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Editorial: ECLGS 5.0 से मुश्किल समय में MSME और विमानन क्षेत्र को राहत

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केंद्र सरकार ने पिछले सप्ताह से जो निर्णय लिए हैं वे संकेत देते हैं कि पश्चिम एशिया संकट के प्रभाव से निपटने के लिए आवश्यक समायोजन किए जा रहे हैं

Last Updated- May 06, 2026 | 9:53 PM IST
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केंद्र सरकार ने पिछले सप्ताह से जो निर्णय लिए हैं वे संकेत देते हैं कि पश्चिम एशिया संकट के प्रभाव से निपटने के लिए आवश्यक समायोजन किए जा रहे हैं। पिछले सप्ताह कुछ ईंधन श्रेणियों की कीमतों में बदलाव किया गया, जिससे तेल विपणन कंपनियों और सरकार को अपने वित्तीय नुकसान को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी। हालांकि, ऊंची ईंधन कीमतें और गैस की सीमित उपलब्धता छोटे और मध्यम उद्यमों समेत कारोबारी जगत को प्रभावित कर रही हैं। एक महत्त्वपूर्ण व्यापारिक मार्ग में व्यवधान को देखते हुए, व्यवसायों को मांग से जुड़ी समस्याओं का भी सामना करना पड़ सकता है।

अनिश्चितता की इस अवधि से कंपनियों को उबरने में मदद करने के लिए, केंद्र सरकार ने मंगलवार को आपातकालीन क्रेडिट लाइन गारंटी योजना (ईसीएलजीएस 5.0) की घोषणा की। इस योजना का लक्ष्य सूक्ष्म लघु और मझोले उपक्रमों यानी एमएसएमई को 100 फीसदी ऋण गारंटी और गैर एमएसएमई उपक्रमों को 90 फीसदी गारंटी मुहैया कराना है। इसके अतिरिक्त विमानन क्षेत्र को एक खास सुविधा प्रदान करने का इरादा है।

योजना के अंतर्गत पात्र व्यवसायों को 2025-26  की मार्च तिमाही में उनकी अधिकतम कार्यशील पूंजी उपयोग के 20  फीसदी तक अतिरिक्त ऋण मिलेगा। यह अतिरिक्त ऋण अधिकतम 100 करोड़ रुपये तक सीमित होगा। विमानन क्षेत्र में कंपनियां कुछ शर्तों के अधीन 1,500 करोड़ रुपये तक का ऋण ले सकेंगी। विमानन क्षेत्र विशेष रूप से एयर टरबाइन ईंधन की कीमतों में वृद्धि और अन्य कारकों से प्रभावित हुआ है।

इसके चलते कुछ मामलों में परिचालन में कमी आई है। सरकार के अनुमान के अनुसार, यह योजना लगभग 2.55 लाख करोड़ रुपये का अतिरिक्त ऋण प्रवाह सक्षम करेगी, जिसमें 5,000 करोड़ रुपये विमानन क्षेत्र के लिए होेंगे। राष्ट्रीय क्रेडिट गारंटी ट्रस्टी कंपनी लिमिटेड के माध्यम से दी जाने वाली ऋण गारंटी फर्मों की तत्काल नकदी आवश्यकताओं को पूरा करने में मदद करेगी।

ऋण गारंटी के कारण बैंक ऋण देने में कम हिचकिचाएंगे। खासतौर पर एमएसएमई को ऋण देने में उनकी हिचकिचाहट कम होगी। छोटे उद्यमों के पास आमतौर पर ऐसे बाहरी झटकों से निपटने के लिए वित्तीय सुरक्षा नहीं होती। वित्तीय सहायता के अभाव में उनके बंद होने का खतरा रहता है जिसे टालना आवश्यक है।

एक बार जब कंपनियां व्यवसाय से बाहर हो जाती हैं, तो उन्हें पुनर्जीवित करना हमेशा कठिन होता है। इसलिए यह महत्त्वपूर्ण होगा कि सरकार ऋणदाताओं और अन्य संबंधित संस्थाओं के साथ मिलकर इस योजना के क्रियान्वयन पर सावधानीपूर्वक निगरानी रखे। यदि संकट बना रहता है, तो आवश्यक हस्तक्षेप करने के लिए भी तैयार रहना चाहिए।

वर्तमान स्थिति में निश्चित रूप से यह कहना कठिन है कि पश्चिम एशिया का संकट वास्तव में कब समाप्त होगा। हालांकि यह आशा फिर से जागी है कि शत्रुता जल्दी समाप्त हो जाएगी।  रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका और ईरान सक्रिय रूप से समझौते की दिशा में काम कर रहे हैं जिसके परिणामस्वरूप कच्चे तेल की कीमतों में सुधार हुआ है और बुधवार को शेयर बाजारों में वृद्धि देखी गई। संघर्ष का शीघ्र समाधान और होर्मुज स्ट्रेट का दोबारा खुलना अत्यंत महत्त्वपूर्ण होता जा रहा है।

वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग पांचवा हिस्सा इस स्ट्रेट से होकर गुजरता है और दो महीने से अधिक समय तक प्रवाह लगभग पूरी तरह रुक जाने से भंडार में उल्लेखनीय कमी आई है। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले हफ्तों में भंडार संकट स्तर से नीचे जा सकता है जिससे तेल की कीमतों में तीव्र वृद्धि होगी। इसलिए यह आवश्यक है कि होर्मुज स्ट्रेट को जल्द से जल्द खोला जाए। फिर भी यदि आने वाले दिनों में कच्चे तेल और गैस के प्रवाह को बहाल करने के लिए कोई समझौता हो भी जाता है, तो भी ईसीएलजीएस फर्मों की मदद करेगा क्योंकि ईंधन विशेषकर गैस की कीमत और उपलब्धता को वांछित स्तर तक पहुंचने में समय लगेगा।

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First Published - May 6, 2026 | 9:51 PM IST

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