पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों को लेकर बाजार की नजरें टिकी हुई हैं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर BJP यहां सरकार बनाने में सफल रहती है, तो इसका असर शेयर बाजार पर शॉर्ट टर्म में पॉजिटिव हो सकता है। खास तौर पर निवेशकों का भरोसा बढ़ सकता है और बाजार में उत्साह देखने को मिल सकता है।
मार्केट एक्सपर्ट अंबरीश बालिगा के मुताबिक, बाजार आम तौर पर BJP की आर्थिक नीतियों को पसंद करता रहा है। पहले भी जब किसी राज्य में BJP की सरकार बनी है, तो बाजार ने इसे सकारात्मक रूप में लिया है। उनका कहना है कि बंगाल में लंबे समय से इंडस्ट्री ग्रोथ धीमी रही है और कई कंपनियां राज्य से बाहर जा चुकी हैं। अगर BJP सरकार बनाती है, तो यह ट्रेंड बदल सकता है। खासकर रियल एस्टेट सेक्टर को इसका सीधा फायदा मिल सकता है।
एक्सपर्ट्स का मानना है कि BJP की सरकार आने पर राज्य में निवेश बढ़ सकता है। इकोनॉमिक नीतियां ज्यादा निवेशक-फ्रेंडली हो सकती हैं, जिससे कॉरपोरेट कंपनियां बंगाल में नए प्रोजेक्ट्स लगाने पर विचार कर सकती हैं। इक्विनॉमिक्स रिसर्च के जी चोक्कालिंगम का कहना है कि बंगाल इंडस्ट्रियल ग्रोथ में पीछे रहा है, लेकिन सरकार बदलने पर इसमें सुधार आ सकता है। उनका मानना है कि आने वाले सालों में राज्य भी बड़े आर्थिक लक्ष्य तय कर सकता है, जैसा कि महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश कर रहे हैं। अंबरीश बालिगा के मुताबिक, अगर राज्य में आर्थिक गतिविधियां बढ़ती हैं तो ऑटो सेक्टर की कंपनियां भी यहां निवेश कर सकती हैं। इससे रोजगार और इंडस्ट्रियल ग्रोथ दोनों को बढ़ावा मिलेगा।
नवंबर 2025 में बिहार विधानसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाले एनडीए ने बड़ी जीत दर्ज की थी। गठबंधन ने 243 में से 201 सीटें जीतकर मजबूत बहुमत के साथ सत्ता में वापसी की थी। इन चुनावों में बीजेपी ने 101 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ा था और उनमें से 89 सीटें जीत ली थीं। यानी पार्टी का जीत प्रतिशत करीब 88.1 प्रतिशत रहा, जो उसकी मजबूत पकड़ को दिखाता है।
हालांकि एक्सपर्ट्स यह भी चेतावनी दे रहे हैं कि मीडियम टर्म में बाजार की दिशा सिर्फ चुनाव नतीजों से तय नहीं होगी। पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव बड़ा फैक्टर बने रहेंगे।
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के वी के विजयकुमार के मुताबिक, बाजार पर सबसे ज्यादा असर पश्चिम एशिया के हालात और कच्चे तेल की कीमतों का होगा। हाल ही में अमेरिका के बयान के बाद ब्रेंट क्रूड की कीमत 125 डॉलर से गिरकर करीब 108 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई है, जो थोड़ी राहत की बात है।
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एक और बड़ा फैक्टर विदेशी निवेशकों की गतिविधि है। एक्सपर्ट वी के विजयकुमार का कहना है कि ग्लोबल स्तर पर AI सेक्टर में तेजी के चलते विदेशी निवेशक भारत से पैसा निकाल सकते हैं। इससे बड़े शेयरों पर दबाव रह सकता है। यानी अगर चुनाव नतीजों के चलते बाजार में तेजी भी आती है, तो विदेशी निवेशक उस मौके का इस्तेमाल बिकवाली के लिए कर सकते हैं, जिससे बड़ी तेजी टिकाऊ नहीं रह पाएगी।