facebookmetapixel
Advertisement
राज्य की प्रतिक्रिया और अभिव्यक्ति की सीमाएं testtestभारत का डिफेंस प्रोडक्शन ऑल-टाइम हाई पर, FY26 में15.6% बढ़कर ₹1.78 लाख करोड़ पर पहुंचाHCL Tech के नतीजों की तारीख तय, 13 जुलाई को आएगा रिपोर्ट कार्ड; डिविडेंड पर भी होगा फैसलारिटर्न कहीं और, निवेश कहीं और! क्या सही फंड चुन रहे हैं निवेशक? एक्सपर्ट से समझेंAI के दम पर नई छलांग की तैयारी में Coforge? शेयर में 50% तक तेजी की उम्मीद, एक्सपर्ट्स बुलिशकच्चा तेल सस्ता हो रहा है, फिर पेट्रोल-डीजल क्यों नहीं?20 लाख रुपये से ज्यादा पैकेज वाली नौकरियों में उछाल, ब्रोकरेज ने बताए 4 पसंदीदा IT स्टॉक्सJio IPO का इंतजार खत्म! ₹4 अरब के मेगा IPO की तैयारी तेज, जल्द दाखिल होंगे ड्राफ्ट पेपरसरकार के आदेश के खिलाफ Telegram का पलटवार, Delhi HC पहुंची याचिकाब्राजील में पेट्रोल से 70% सस्ता, भारत में सिर्फ 20%: क्या फ्लेक्स-फ्यूल बनेगा हिट? बता रहे एक्सपर्ट

क्या निफ्टी अब 20,000 तक गिरेगा? एक्सपर्ट ने बताए गिरावट के अहम लेवल

Advertisement

ग्लोबल तनाव और विदेशी निवेशकों की बिकवाली से बाजार दबाव में, जानिए निफ्टी के अहम सपोर्ट लेवल

Last Updated- March 23, 2026 | 2:32 PM IST
Nifty Outlook

Nifty Outlook: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच आज भारतीय शेयर बाजार भी तेज गिरावट के साथ कारोबार करता दिखा। एनएसई का निफ्टी 50 इंडेक्स 2.08 प्रतिशत यानी करीब 480 अंक टूटकर 22,635 के स्तर तक आ गया। यह 7 अप्रैल 2025 के बाद इसका सबसे निचला स्तर माना जा रहा है। वैश्विक बाजारों में बिकवाली, निवेशकों की बढ़ती घबराहट और विदेशी निवेशकों की लगातार निकासी ने घरेलू बाजार की कमजोरी को और बढ़ा दिया है।

बाजार में गिरावट की बड़ी वजह क्या है

बाजार जानकारों का कहना है कि इस गिरावट के पीछे केवल एक वजह नहीं है, बल्कि कई नकारात्मक संकेत एक साथ काम कर रहे हैं। सबसे बड़ी चिंता पश्चिम एशिया में बढ़ा तनाव है। अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप द्वारा ईरान को लेकर कड़ा रुख अपनाने की खबरों ने निवेशकों को डरा दिया। इसके बाद दुनिया भर के निवेशकों ने जोखिम वाले निवेश से दूरी बनानी शुरू कर दी। इसका सीधा असर शेयर बाजारों पर पड़ा।

एनरिच मनी के CEO पोनमुदी आर के मुताबिक, भारतीय बाजार की कमजोरी का मुख्य कारण वैश्विक बिकवाली, ऊंचा उतार-चढ़ाव और विदेशी संस्थागत निवेशकों की लगातार बिकवाली है। जब विदेशी निवेशक लगातार पैसा निकालते हैं, तो बाजार पर दबाव बढ़ता है और निवेशकों का भरोसा कमजोर पड़ता है। यही इस समय भारतीय बाजार में भी देखने को मिल रहा है।

