Wipro Share: आईटी सेक्टर में जारी कमजोरी के बीच Wipro का शेयर सोमवार को 6 फीसदी से ज्यादा टूटकर 185.65 रुपये तक पहुंच गया। शेयर अपने 52 हफ्तों के निचले स्तर के करीब कारोबार कर रहा है। इस साल अब तक इसमें करीब 24 फीसदी की गिरावट आ चुकी है।
Wipro के शेयर पर दबाव बढ़ने की एक बड़ी वजह कंपनी का बायबैक भी है। 5 जून 2026 बायबैक के लिए रिकॉर्ड डेट थी। यानी जिन निवेशकों के पास 4 जून तक शेयर थे, वही इस बायबैक में हिस्सा लेने के पात्र हैं। आमतौर पर रिकॉर्ड डेट निकलने के बाद कई निवेशक मुनाफावसूली करते हैं, जिससे शेयर पर दबाव देखने को मिलता है। Wipro में भी ऐसा ही देखने को मिला।
Wipro ने अप्रैल में 15,000 करोड़ रुपये के बायबैक का ऐलान किया था। कंपनी 250 रुपये प्रति शेयर के भाव पर अपने शेयर वापस खरीदेगी। यह भाव मौजूदा बाजार कीमत से करीब 35 फीसदी ज्यादा है। कंपनी इस बायबैक के तहत अधिकतम 60 करोड़ शेयर खरीदेगी, जो उसकी कुल इक्विटी का करीब 5.7 फीसदी है। यह Wipro का पिछले लगभग तीन साल में सबसे बड़ा पूंजी वापसी कार्यक्रम है। इससे पहले 2023 में कंपनी ने 12,000 करोड़ रुपये का बायबैक किया था।
Wipro की गिरावट सिर्फ बायबैक की वजह से नहीं है। पूरे आईटी सेक्टर में दबाव बना हुआ है। दरअसल, शुक्रवार को अमेरिकी बाजार में टेक शेयरों में भारी बिकवाली देखने को मिली। मजबूत रोजगार आंकड़ों के बाद निवेशकों को डर है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व ब्याज दरें बढ़ा सकता है। इसी वजह से Nasdaq 100 इंडेक्स 5 फीसदी टूट गया, जबकि S&P 500 में 2.6 फीसदी की गिरावट आई। अमेरिकी बाजार में आई इस कमजोरी का असर भारतीय आईटी शेयरों पर भी पड़ा, क्योंकि इन कंपनियों का बड़ा कारोबार अमेरिका से आता है।
आईटी सेक्टर पर दबाव बढ़ाने वाली एक और वजह Accenture को लेकर आई रिपोर्ट्स हैं। कई ब्रोकरेज फर्मों ने Accenture के टारगेट प्राइस घटा दिए हैं। Truist ने शेयर को ‘Hold’ रेटिंग दी और टारगेट प्राइस कम किया, जबकि Citi ने भी टारगेट प्राइस घटाया। इससे निवेशकों को चिंता हुई कि वैश्विक आईटी खर्च उम्मीद से धीमा रह सकता है।
बाजार की सबसे बड़ी चिंता AI को लेकर है। निवेशकों को लग रहा है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पारंपरिक आईटी सर्विस मॉडल को बदल सकता है। Infosys ने अपनी FY26 की सालाना रिपोर्ट में कहा है कि ग्राहक अब तेजी से AI प्रोजेक्ट्स पर खर्च बढ़ा रहे हैं। कंपनियां AI की मदद से लागत घटाने, कारोबार को ज्यादा कुशल बनाने और नए उत्पाद विकसित करने पर फोकस कर रही हैं। यानी अब आईटी कंपनियों के लिए सिर्फ पारंपरिक सेवाएं देना काफी नहीं होगा। उन्हें AI से कमाई का रास्ता भी दिखाना होगा।
हालांकि आईटी कंपनियों का प्रदर्शन अभी बहुत खराब नहीं है और उन्हें नए ऑर्डर भी मिल रहे हैं, लेकिन निवेशक भविष्य की ग्रोथ को लेकर सतर्क हैं। ICICI Securities के मुताबिक, चौथी तिमाही के नतीजों के बाद यह साफ हुआ है कि बड़ी आईटी कंपनियों और कुछ चुनिंदा मिडकैप कंपनियों के प्रदर्शन में अंतर बढ़ रहा है। बड़ी कंपनियों ने कमजोर ग्रोथ गाइडेंस दी है। कंपनियों का कहना है कि ग्राहकों के फैसले लेने में ज्यादा समय लग रहा है और खर्च को लेकर सतर्कता बनी हुई है, खासकर अमेरिका में।
ब्रोकरेज फर्म ICICI Securities का कहना है कि फिलहाल आईटी सेक्टर में हर कंपनी पर दांव लगाने के बजाय चुनिंदा शेयरों को चुनना बेहतर होगा। ब्रोकरेज को Persistent Systems और Coforge ज्यादा पसंद हैं, क्योंकि इन कंपनियों को अच्छे ऑर्डर मिल रहे हैं, उनका कामकाज मजबूत है और वे AI से नए कमाई के मौके भी बना रही हैं। वहीं TCS, Infosys और Wipro जैसी बड़ी आईटी कंपनियों के लिए आने वाले कुछ समय में ग्रोथ की रफ्तार थोड़ी सुस्त रह सकती है।
Wipro फिलहाल दो मोर्चों पर दबाव झेल रही है। एक तरफ पूरे आईटी सेक्टर में बिकवाली है, दूसरी तरफ रिकॉर्ड डेट के बाद तकनीकी दबाव भी देखने को मिल रहा है। हालांकि 250 रुपये प्रति शेयर के बायबैक भाव की वजह से निवेशकों की नजर अभी भी कंपनी पर बनी हुई है। अब बाजार को इंतजार है कि कंपनी टेंडर ऑफर की तारीखों का ऐलान कब करती है और AI के दौर में अपनी ग्रोथ की कहानी कैसे पेश करती है।