Closing Bell: भारतीय शेयर बाजार बुधवार के कारोबारी सत्र में मजबूत बढ़त के साथ बंद हुए। फार्मा, हेल्थकेयर और मेटल शेयरों में हुई खरीदारी के चलते बाजार में अच्छी तेजी देखने को मिली।
कारोबार के अंत में निफ्टी 50 277.00 अंक यानी 1.18 प्रतिशत की तेजी के साथ 23,689.60 पर बंद हुआ। वहीं सेंसेक्स 789.74 अंक यानी 1.06 प्रतिशत चढ़कर 75,398.72 पर बंद हुआ। पूरे सत्र में खरीदारी का रुझान देखने को मिला, खासकर आखिरी घंटों में बाजार में तेजी और मजबूत होती गई।
निफ्टी 50 के प्रमुख शेयरों में अदाणी एंटरप्राइजेज, सिप्ला और भारती एयरटेल ने सबसे अच्छा प्रदर्शन किया। इन स्टॉक्स में दिनभर मजबूत खरीदारी रही, जिससे इंडेक्स को ऊपर जाने में मदद मिली।
ब्रॉडर मार्केट में रुझान थोड़ा अलग रहा। निफ्टी मिडकैप इंडेक्स 1.12 प्रतिशत की तेजी के साथ बंद हुआ, जिससे मिडकैप शेयरों में मजबूत निवेश दिखा। वहीं निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स लगभग सपाट रहा और इसमें 0.01 प्रतिशत की हल्की गिरावट दर्ज की गई।
सेक्टरवार बात करें तो फार्मा, हेल्थकेयर और मेटल इंडेक्स में सबसे ज्यादा तेजी देखने को मिली। इन सेक्टर्स में मजबूत खरीदारी और बेहतर सेंटिमेंट का असर दिखा। दूसरी ओर आईटी सेक्टर में गिरावट दर्ज की गई और यह सबसे कमजोर सेक्टर रहा।
वैश्विक मोर्चे पर निवेशक अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की बैठक पर नजर बनाए हुए थे। ब्लूमबर्ग रिपोर्ट के अनुसार, शी जिनपिंग ने कहा कि यह बातचीत दोनों देशों के बीच स्थिर संबंधों की दिशा तय करने में मदद कर सकती है, जिससे वैश्विक व्यापार को लेकर सकारात्मक संकेत मिले।
LKP सिक्योरिटीज के सीनियर टेक्निकल एनालिस्ट रुपक डे के अनुसार बाजार ने तेज रिकवरी दिखाई लेकिन निफ्टी को 23,800 के पास मजबूत रेजिस्टेंस का सामना करना पड़ा। इसी वजह से इंडेक्स अपनी शुरुआती बढ़त को बनाए नहीं रख सका और नीचे बंद हुआ।
उन्होंने कहा कि निफ्टी अभी भी 20 EMA के नीचे ट्रेड कर रहा है, जो यह संकेत देता है कि ओवरऑल ट्रेंड फिलहाल कमजोर बना हुआ है। उनके मुताबिक अगर निफ्टी 23,800 के ऊपर मजबूती से निकलता है तो इसमें 24,200 तक की तेजी संभव है, लेकिन ऐसा न होने पर फिर से बिकवाली का दबाव बन सकता है।
Geojit Investments के हेड ऑफ रिसर्च विनोद नायर ने कहा कि भारतीय बाजारों ने दिन के निचले स्तर से मजबूत रिकवरी दिखाई और अंत में बढ़त के साथ बंद हुए। उन्होंने यह भी कहा कि रुपये की कमजोरी और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के बावजूद बाजार में मजबूती बनी रही।
उनके अनुसार निवेशकों की धारणा इस उम्मीद से बेहतर हुई है कि सरकार रुपये की कमजोरी को रोकने के लिए कदम उठा सकती है। इसमें विदेशी निवेशकों के लिए बॉन्ड टैक्स में राहत और लिबरलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम में बदलाव जैसे उपाय शामिल हो सकते हैं।
उन्होंने आगे कहा कि ट्रंप-शी बैठक से आए सकारात्मक संकेतों ने भी बाजार को सपोर्ट दिया, जिससे वैश्विक आर्थिक सहयोग की उम्मीदें बढ़ीं। सेक्टरवार रुझान में फार्मा और हेल्थकेयर में रोटेशनल खरीदारी देखी गई, जबकि मेटल सेक्टर को चीन से बेहतर मांग की उम्मीदों का फायदा मिला। वहीं आईटी सेक्टर लगातार दबाव में रहा।