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शेयर बाजारों में दूसरे दिन भी रही तेजी, FMCG और IT सेक्टर पर दबाव रहा

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सेंसेक्स 568 अंक (0.75 प्रतिशत) बढ़कर 76,071 जबकि निफ्टी 50 सूचकांक 172 अंक (0.74 प्रतिशत) की बढ़त के साथ 23,581 पर बंद हुआ

Last Updated- March 17, 2026 | 9:46 PM IST
stock market

मंगलवार को शेयर बाजारों ने दूसरे दिन भी अपनी बढ़त जारी रखी। पिछले सप्ताह की तेज बिकवाली से उबरने और अनुकूल वैश्विक संकेतों की मदद से बाजार में तेजी आई। लेकिन कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर से ऊपर मजबूत रहने के कारण बाजार में तेजी सीमित रही। सेंसेक्स 568 अंक (0.75 प्रतिशत) बढ़कर 76,071 जबकि निफ्टी 50 सूचकांक 172 अंक (0.74 प्रतिशत) की बढ़त के साथ 23,581 पर बंद हुआ।

ईरान के साथ अमेरिका-इजरायल की लड़ाई सप्ताह में पहुंच गई है और इसके थमने के आसार कम दिख रहे हैं। इससे ऊर्जा बाजारों में अनिश्चितता बनी हुई है। कच्चा तेल लगभग 3 प्रतिशत बढ़कर 103 डॉलर प्रति बैरल के करीब कारोबार कर रहा है। हालांकि अमेरिका होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों को सुरक्षित निकालने की योजना पर काम कर रहा था। इस प्रमुख जलमार्ग से दुनिया की तेल आपूर्ति का लगभग पांचवां हिस्सा गुजरता है और लड़ाई छिड़ने के बाद से ही यह काफी हद तक बंद है। इससे वैश्विक वृद्धि पर संभावित झटकों को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।

सेक्टरवार प्रदर्शन ज्यादातर सकारात्मक रहा। अधिकांश सूचकांक बढ़त के साथ बंद हुए। एफएमसीजी और आईटी पर दबाव रहा और दोनों सूचकांकों में लगभग 1 प्रतिशत की गिरावट आई। इसके विपरीत, पिटे हुए धातु और रियल्टी शेयरों में मजबूत खरीदारी देखी गई। इस कारण निफ्टी मेटल और रियल्टी सूचकांक क्रमशः 2.8 प्रतिशत और 1.8 प्रतिशत चढ़े।

अन्य बड़े सूचकांकों ने भी इस तेजी में हिस्सा लिया। निफ्टी मिडकैप 100 में 1 प्रतिशत की बढ़त हुई जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 100 में 0.7 प्रतिशत की तेजी आई। बाजार की धारणा बेहतर हुई। कोई 1,891 शेयरों में गिरावट आई जबकि 2,366 शेयरों में तेजी दर्ज की गई। इंडिया वाआईएक्स 8.4 प्रतिशत गिरकर 19.8 पर आ गया, जिससे संकेच मिलता है कि बाजार में उतार-चढ़ाव कम हुआ है।

घरेलू ब्रोकरेज फर्म एमके ने चेतावनी दी है कि अगर कच्चे तेल की कीमतें अगले 3-4 महीनों तक 100 डॉलर प्रति बैरल के आस-पास बनी रहती हैं, तो बाजार मौजूदा स्तरों से 10 प्रतिशत तक और गिर सकता है।

ब्रोकरेज ने कहा कि लंबे समय तक चलने वाली लड़ाई से अमेरिका और वैश्विक अर्थव्यवस्था दोनों पर गहरे घाव रह सकते हैं। दुश्मनी खत्म होने के बाद भी वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को सामान्य होने में 2-3 महीने लग सकते हैं। इससे महंगाई ऊंची बनी रह सकती है, उपभोक्ता धारणा को ठेस पहुंच सकती है, एक से दो तिमाहियों तक वृद्धि पर दबाव पड़ सकता है और पूंजी प्रवाह बाधित हो सकता है।

नुवामा ने एक अलग नोट में वैश्विक वृद्धि और इक्विटी के लिए बढ़ते नकारात्मक जोखिमों की ओर इशारा किया। 2026 के पहले 10 सप्ताह में ऐसी घटनाएं देखने को मिली हैं जो आम तौर पर पूरे कारोबारी चक्र में होती हैं, मुद्रास्फीति में सुधार की उम्मीदों और व्यापार करारों से लेकर एक बड़े तकनीकी बदलाव तक और अब एक युद्ध, जिससे आपूर्ति में भारी कमी आ गई है।

विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) ने मार्च में अब तक 7 अरब डॉलर से अधिक की भारतीय इक्विटी की बिकवाली की है, जिससे वे जनवरी 2025 के बाद अपनी सर्वाधिक मासिक निकासी की राह पर हैं।

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First Published - March 17, 2026 | 9:38 PM IST

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