अनिश्चितता, तनाव और उतार-चढ़ाव से भरे वैश्विक माहौल के बीच निवेशकों के सामने बड़ा सवाल खड़ा है कि पैसा कहां लगाएं। ऐसे समय में बाजार विशेषज्ञों की सलाह साफ है कि घबराने के बजाय शेयर बाजार में बने रहना बेहतर रहेगा।
वित्त वर्ष 2025-26 में वैश्विक और भारतीय बाजार कई झटकों से गुजरे। व्यापार युद्ध, पश्चिम एशिया में बढ़ता संघर्ष, सोना और चांदी की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े कारणों से आईटी शेयरों में गिरावट और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल ने बाजार को प्रभावित किया। इसी दौरान विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार से पैसा निकाला, जिससे रुपये में कमजोरी आई और यह एक डॉलर के मुकाबले 94 के पार चला गया।
बर्नस्टीन के MD वेंणुगोपाल गरे का मानना है कि अमेरिका में दबाव, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और इस साल होने वाले मध्यावधि चुनाव जैसे कारण वैश्विक संघर्षों को लंबा नहीं खींचने देंगे। उनके अनुसार, ये तनाव अप्रैल के बाद कम हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि कच्चा तेल इस साल ऊंचे स्तर पर रह सकता है, लेकिन 100 डॉलर प्रति बैरल से नीचे रहने की संभावना है।
गरे के अनुसार, महंगाई 6 प्रतिशत से ऊपर जा सकती है, जिससे ब्याज दरों में कटौती कम से कम दो तिमाही के लिए टल सकती है और आर्थिक वृद्धि की रफ्तार धीमी पड़ सकती है। इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए उन्होंने निफ्टी का टारगेट 26,000 रखा है, जो मौजूदा स्तर से करीब 12 प्रतिशत ऊपर है। हालांकि उन्होंने बाजार पर ‘न्यूट्रल’ रुख बनाए रखा है और स्मॉल और मिडकैप शेयरों से दूरी रखने की सलाह दी है।
इन्वएसेट पीएमएस के पार्टनर और फंड मैनेजर अनिरुद्ध गर्ग का कहना है कि हाल की गिरावट के बाद शेयर बाजार में निवेश का बेहतर मौका बना है। उन्होंने कहा कि भारत की कमाई का चक्र मजबूत बना हुआ है, जिसे पूंजी खर्च में बढ़ोतरी, मजबूत बैंकिंग क्षेत्र और घरेलू निवेश का समर्थन मिल रहा है। गर्ग के अनुसार, निवेशकों को अपने पोर्टफोलियो का लगभग 65 प्रतिशत हिस्सा शेयरों में रखना चाहिए, जिससे वित्त वर्ष 2026-27 में 12 से 15 प्रतिशत तक रिटर्न मिल सकता है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि अलग-अलग सेक्टर में प्रदर्शन अलग रहेगा, इसलिए सही शेयरों का चयन बहुत जरूरी है।
उन्होंने सोना और चांदी में 25 प्रतिशत निवेश की सलाह दी और कहा कि हाल की गिरावट को ट्रेंड में बदलाव नहीं समझना चाहिए। वैश्विक कर्ज और मुद्रा में उतार-चढ़ाव के बीच ये निवेश सुरक्षा का काम करेंगे। उन्होंने इनसे मध्यम अवधि में 10 से 12 प्रतिशत रिटर्न की उम्मीद जताई। इसके अलावा, उन्होंने 10 प्रतिशत निवेश सुरक्षित साधनों में रखने की सलाह दी, जिससे 7 से 8 प्रतिशत का स्थिर रिटर्न मिल सकता है।
इक्विनॉमिक्स रिसर्च के फाउंडर जी चोक्कालिंगम का कहना है कि अभी शेयर बाजार निवेश के लिए अच्छा दिख रहा है। उनके मुताबिक, सेंसेक्स का पीई अनुपात करीब 20 है, जो पिछले 5 से 10 साल के औसत 24 से कम है। इसका मतलब है कि बाजार अभी बहुत महंगा नहीं है। उन्होंने यह भी बताया कि बाजार का आकार देश की अर्थव्यवस्था के मुकाबले घटा है। यह अनुपात सितंबर 2024 में 152 प्रतिशत था, जो अब घटकर 125 प्रतिशत रह गया है और आगे 115 प्रतिशत तक आ सकता है। इसे निवेश के लिए अच्छा स्तर माना जा रहा है। हालांकि, उन्होंने सलाह दी कि निवेशक अपना सारा पैसा शेयरों में न लगाएं। कम से कम 30 प्रतिशत पैसा सुरक्षित जगह जैसे बैंक जमा और सरकारी बॉन्ड में जरूर रखें।
विशेषज्ञों के अनुसार, सोना लंबी अवधि के लिए बेहतर निवेश बना रह सकता है, खासकर तीन साल से अधिक समय के लिए। हालांकि, छोटी अवधि में इसमें 5 से 10 प्रतिशत तक गिरावट संभव है, क्योंकि वैश्विक निवेशक मुनाफावसूली कर सकते हैं और कुछ केंद्रीय बैंक भी सोना बेच सकते हैं। सोने का औसत सालाना रिटर्न 6 से 10 प्रतिशत के बीच रहता है।
रियल एस्टेट क्षेत्र में पिछले पांच सालों में लगातार तेजी देखने को मिली है, लेकिन अब इसमें ठहराव आने की संभावना है। कुल मिलाकर, विशेषज्ञों का कहना है कि निवेशकों को घबराने के बजाय संतुलित रणनीति अपनानी चाहिए। शेयर बाजार में बने रहना, साथ ही सोना और सुरक्षित निवेश को भी पोर्टफोलियो में शामिल करना, आने वाले समय में बेहतर रिटर्न दे सकता है।