देश में बिजली की मांग लगातार बढ़ रही है। तेजी से बढ़ते डेटा सेंटर, एयर कंडीशनर और कूलिंग उपकरणों का इस्तेमाल, गांवों तक बिजली की पहुंच और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को बढ़ावा देने वाली सरकारी नीतियां पावर सेक्टर के लिए नई ग्रोथ कहानी तैयार कर रही हैं। यही वजह है कि अब पावर सेक्टर को आने वाले सालों का बड़ा निवेश थीम माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत का पावर सेक्टर लंबे समय के बड़े निवेश चक्र यानी कैपेक्स अपसाइकल में प्रवेश कर चुका है। इसमें थर्मल पावर, रिन्यूएबल एनर्जी, ट्रांसमिशन और ग्रिड स्टोरेज जैसे कई क्षेत्रों में बड़े निवेश देखने को मिल सकते हैं।
इसी बीच ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म सिटी ने भारत के पावर सेक्टर पर ‘Buy’ कवरेज शुरू किया है। ब्रोकरेज ने NTPC, टाटा पावर, पावर ग्रिड और JSW Energy पर ‘Buy’ रेटिंग दी है। सिटी ने NTPC के लिए 485 रुपये, टाटा पावर के लिए 525 रुपये, पावर ग्रिड के लिए 380 रुपये और JSW Energy के लिए 650 रुपये का टारगेट प्राइस तय किया है। इनमें NTPC को ब्रोकरेज ने अपनी सबसे पसंदीदा पसंद यानी टॉप पिक बताया है।
सिटी के मुताबिक, आने वाले वर्षों में देश में बिजली की मांग 5 से 6 प्रतिशत की सालाना औसत दर से बढ़ सकती है। रिपोर्ट में कहा गया है कि बिजली की मांग बढ़ने के पीछे कई बड़े कारण हैं। इनमें तेजी से बढ़ता विद्युतीकरण, डेटा सेंटर, कूलिंग की बढ़ती जरूरत और सरकार की मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने वाली नीतियां शामिल हैं।
ब्रोकरेज का कहना है कि मौजूदा पावर निवेश चक्र सिर्फ एक फैक्टर पर आधारित नहीं है, बल्कि कई सेक्टर मिलकर इसे आगे बढ़ा रहे हैं। यही वजह है कि इस ग्रोथ में लंबी अवधि की मजबूती दिख रही है। सिटी के अनुसार, डेटा सेंटर की संख्या बढ़ने, गांवों और उद्योगों में बिजली की ज्यादा पहुंच, एयर कंडीशनर और कूलिंग उपकरणों की बढ़ती मांग से बिजली की खपत लगातार बढ़ेगी। इसके अलावा सरकार की नीतियां भी पावर सेक्टर को मजबूत समर्थन दे रही हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए थर्मल पावर और ट्रांसमिशन नेटवर्क में बड़े निवेश की जरूरत होगी। साथ ही रिन्यूएबल एनर्जी और ग्रिड स्टोरेज में भी तेजी से विस्तार देखने को मिल सकता है। सिटी ने कहा कि 2026 में एल-नीनो से जुड़ी गर्मी और मौसम की स्थितियां कृषि पंपों और कूलिंग प्रोडक्ट्स की मांग बढ़ा सकती हैं, जिससे बिजली की खपत और तेज हो सकती है।
ब्रोकरेज का मानना है कि अब रेगुलेटर्स का फोकस सिर्फ क्षमता बढ़ाने पर नहीं, बल्कि बिजली सप्लाई की भरोसेमंद व्यवस्था और लचीलापन बढ़ाने पर भी है। इसी वजह से पावर सेक्टर में आगे लंबी अवधि की ग्रोथ की मजबूत संभावना बनी हुई है।
(डिस्क्लेमर: यहां दी गई राय ब्रोकरेज की है। बिज़नेस स्टैंडर्ड इन विचारों से सहमत होना जरूरी नहीं समझता और निवेश से पहले पाठकों को अपनी समझ से फैसला करने की सलाह देता है।)