घरेलू शेयर बाजारों में बुधवार को वैश्विक बाजारों की तरह तेजी की लहर दिखी। ऐसा तब हुआ जब अमेरिका ने ईरान के साथ लड़ाई खत्म करने के लिए एक संभावित समय सीमा का संकेत दिया। इससे कच्चे तेल की कीमतों को लेकर चिंता कम हुई और जोखिम लेने की इच्छा बढ़ी। ट्रंप की टिप्पणी के बाद ब्रेंट क्रूड की कीमतें कुछ समय के लिए 100 डॉलर प्रति बैरल से नीचे गिर गईं और वैश्विक बॉन्ड की कीमतों में तेजी आई, जिससे जोखिम भरी परिसंपत्तियों में निवेश की इच्छा को बढ़ावा मिला।
अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने मंगलवार को कहा कि अमेरिकी सेना दो या तीन हप्तों के भीतर ईरान से हट सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका युद्ध में अपनी भागीदारी समाप्त कर देगा, चाहे हमारा कोई समझौता हो या न हो। वॉल स्ट्रीट में रात में हुई बढ़त का असर एशिया और यूरोप के बाजारों पर दिखा और वे 2 फीसदी से ज्यादा चढ़ गए।
घरेलू बाजार में बेंचमार्क सेंसेक्स, जो पिछले सत्र में करीब दो साल के निचले स्तर पर पहुंच गया था, कारोबार के दौरान 2,017 अंक यानी 2.8 फीसदी तक उछल गया। लेकिन उसने अपनी बढ़त का लगभग आधा हिस्सा गंवा दिया और 1,187 अंकों यानी 1.65 फीसदी की बढ़त के साथ 73,134 पर बंद हुआ। निफ्टी 348 अंक यानी 1.56 फीसदी बढ़कर 22,679 पर बंद हुआ।
व्यापक बाजारों ने बेहतर प्रदर्शन किया। इस दौरान निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 3.33 फीसदी चढ़ा और निफ्टी मिडकैप 100 में 2.22 फीसदी की बढ़त हुई। बाजार में चढ़ने व गिरने वाले शेयरों का अनुपात मजबूत रहा, जहां बढ़ने वाले शेयरों की संख्या गिरने वालों के मुकाबले लगभग सात गुना ज्यादा थी। बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण 10 लाख करोड़ रुपये बढ़कर 422 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया।
यह रिकवरी मार्च में हुई भारी बिकवाली के बाद तब आई है, जब बेंचमार्क इंडेक्स 11 फीसदी लुढ़क गए थे, जो मार्च 2020 में महामारी के कारण हुई भारी गिरावट के बाद से उनकी सबसे बड़ी मासिक गिरावट थी। इस गिरावट की मुख्य वजह एफपीआई की रिकॉर्ड 1.1 लाख करोड़ रुपये की निकासी थी क्योंकि वैश्विक तेल की कीमतों में उछाल ने भारत के आर्थिक संभावनाओं को धूमिल कर दिया था।
तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी हुई हैं क्योंकि लड़ाई शुरू होने के बाद से तेल का परिवहन होर्मुज स्ट्रेट से नहीं हो पा रहा है। विश्लेषकों ने कहा कि बाजारों की निकट अवधि की दिशा उभरते भू-राजनीतिक घटनाक्रमों और कच्चे तेल की कीमतों के रुख पर निर्भर करेगी।
बर्नस्टीन ने पिछले हफ्ते एक नोट में कहा था, हमारा मानना है कि मौजूदा टकरावों के भारी वैश्विक असर और उससे हुए नुकसान को देखते हुए अमेरिका इनसे बाहर निकलने का कोई रास्ता चाहेगा। बाजार स्वाभाविक रूप से इस घटनाक्रम का स्वागत करेंगे, लेकिन एक ढांचागत बदलाव पहले ही हो चुका है। इन घटनाओं ने इस साल के लिहाज़ से कई संभावनाओं को स्थायी नुकसान पहुंचाया है। तेज़ गिरावट के बाद भारत का मूल्यांकन अब कुछ नरम पड़ गया है। निफ्टी 50 इंडेक्स अब एक साल की अनुमानित कमाई के लगभग 17 गुना पर कारोबार कर रहा है, जो उसके 5 साल के औसत 19.6 गुना से कम है।