक सीमित रही।
मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के वेल्थ मैनेजमेंट रिसर्च हेड सिद्धार्थ खेमका के अनुसार, मौजूदा समय में बाजार में स्थिरता देखने को मिल रही है और निवेशकों की धारणा धीरे-धीरे बेहतर हो रही है। इसकी प्रमुख वजह कच्चे तेल की कीमतों में नियंत्रण और वैश्विक तनाव में संभावित कमी को माना जा रहा है।
ब्रेंट क्रूड ऑयल घटकर 91 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया है। इससे महंगाई के दबाव में कुछ राहत मिली है और घरेलू खपत से जुड़े सेक्टर्स को सपोर्ट मिला है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे कंजम्प्शन आधारित सेक्टर्स के लिए आउटलुक बेहतर हुआ है।
बाजार के प्रदर्शन पर नजर डालें तो निफ्टी लगभग स्थिर रहा और इसमें 0.1 प्रतिशत की हल्की गिरावट दर्ज की गई। हालांकि मिडकैप 100 और स्मॉलकैप 100 इंडेक्स में क्रमशः 1.5 प्रतिशत और 1.3 प्रतिशत की गिरावट देखने को मिली।
FMCG और बैंकिंग शेयरों ने बाजार को महत्वपूर्ण समर्थन दिया। FMCG इंडेक्स में 1.1 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई। कच्चे तेल की कीमतों में नरमी के चलते घरेलू खपत से जुड़े शेयरों में निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ी है, जिससे डिफेंसिव सेक्टर्स को फायदा मिला है।
बैंकिंग शेयर भी लगातार निवेशकों के रडार पर बने हुए हैं। हाल ही में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा रियायती फॉरेक्स स्वैप सुविधाओं के संचालन संबंधी विवरण जारी किए गए हैं, जिसका उद्देश्य विदेशी पूंजी प्रवाह को आकर्षित करना है। इसे बाजार में तरलता बढ़ाने और बैंकिंग सेक्टर की धारणा को मजबूत करने वाला कदम माना जा रहा है।