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ट्रंप के अतिरिक्त टैरिफ के डर से फिसले शेयर बाजार

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सेंसेक्स 309 अंक यानी 0.4 फीसदी की गिरावट के साथ 80,710 पर बंद हुआ। निफ्टी 73 अंक यानी 0.3 फीसदी की गिरावट के साथ 24,650 पर बंद हुआ।

Last Updated- August 05, 2025 | 10:25 PM IST
market cap

रूस से तेल खरीदने पर अतिरिक्त शुल्क लगाने की अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप की भारत को नई धमकी और बुधवार को भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की मौद्रिक नीति समीक्षा से पहले सामान्य सतर्कता के बाद मंगलवार को भारतीय शेयर बाजारों में गिरावट दर्ज की गई। मंगलवार को सेंसेक्स 309 अंक यानी 0.4 फीसदी की गिरावट के साथ 80,710 पर बंद हुआ। निफ्टी 73 अंक यानी 0.3 फीसदी की गिरावट के साथ 24,650 पर बंद हुआ। बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण 83,000 करोड़ रुपये घटकर 448 लाख करोड़ रुपये रह गया।

ट्रंप ने सोमवार को कहा कि वह रूसी तेल आयात पर भारत को दंडित करने के लिए उस पर शुल्क में भारी इजाफा करेंगे। हालांकि, ट्रंप ने यह साफ नहीं किया कि शुल्क में कितनी वृद्धि की जाएगी। ट्रंप की यह घोषणा भारतीय आयात पर 25 फीसदी शुल्क लगाने की घोषणा के एक हफ्ते बाद आई है जो किसी भी बड़ी अर्थव्यवस्था के लिए सबसे ज्यादा शुल्कों में से एक है।

एक सोशल मीडिया पोस्ट में अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि भारत न केवल भारी मात्रा में रूसी तेल खरीद रहा है बल्कि इसे खुले बाजार में भारी मुनाफे पर बेच रहा है। उसे इस बात की परवाह नहीं कि रूसी हमलों में यूक्रेन के कितने लोग मारे जा रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति ने पहले रूस को यूक्रेन के साथ युद्धविराम समझौते पर पहुंचने के लिए 8 अगस्त की समय-सीमा दी थी और रूसी ऊर्जा खरीदने वाले देशों पर अतिरिक्त प्रतिबंध लगाने की धमकी दी थी। यूक्रेन के सहयोगी इस ऊर्जा खरीद को रूसी अर्थव्यवस्था की मदद और सरकार पर युद्ध समाप्त करने के दबाव को कम करने के रूप में देखते हैं। यह जंग चौथे वर्ष में प्रवेश कर रही है।

इस बीच भारत के विदेश मंत्रालय ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि भारत ने रूस से तेल खरीदना इसलिए शुरू किया क्योंकि युद्ध शुरू होने के बाद पारंपरिक आपूर्ति यूरोप की ओर मोड़ दी गई थी और अमेरिका ने इस तरह के आयात को प्रोत्साहित किया। मंत्रालय ने यह भी कहा कि निशाना बनाना अनुचित और अविवेकपूर्ण है और भारत अपने राष्ट्रीय हितों और आर्थिक सुरक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाएगा। महीनों की बातचीत के बाद टैरिफ लगाए जाने के कारण भारत और अमेरिका के बीच संबंधों में खिंचाव आ गया है। इसके अलावा, भारत इस साल पाकिस्तान के साथ अपने संघर्ष को समाप्त करने के ट्रंप के दावों से भी नाराज है।

आगे चलकर अमेरिका के साथ व्यापार वार्ता और आरबीआई के नीतिगत निर्णय बाजार की दिशा तय करेंगे। जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के शोध प्रमुख विनोद नायर ने कहा, निवेशक अब आरबीआई की आगामी नीतिगत घोषणा का इंतजार कर रहे हैं। बाजार को निकट भविष्य में ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद काफी कम है। फिलहाल निवेशकों की प्राथमिकताएं घरेलू उपभोग-आधारित शेयरों और उन सेक्टरों में हैं जिनमें बाहरी कारकों के कारण कम उतार-चढ़ाव होता है।

बाजार में चढ़ने व गिरने वाले शेयरों का अनुपात कमजोर रहा। 2,371 शेयरों में गिरावट और 1,672 शेयरों में तेजी दर्ज की गई। सेंसेक्स की गिरावट में सबसे ज्यादा योगदान आईसीआईसीआई बैंक का रहा जिसमें 1.3 फीसदी  की गिरावट आई जबकि रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरों में 1.4 फीसदी की नरमी दर्ज की गई।

एचडीएफसी सिक्योरिटीज के वरिष्ठ तकनीकी शोध विश्लेषक नागराज शेट्टी ने कहा, निफ्टी में निकट भविष्य में गिरावट का रुख बरकरार रहेगा और अगले कुछ सत्रों में बाजार के 24500-24400 के स्तर तक गिरने की आशंका है। हालांकि बुधवार को आरबीआई की नीति बाजार के लिए स्पष्ट दिशा तय करेगी। प्रतिरोध का तात्कालिक स्तर 24800 है।

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First Published - August 5, 2025 | 10:20 PM IST

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