ईरान युद्ध ने विदेशी निवेशकों को फिर डरा दिया

ईरान से जुड़े तनाव ने विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों को फिर से ‘रिस्क-ऑफ’ मोड में ला दिया है। इसका मतलब यह है कि वे अब ऐसे बाजारों से पैसा निकाल रहे हैं, जहां उन्हें ज्यादा जोखिम दिखाई दे रहा है। भारतीय बाजार भी इस दबाव से अछूता नहीं रहा। खबर के अनुसार, मार्च महीने में विदेशी निवेशकों की बिकवाली इतनी तेज रही कि यह अक्टूबर 2024 के बाद की सबसे बड़ी मासिक शुद्ध बिकवाली बन गई।

जब विदेशी निवेशक लगातार बिकवाली करते हैं, तो बाजार में कमजोरी और गहराती है। इससे छोटे निवेशकों में भी डर बढ़ता है और वे भी सावधानी बरतने लगते हैं। यही वजह है कि इस समय बाजार का माहौल काफी दबाव वाला बना हुआ है।

यह भी पढ़ें: गिरते शेयर खरीदें या नहीं? एक्सपर्ट ने बताईं 5 सबसे काम की बातें

मार्च महीने में Nifty की हालत सबसे ज्यादा खराब

मार्च महीना Nifty के लिए बेहद कमजोर साबित हुआ है। इस महीने अब तक निफ्टी 10.10 प्रतिशत यानी 2,544 अंक टूट चुका है। यह गिरावट अपने आप में बहुत बड़ी मानी जा रही है, क्योंकि इतनी कम अवधि में इतनी तेज कमजोरी निवेशकों की चिंता बढ़ाने के लिए काफी है।

अगर निफ्टी के हालिया रिकॉर्ड स्तर से तुलना करें, तो तस्वीर और भी गंभीर नजर आती है। 5 जनवरी 2026 को निफ्टी ने 26,373 का ऑल टाइम हाई बनाया था। वहां से अब तक इंडेक्स 14 प्रतिशत यानी 3,738 अंक नीचे आ चुका है। इसका मतलब है कि बाजार में दबाव सिर्फ एक-दो दिन का नहीं, बल्कि लगातार बना हुआ है।

क्या Nifty अब 2023 का पुराना गैप भरने की ओर बढ़ रहा है

Nifty chart

अब बाजार में सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की हो रही है कि क्या निफ्टी 2023 में बने एक पुराने गैप को भरने के लिए और नीचे जा सकता है। तकनीकी चार्ट पर ‘गैप’ उस स्थिति को कहा जाता है, जब एक दिन के कारोबार और अगले कारोबारी दिन की शुरुआत के बीच एक खाली दायरा रह जाता है। यह अक्सर तब होता है, जब बाजार बहुत तेज ऊपर या नीचे खुलता है।

Nifty के डेली चार्ट पर ऐसा ही एक अनफिल्ड गैप अब भी मौजूद है। 1 दिसंबर 2023 को निफ्टी का हाई 20,291.55 था। इसके बाद अगले कारोबारी दिन 4 दिसंबर 2023 को निफ्टी का इंट्रा-डे लो 20,507.75 रहा। यानी 20,291.55 से 20,507.75 के बीच लगभग 216 अंकों का गैप बना, जो आज तक भरा नहीं गया है। तब से अब तक निफ्टी 20,508 के नीचे नहीं गया। यही वजह है कि अब जब बाजार में बड़ी गिरावट आई है, तो यह सवाल उठ रहा है कि क्या निफ्टी उस पुराने गैप को भरने के लिए 20,300 के आसपास जा सकता है।

Nifty चार्ट का गैप हमेशा भरता है, ऐसा जरूरी नहीं

रिलिगेयर ब्रोकिंग के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट अजीत मिश्रा का कहना है कि आमतौर पर चार्ट पर बने कई गैप समय के साथ भर जाते हैं, लेकिन यह कोई तय नियम नहीं है कि हर गैप जरूर भरेगा। उनके मुताबिक, सिर्फ इस आधार पर यह मान लेना कि निफ्टी 20,000 के आसपास चला जाएगा, क्योंकि 20,300 के पास पुराना गैप मौजूद है, सही सोच नहीं होगी।

