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Closing Bell: सेंसेक्स 117 अंक चढ़ा, निफ्टी 23,659 पर बंद; RIL, Hindalco, Bajaj Auto बने टॉप गेनर्स

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बाजार खुलते ही मची बिकवाली, बैंक और ऑटो शेयरों पर सबसे ज्यादा दबाव

Last Updated- May 20, 2026 | 4:40 PM IST

Stock Market Update: भारतीय शेयर बाजार बुधवार (20 मई) को उतार-चढ़ाव के बाद बढ़त के साथ बंद हुआ। दिनभर की गिरावट को पीछे छोड़ते हुए बाजार ने आखिरी एक घंटे में मजबूत रिकवरी दिखाई। इस तेजी में कई बड़े शेयरों का अहम योगदान रहा।

बीएसई सेंसेक्स 117.54 अंक या 0.16 प्रतिशत की बढ़त के साथ 75,318.39 पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान सेंसेक्स ने 75,406.18 का उच्च स्तर और 74,529.41 का निचला स्तर छुआ।

वहीं एनएसई निफ्टी 50 भी मजबूती के साथ 41 अंक या 0.17 प्रतिशत की बढ़त लेकर 23,659 पर बंद हुआ। दिन के दौरान निफ्टी ने 23,690.90 का उच्च और 23,397.30 का निचला स्तर बनाया।

किन शेयरों ने बाजार को सहारा दिया

निफ्टी 50 के टॉप गेनर्स में रिलायंस इंडस्ट्रीज, हिंडाल्को इंडस्ट्रीज और बजाज ऑटो जैसे बड़े शेयर शामिल रहे। इन दिग्गज कंपनियों में खरीदारी ने बाजार को सपोर्ट दिया और अंत में इंडेक्स को हरे निशान में पहुंचाया।

मिडकैप और स्मॉलकैप का प्रदर्शन

ब्रॉडर मार्केट की बात करें तो मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में भी हल्की बढ़त देखने को मिली। निफ्टी मिडकैप 0.49 प्रतिशत चढ़ा, जबकि स्मॉलकैप इंडेक्स 0.04 प्रतिशत की मामूली बढ़त के साथ बंद हुआ।

सेक्टर का हाल

सेक्टोरल इंडेक्स में निफ्टी ऑयल एंड गैस और निफ्टी ऑटो ने सबसे बेहतर प्रदर्शन किया। दूसरी ओर निफ्टी मीडिया और निफ्टी एफएमसीजी में गिरावट दर्ज की गई और ये सेक्टर सबसे कमजोर रहे।

यह पढ़ें: बाजार में कमजोरी के बीच Airtel और Polycab में कमाई का मौका? एक्सपर्ट ने दिए ₹6,310 तक का टारगेट

तकनीकी विश्लेषण

Sudeep Shah, जो SBI Securities में हेड (टेक्निकल और डेरिवेटिव रिसर्च) हैं, के अनुसार निफ्टी ने मंगलवार को गैप-डाउन ओपनिंग के बाद निचले स्तरों पर खरीदारी देखी, जिसके चलते बाजार में मजबूत इंट्राडे रिकवरी देखने को मिली।

दिन के अंत में निफ्टी 0.17% की बढ़त के साथ 23,659 पर बंद हुआ। डेली चार्ट पर एक मजबूत बुलिश कैंडल बनी, जो इस बात का संकेत है कि पूरे सत्र में खरीदारों की पकड़ सेलर्स की तुलना में अधिक मजबूत रही।

रेंज में फंसा बाजार, दिशा अब भी साफ नहीं

हालांकि तेज रिकवरी के बावजूद निफ्टी लगातार छठे सत्र में 23,839 से 23,263 के दायरे में ही कारोबार कर रहा है। यह दर्शाता है कि बाजार में अभी कोई निर्णायक दिशा नहीं बन पाई है।

तकनीकी संकेतकों की बात करें तो:

  • RSI फ्लैट हो गया है, जो मोमेंटम में कमजोरी का संकेत देता है
  • MACD अभी भी जीरो लाइन के नीचे है, जिससे नकारात्मक झुकाव बना हुआ है
  • निफ्टी 11 मई को 20-DAY EMA के नीचे बंद होने के बाद से लगातार इसके नीचे ही ट्रेड कर रहा है

सपोर्ट लेवल: नीचे जाने पर बढ़ सकता है दबाव

विशेषज्ञ के अनुसार निफ्टी के लिए तुरंत सपोर्ट 23,500 से 23,450 के ज़ोन में है।

अगर यह स्तर टूटता है और नीचे टिकता है, तो आगे कमजोरी बढ़ सकती है और निफ्टी:

  • 23,300 तक गिर सकता है
  • इसके बाद 23,150 तक और कमजोरी देखने को मिल सकती है

रेजिस्टेंस लेवल: ऊपर की चाल के लिए अहम बाधा

ऊपरी स्तरों पर निफ्टी के लिए तुरंत रेजिस्टेंस 23,800 से 23,850 के बीच है। यह स्तर 20-DAY EMA के आसपास आता है, जो बाजार के लिए एक महत्वपूर्ण तकनीकी बाधा माना जा रहा है।

बाजार पर विशेषज्ञ की राय

Vinod Nair, जो Geojit Investments में रिसर्च प्रमुख हैं, के अनुसार बाजार ने दिन के निचले स्तर से रिकवरी दिखाई। इस रिकवरी में बड़ी कंपनियों में चुनिंदा खरीदारी का अहम योगदान रहा, खासकर ऑटो, फाइनेंशियल और ऑयल एंड गैस सेक्टर में।

किन सेक्टर्स में रही मजबूती

ऑटो और फाइनेंशियल सेक्टर में तेजी देखने को मिली, जिसका कारण बेहतर तिमाही नतीजे (Q4 earnings) रहे। वहीं हाल ही में ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी ने ऑयल मार्केटिंग कंपनियों और रिफाइनरी कंपनियों की सेंटिमेंट को सपोर्ट किया।

रियल एस्टेट सेक्टर में भी हालिया गिरावट के बाद वैल्यू बाइंग देखने को मिली, जिससे वहां हल्की रिकवरी दर्ज की गई।

हालांकि, रुपये की कमजोरी और कच्चे तेल की ऊंची कीमतें बाजार पर दबाव बनाए हुए हैं। इससे महंगाई और कंपनियों के मार्जिन पर असर पड़ने की आशंका बनी हुई है।

इसके साथ ही विदेशी निवेशकों (FII) के फ्लो में भी अस्थिरता बनी हुई है, जिससे बाजार की दिशा पूरी तरह मजबूत नहीं हो पा रही है।

वैश्विक संकेत और जोखिम

वैश्विक स्तर पर भी जोखिम लेने की क्षमता सीमित बनी हुई है। अमेरिका में बॉन्ड यील्ड्स कई सालों के उच्च स्तर के आसपास हैं, जिससे वित्तीय परिस्थितियां सख्त हो रही हैं और इक्विटी बाजारों में तेजी सीमित हो रही है।

मध्य पूर्व में जारी तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतें लगभग 110 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी हुई हैं, जो वैश्विक महंगाई को बढ़ाने का काम कर रही हैं।

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First Published - May 20, 2026 | 8:08 AM IST

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