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इस ट्रेडिंग फर्म ने भारत में कमाए अरबों… अब सेबी ने लगा दिया बैन, जानिए कौन है Jane Street

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विदेशी निवेश के जरिए भारत में मजबूत पकड़ बना रही थी Jane Street, दिसंबर 2020 में की थी एंट्री

Last Updated- July 04, 2025 | 2:02 PM IST
Stock Markets rally

भारत की मार्केट रेग्युलेटर SEBI ने अमेरिकी ट्रेडिंग फर्म Jane Street पर कड़ी कार्रवाई करते हुए उसे भारतीय शेयर बाजार से बाहर कर दिया है। सेबी की जांच में पाया गया कि कंपनी ने ‘गैरकानूनी मुनाफा’ कमाया है। इसके साथ ही, SEBI ने कंपनी से 567 मिलियन डॉलर (करीब ₹4,700 करोड़) की रकम भी जब्त कर ली है। ये किसी विदेशी ट्रेडिंग फर्म पर अब तक की सबसे सख्त कार्रवाई मानी जा रही है।

Jane Street कौन है?

Jane Street दुनिया की सबसे बड़ी क्वांट (quantitative) ट्रेडिंग कंपनियों में से एक है। इसकी शुरुआत साल 2000 में हुई थी और पिछले साल इसका रेवेन्यू 20.5 बिलियन डॉलर रहा था। कंपनी खुद को एक ऐसी फर्म बताती है जो “स्मार्ट एनालिसिस और मार्केट की गहराई से समझ” के जरिए कीमतों को स्थिर और विश्वसनीय बनाए रखती है। इसके पांच ऑफिस अमेरिका, यूरोप और एशिया में हैं और इसमें 3,000 से ज्यादा कर्मचारी काम करते हैं।

भारत में कैसे काम करती है Jane Street?

Jane Street भारत में चार अलग-अलग संस्थाओं के ज़रिए काम कर रही थी। इनमें से दो कंपनियां भारत में रजिस्टर्ड थीं और दो हांगकांग व सिंगापुर में, जो विदेशी निवेशक (FPI) के तौर पर भारत में ट्रेड करती थीं। कंपनी ने दिसंबर 2020 में भारत में पहली इकाई शुरू की थी।

भारत में कितना बड़ा था Jane Street का ऑपरेशन?

SEBI के मुताबिक, जनवरी 2023 से मार्च 2025 के बीच Jane Street की चारों संस्थाओं ने भारत में 5 बिलियन डॉलर (लगभग ₹42,000 करोड़) का मुनाफा कमाया। यह मुनाफा खासतौर पर इक्विटी ऑप्शंस ट्रेडिंग से आया। कंपनी भारत में तब चर्चा में आई जब उसने अपने प्रतिस्पर्धी हेज फंड Millennium Management पर अमेरिका में केस किया था। Jane Street ने आरोप लगाया था कि Millennium ने उसका ट्रेडिंग फॉर्मूला चुराया, जिससे सिर्फ 2023 में ही 1 बिलियन डॉलर का फायदा हुआ था। ये ट्रेडिंग फॉर्मूला भारत में ऑप्शंस ट्रेडिंग से जुड़ा था। बाद में ये केस दिसंबर 2023 में सेटल हो गया था।

सेबी को क्या आपत्ति थी?

SEBI की रिपोर्ट के अनुसार, Jane Street ने पहले बड़े पैमाने पर बैंकिंग स्टॉक्स और उनके फ्यूचर्स खरीदे, जिससे बैंकिंग इंडेक्स ऊपर चला गया। इसके बाद कंपनी ने उन्हीं स्टॉक्स और फ्यूचर्स को भारी मात्रा में बेचना शुरू कर दिया। सेबी का कहना है कि इस चालबाज़ी से रिटेल निवेशक भी मार्केट में इन्वेस्ट करने लगे, जिससे बाजार में मैनिपुलेशन हुआ।

कंपनी ने क्या कहा?

Jane Street ने इन आरोपों से इनकार करते हुए कहा है कि वो सेबी के निष्कर्षों से सहमत नहीं है और मामले पर आगे कानूनी कार्रवाई पर विचार कर रही है। (रॉयटर्स के इनपुट के साथ)

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First Published - July 4, 2025 | 2:02 PM IST

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