उन्होंने समझाया कि चार्ट पर बने गैप का अपना अलग महत्व होता है। अगर बाजार किसी दायरे से ऊपर निकलने के बाद गैप-अप के साथ खुलता है, तो इसका मतलब यह माना जाता है कि खरीदार काफी मजबूत हैं और तेजी का रुख बना हुआ है। इसी तरह, गैप-डाउन कमजोरी का संकेत देता है। इसलिए केवल गैप देखकर बहुत बड़ी गिरावट का अनुमान लगाना जल्दबाजी होगी।

यह भी पढ़ें: युद्ध के बीच 12% रिटर्न का मौका! क्या अभी निवेश का समय है? जानें क्या बोले एक्सपर्ट

अभी कौन-से स्तर बाजार के लिए अहम हैं

अजीत मिश्रा के अनुसार, फिलहाल Nifty के लिए 22,800 का स्तर बहुत महत्वपूर्ण है। अगर यह स्तर निर्णायक रूप से टूटता है, तो निफ्टी पहले 22,500 तक फिसल सकता है। इसके बाद 22,000 के आसपास एक बड़ा सपोर्ट जोन दिखाई देता है। यह स्तर इसलिए भी अहम माना जा रहा है, क्योंकि यहां 200-वीक एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज का सहारा मिलता है। तकनीकी विश्लेषण में इस तरह के लंबे समय वाले औसत स्तरों को मजबूत सपोर्ट माना जाता है।

दूसरे शब्दों में कहें तो बाजार में कमजोरी अभी बनी हुई है, लेकिन नीचे जाते समय कुछ ऐसे स्तर हैं जहां खरीदारी लौट सकती है और गिरावट कुछ समय के लिए थम सकती है।

अभी 20,000 की बात करना जल्दबाजी, लेकिन खतरा पूरी तरह टला नहीं

बोनांजा के सीनियर टेक्निकल रिसर्च एनालिस्ट कुनाल कांबले भी फिलहाल बहुत ज्यादा नकारात्मक तस्वीर नहीं देख रहे हैं। उनका कहना है कि अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि निफ्टी सीधे 20,000 तक चला जाएगा। उनके मुताबिक, जब तक निफ्टी 21,750 के ऊपर है, तब तक बाजार की स्थिति ठीक मानी जाएगी।

उन्होंने कहा कि अभी निफ्टी के लिए नजदीकी सपोर्ट 22,300 से 22,350 के बीच नजर आ रहा है। यानी अगर बाजार और फिसलता भी है, तो इस दायरे में उसे कुछ सहारा मिल सकता है। लेकिन यदि निफ्टी 21,750 के नीचे चला जाता है और बाजार का मुख्य रुख नकारात्मक हो जाता है, तब 2023 का गैप भरने और 20,000 के स्तर की ओर गिरने का जोखिम बढ़ सकता है।

निवेशकों के लिए क्या संकेत है

मौजूदा हालात यह बताते हैं कि बाजार इस समय पूरी तरह बाहरी खबरों और वैश्विक तनाव से प्रभावित है। ऐसे माहौल में तेज उतार-चढ़ाव बने रह सकते हैं। विदेशी निवेशकों की बिकवाली, युद्ध का खतरा और वैश्विक अनिश्चितता आने वाले दिनों में बाजार की दिशा तय करेंगे।

हालांकि तकनीकी जानकार अभी यह नहीं मान रहे कि निफ्टी तुरंत 20,000 तक पहुंच जाएगा, लेकिन वे यह जरूर कह रहे हैं कि कुछ महत्वपूर्ण सपोर्ट स्तरों पर नजर रखना जरूरी है। अगर ये स्तर टूटते हैं, तो गिरावट और गहरी हो सकती है। इसलिए निवेशकों के लिए यह समय घबराने से ज्यादा सावधानी बरतने का है।

Advertisement
First Published - March 23, 2026 | 2:32 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement