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स्टॉक मार्केट पर ‘ट्रिपल अटैक’: युद्ध, तेल की कीमत और कंपनियों के नतीजे तय करेंगे इस हफ्ते बाजार की चाल

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पश्चिम एशिया में तनाव, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और कंपनियों के तिमाही नतीजों के कारण इस हफ्ते शेयर बाजार में भारी उतार-चढ़ाव रहने की आशंका है

Last Updated- April 26, 2026 | 4:33 PM IST
BSE
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

भारतीय शेयर बाजार के लिए आने वाला हफ्ता काफी उतार-चढ़ाव भरा रहने वाला है। निवेशकों की नजरें इस समय सिर्फ घरेलू बाजार पर ही नहीं, बल्कि पश्चिम एशिया में चल रही उथल-पुथल पर भी टिकी हैं। बाजार के जानकारों का मानना है कि इस हफ्ते बाजार की दिशा मुख्य रूप से तीन बड़े कारकों से तय होगी: पहला पश्चिम एशिया का भू-राजनीतिक तनाव, दूसरा कच्चे तेल की लगातार बढ़ती कीमतें और तीसरा देश की बड़ी कंपनियों के चौथी तिमाही (Q4) के नतीजे।

गौरतलब है कि यह हफ्ता कामकाजी दिनों के लिहाज से छोटा होगा क्योंकि शुक्रवार को महाराष्ट्र दिवस के मौके पर शेयर बाजार बंद रहेंगे।

पिछले हफ्ते की बात करें तो बाजार के लिए वह किसी बुरे सपने से कम नहीं था। BSE सेंसेक्स में 1,829.33 अंकों (2.33%) की भारी गिरावट देखी गई, वहीं निफ्टी भी 455.6 अंक (1.87%) नीचे लुढ़क गया। वैश्विक अनिश्चितता और सप्लाई रुकने के डर ने निवेशकों के बीच घबराहट पैदा कर दी है, जिसका असर घरेलू इंडेक्स पर साफ दिख रहा है।

होर्मुज की घेराबंदी और तेल का खेल

बाजार के लिए सबसे बड़ी चिंता का विषय होर्मुज स्ट्रेट में बनी तनावपूर्ण स्थिति है। अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता टूटने से स्थिति और गंभीर हो गई है, जिसका सीधा असर कच्चे तेल पर पड़ा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड 107 डॉलर प्रति बैरल के आसपास मंडरा रहा है। भारत जैसे देश के लिए कच्चा तेल सबसे बड़ा आर्थिक फैक्टर है। अगर तेल की कीमतें इसी तरह बढ़ती रहीं, तो इससे न सिर्फ महंगाई बढ़ेगी और रुपया कमजोर होगा, बल्कि कंपनियों के मुनाफे पर भी बुरा असर पड़ेगा।

Also Read: MCap: शेयर बाजार में गिरावट का बड़ा असर, टॉप कंपनियों की वैल्यू में भारी उतार-चढ़ाव

बाजार के जानकारों का कहना है कि अगर शांति वार्ता में कोई सकारात्मक मोड़ आता है और तेल की कीमतें गिरती हैं, तो बाजार को राहत मिल सकती है, वरना गिरावट और मुनाफावसूली का दौर जारी रह सकता है।

नतीजों का मौसम और वैश्विक संकेत

कॉरपोरेट जगत की हलचल भी इस हफ्ते बाजार को काफी प्रभावित करेगी। रिलायंस इंडस्ट्रीज ने शुक्रवार को अपने नतीजे घोषित किए, जिसमें मार्च तिमाही के लाभ में 12.5 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। वैश्विक ऊर्जा संकट के कारण कंपनी के मुख्य बिजनेस पर दबाव देखा गया है।

आने वाले दिनों में अल्ट्राटेक सीमेंट, कोल इंडिया, मारुति सुजुकी, बजाज फाइनेंस और अदाणी पावर जैसी दिग्गज कंपनियां अपने नतीजे पेश करेंगी। गुरुवार को हिंदुस्तान यूनिलीवर और अदाणी एंटरप्राइजेज जैसी बड़ी कंपनियों के परिणाम आने हैं, जिससे शेयर विशेष (Stock Specific) एक्शन देखने को मिलेगा।

इसके अलावा, दुनिया भर के निवेशकों की निगाहें अमेरिकी फेडरल रिजर्व (US Fed) के ब्याज दरों पर आने वाले फैसले पर भी टिकी हैं, जो 29 अप्रैल को होना है। घरेलू मोर्चे पर 28 अप्रैल को औद्योगिक उत्पादन (IIP) के आंकड़े और 1 मई को विदेशी मुद्रा भंडार के आंकड़े जारी होंगे।

अमेरिका से आने वाले GDP और मैन्युफैक्चरिंग आंकड़े भी बाजार के सेंटीमेंट को प्रभावित करेंगे। कुल मिलाकर, इस हफ्ते निवेशकों को बहुत सावधानी बरतने की जरूरत है क्योंकि बाजार पूरी तरह से खबरों और वैश्विक तनाव के इशारों पर नाचने वाला है।

(PTI के इनपुट के साथ)

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First Published - April 26, 2026 | 4:33 PM IST

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