Stock Market Closing Bell, March 23: वैश्विक बाजारों में गिरावट के बीच भारतीय शेयर बाजार हफ्ते के पहले ट्रेडिंग सेशन यानी सोमवार (23 मार्च) को बड़ी गिरावट में बंद हुए। अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के ईरान को अल्टीमेटल के बाद दुनियाभर के बाजारों में गिरावट आई। इसका असर भारतीय बाजारों पर भी पड़ा। ट्रम्प ने शनिवार देर रात चेतावनी दी कि अगर ईरान 48 घंटे के अंदर हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य (समुद्री रास्ता) पूरी तरह से नहीं खोलता, तो अमेरिका ईरान के पावर प्लांट पर हमला करेगा। इसके अलावा इंडेक्स हैवीवेट एचडीएफसी बैंक के शेयरों में बड़ी गिरावट का भी बाजार पर नेगेटिव असर पड़ा।
तीस शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स (BSE Sensex) बड़ी गिरावट लेकर 73,732 पर खुला। खुलते ही इंडेक्स में बिकवाली और बढ़ गई। कारोबार के दौरान यह 72,558 अंक तक गिर गया था। अंत में 1836.57 अंक या 2.46 फीसदी की गिरावट लेकर 72,696.39 पर बंद हुआ।
इसी तरह, नैशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी-50 (Nifty-50) 22,824 पर खुला और खुलते ही 22700 के नीचे फिसल गया। इंट्रा-डे ट्रेड में यह 22,471.25 लो तक गया। अंत में 601.85 अंक या 2.60 प्रतिशत गिरकर 22,512 पर बंद हुआ।
जियोजित इंवेस्टमेंट्स में रिसर्च हेड विनोद नायर ने कहा, ”एशियाई बाजारों में कमजोरी और मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का असर दिखा। वैश्विक ऊर्जा सप्लाई में बाधा की आशंका से निवेशक चिंतित रहे। ट्रंप के ईरान को दिए 48 घंटे के अल्टीमेटम के बाद निवेशकों का रुख और सतर्क हो गया। वैश्विक स्तर पर बढ़ती बॉन्ड यील्ड ने महंगाई और सरकारी खर्च को लेकर चिंता बढ़ा दी। वहीं, रुपये के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचने से बाजार पर और दबाव पड़ा और विदेशी निवेशकों की बिकवाली बढ़ी।”
उन्होंने कहा, ” शॉर्ट टर्म में बाजार में जोखिम से बचने का रुख बना रह सकता है। जब तक तनाव कम होने के साफ संकेत नहीं मिलते, तब तक अनिश्चितता बनी रहेगी। हालांकि इस गिरावट में लंबी अवधि के लिए कुछ चुनिंदा निवेश मौके भी बन रहे हैं।”
सेंसेक्स की कंपनियों में टाइटन सबसे ज्यादा 7 प्रतिशत गिरकर बंद हुआ। ट्रेंट लिमिटेड, अल्ट्रा सीमेंट, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स, टाटा स्टील, एचडीएफसी बैंक, इंडिगो, अदाणी पोर्ट्स और महिंद्रा एंड महिंद्रा सबसे ज्यादा गिरे। दूसरी तरफ, एचसीएल टेक, पावर ग्रिड और टेक महिंद्रा हरे निशान में रहे।
ब्रोडर मार्केटस का प्रदर्शन बेंचमार्क इंडेक्स से भी कमजोर रहा। निफ्टी मिडकैप और निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स क्रमशः 3.69 प्रतिशत और 4.16 प्रतिशत गिर गए। सेक्टोरल मोर्चे पर निफ्टी कंस्ट्रक्शन ड्यूरेबल में 5 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई और यह सबसे अधिक नुकसान में रहने वाला इंडेक्स रहा। निफ्टी रियल्टी और निफ्टी मेटल सेक्टर का प्रदर्शन भी खराब रहा। वहीं दूसरी ओर, निफ्टी आईटी सेक्टर ने सबसे कम नुकसान के साथ बेहतर प्रदर्शन किया।
निवेशकों की संपत्ति में करीब 13 लाख करोड़ रुपये की गिरावट आई। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक बाजारों से मिले नकारात्मक संकेतों का असर बाजार पर पड़ा। बीएसई में लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप 4,15,03,541 करोड़ रुपये रह गया। यह शुक्रवार को बाजार बंद होने पर 428.78 लाख करोड़ रुपये था।
एशिया के ज्यादातर बाजार सोमवार को गिरावट में रहे। मिडिल ईस्ट में बढ़ते युद्ध के हालात का वैल्यूएशन कर रहे थे। जापान का निक्की 225 सोमवार को 3.3 प्रतिशत और दक्षिण कोरिया का कॉपी इंडेक्स 4.6 प्रतिशत की गिरावट पर ट्रेड कर रहा है। पिछले शुक्रवार को अमेरिका के एसएंडपी 500 और डाउ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज क्रमशः 1.51 प्रतिशत और 0.96 प्रतिशत नीचे बंद हुए थे।
ब्रेंट क्रूड में बढ़ोतरी हुई। अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी कि अगर ईरान 48 घंटे के भीतर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज नहीं खोलेगा तो अमेरिका उसके पावर प्लांट्स को नष्ट कर देगा। इसके जवाब में ईरान ने मिडिल ईस्ट में ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर हमले की धमकी दी। ब्रेंट का मई फ्यूचर कॉन्ट्रैक्ट 0.66 प्रतिशत बढ़कर 107.11 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा है। गोल्ड फ्यूचर्स 3.34 प्रतिशत गिर गए क्योंकि अमेरिका और ईरान के तनाव ने मुद्रास्फीति और उधार लागत के परिदृश्य पर असर डाला।