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ट्रंप के बयान से वैश्विक बाजारों में हड़कंप, तेल कीमतों में उछाल से बढ़ी अनिश्चितता

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ट्रंप के बयानों के बाद ज्यादातर एशियाई बाजार कमजोर रहे। उनमें 3 प्रतिशत तक की गिरावट आई। भारत में निफ्टी 50 में 2 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट आई

Last Updated- April 03, 2026 | 10:56 PM IST
US President Donald Trump

गुरुवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के भाषण ने वैश्विक बाजारों में घबराहट पैदा कर दी। बाजारों को उम्मीद थी कि ईरान युद्ध जल्द ही खत्म हो जाएगा। लेकिन अब उन्हें फिर से उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ सकता है।

डीवेरे ग्रुप के मुख्य कार्याधिकारी नाइजल ग्रीन ने कहा, ‘बाजारों को अनिश्चितता दूर होने की उम्मीद होने लगी थी। लेकिन इस भाषण ने फिर से अनिश्चितता बढ़ा दी है। उन्होंने अब जो सुना है, वह पहले से कहीं कम स्पष्ट है और इस अनिश्चितता के कारण सभी परिसंपत्ति वर्गों में उतार-चढ़ाव की आशंका है। बाजार छोटे और सीमित संघर्ष की उम्मीद कर रहे थे।’ डीवेरे ग्रुप एक ग्लोबल कंसल्टिंग फर्म है, जिसकी प्रबंधन अधीन परिसंपत्तियां 14 अरब डॉलर की हैं।

ट्रंप के बयानों के बाद ज्यादातर एशियाई बाजार कमजोर रहे। उनमें 3 प्रतिशत तक की गिरावट आई। भारत में निफ्टी 50 में 2 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट आई। यह दिन के कारोबार में 22,182.55 के निचले स्तर पर पहुंच गया। सेंसेक्स भी 2 प्रतिशत से ज्यादा गिर गया और 71,545.81 के निचले स्तर पर पहुंच गया था।

गुरुवार को ट्रंप के भाषण के बाद कच्चे तेल की कीमतों में प्रति बैरल 4 डॉलर से ज्यादा का उछाल आया। ब्रेंट क्रूड वायदा 4.88 डॉलर या 4.8 प्रतिशत बढ़कर 106.04 डॉलर पर पहुंच गया। अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट क्रूड वायदा 4.17 डॉलर या 4.2 प्रतिशत बढ़कर 104.29 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। ट्रंप ने चेतावनी दी है कि अगर कोई समझौता नहीं होता है, तो अमेरिका अपने हमलों को और तेज कर देगा। उन्होंने कहा कि बिजली संयंत्रों सहित प्रमुख बुनियादी सुविधाओं को निशाना बनाया जा सकता है।

ग्रीन के अनुसार, आने वाले सप्ताहों में कच्चे तेल की कीमतें ही बाजार की दिशा तय करेंगी। उन्होंने कहा, ‘अभी भी यह पक्का नहीं है कि यह युद्ध कैसे और कब खत्म होगा। इसने बाजार का जोखिम का अंदाजा लगाने का तरीका बदल दिया है। तेल बाजार इसे लेकर बेहद संवेदनशील है। अगर कारोबारियों को लगेगा कि आपूर्ति से जुड़े जोखिम अभी भी ए हैं, तो भू-राजनीतिक जोखिम प्रीमियम तेजी से वापस आ जाएगा। इसका सीधा असर महंगाई और बाजार धारणा पर पड़ेगा।’

इलारा कैपिटल के विश्लेषकों का भी मानना है कि अगले कुछ सप्ताहों में पश्चिम एशिया की स्थिति कैसी रहेगी, इसे लेकर बाजारों में अनिश्चितता रहेगी, लेकिन कच्चे तेल की कीमतें मजबूत रहने की संभावना है।

अहम स्तरों पर नजर

जानकारों का मानना है कि भारतीय बाजार में उतार-चढ़ाव बना रहेगा, लेकिन रिकवरी के दौर में बिकवाली भी देखने को मिल सकती है।

एचडीएफसी सिक्योरिटीज के डिप्टी वाइस प्रेसिडेंट नंदीश शाह ने कहा, ‘भारतीय बाजार उभरते बाजारों (ईएम) के मुकाबले कमजोर प्रदर्शन कर रहे हैं। बुरी खबरों पर ये ईएम के मुकाबले ज्यादा गिरते हैं और किसी अच्छी खबर पर कम चढ़ते हैं।’ उन्होंने बताया, ‘निफ्टी के लिए 21,300 से 21,700 का स्तर सपोर्ट जोन है। ज्यादा बुरी खबरों पर ही वह इस स्तर से नीचे जा सकता है। अगर ऐसा होता है, तो 20,000 से 20,200 का स्तर भी देखने को मिल सकता है।’

कच्चे तेल पर असर

राबोबैंक इंटरनैशनल के विश्लेषकों ने अपना भू-राजनीतिक ‘बेस-केस सिनेरियो’ बरकरार रखा है, जिसके अनुसार युद्ध दो से तीन सप्ताह में, मुख्य रूप से अमेरिका की शर्तों पर समाप्त हो जाएगा, जिससे तेल बाजारों में स्थिति धीरे-धीरे सामान्य हो जाएगी। हालांकि, उन्हें उम्मीद है कि होर्मुज स्ट्रेट पूरी तरह से अप्रैल तक बंद रहेगा।

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First Published - April 3, 2026 | 10:50 PM IST

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