सप्ताह के पहले कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार भारी गिरावट के साथ बंद हुआ। वैश्विक तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल और निवेशकों की बढ़ती चिंता के बीच बाजार में पूरे दिन बिकवाली का दबाव बना रहा। सोमवार को बीएसई सेंसेक्स 1,352.74 अंक यानी 1.71 प्रतिशत गिरकर 77,556.16 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी 50 भी 422.40 अंक यानी 1.73 प्रतिशत टूटकर 24,028.05 के स्तर पर बंद हुआ। निफ्टी 50 में गिरावट का दायरा काफी व्यापक रहा। 50 में से 42 शेयर गिरावट के साथ बंद हुए जबकि केवल 8 शेयर बढ़त में रहे।
हालिया गिरावट के बाद निफ्टी अपने रिकॉर्ड उच्च स्तर से काफी नीचे आ चुका है। निफ्टी ने 5 जनवरी को 26,373 का रिकॉर्ड स्तर बनाया था। अब इस स्तर से यह 10 प्रतिशत से ज्यादा गिर चुका है, जिससे बाजार तकनीकी रूप से करेक्शन जोन में पहुंच गया है।
गिरते बाजार में कुछ शेयरों में मजबूती भी देखने को मिली। रिलायंस इंडस्ट्रीज का शेयर करीब 1.05 प्रतिशत बढ़कर 1,419.95 रुपये पर बंद हुआ और यह निफ्टी का सबसे बड़ा गेनर रहा। इसके अलावा इन्फोसिस में 0.52 प्रतिशत, सन फार्मा में 0.35 प्रतिशत, एचसीएल टेक में 0.30 प्रतिशत और टेक महिंद्रा में 0.23 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई। गिरावट के माहौल में आईटी और फार्मा सेक्टर के शेयर अपेक्षाकृत मजबूत नजर आए।
निफ्टी 50 में कई बड़े शेयरों में तेज बिकवाली देखने को मिली। अल्ट्राटेक सीमेंट करीब 4.98 प्रतिशत गिरकर 11,390 रुपये के आसपास बंद हुआ और यह दिन का सबसे बड़ा लूजर रहा। इसके अलावा मारुति सुजुकी में 4.53 प्रतिशत, महिंद्रा एंड महिंद्रा में 4.52 प्रतिशत, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में 3.81 प्रतिशत, टाटा स्टील में 3.68 प्रतिशत और अदाणी पोर्ट्स में 3.68 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। इसके साथ ही इंडिगो, कोटक बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, एशियन पेंट्स और एलटी जैसे बड़े शेयरों में भी कमजोरी देखने को मिली।
सेक्टोरल इंडेक्स की बात करें तो सोमवार को लगभग सभी सेक्टर गिरावट के साथ बंद हुए। निफ्टी पीएसयू बैंक इंडेक्स में सबसे ज्यादा गिरावट देखने को मिली और यह करीब 5 से 6 प्रतिशत तक टूट गया। इसके अलावा ऑटो, मेटल, रियल्टी और प्राइवेट बैंक सेक्टर में भी 3 से 4 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई।
बाजार की गिरावट का असर व्यापक बाजार पर भी दिखाई दिया। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी बिकवाली देखने को मिली और कई शेयरों में 2 से 3 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई। इससे साफ है कि बाजार में कमजोरी सिर्फ बड़े शेयरों तक सीमित नहीं रही बल्कि पूरे बाजार में दबाव बना रहा।
बाजार में गिरावट की सबसे बड़ी वजह वैश्विक तनाव और तेल की कीमतों में तेज उछाल रही। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण ब्रेंट क्रूड की कीमत लगभग 112 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई। इससे वैश्विक अर्थव्यवस्था और सप्लाई चेन को लेकर चिंता बढ़ गई है, जिसका असर शेयर बाजारों पर भी देखने को मिल रहा है।
तेल की कीमतों में तेजी का असर वैश्विक बाजारों पर भी पड़ा। दक्षिण कोरिया का कोस्पी सूचकांक करीब 8 प्रतिशत गिर गया, जबकि जापान का निक्केई 225 करीब 6 प्रतिशत नीचे आ गया। अमेरिकी बाजारों में भी पिछले कारोबारी सत्र में गिरावट रही। एसएंडपी 500 लगभग 1.33 प्रतिशत और नैस्डैक करीब 1.59 प्रतिशत नीचे बंद हुए, जबकि डाउ जोंस इंडस्ट्रियल एवरेज लगभग 0.95 प्रतिशत गिरकर बंद हुआ।