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Economic Survey 2023 Highlights: FY24 में 6.5 प्रतिशत की दर से बढ़ सकती है भारतीय अर्थव्यवस्था

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Last Updated- January 31, 2023 | 3:35 PM IST
Nirmala Sitharaman

Economic Survey 2022-13 : वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज यानी मंगलवार को लोकसभा में इकनॉमिक सर्वे (आर्थिक सर्वेक्षण) 2022-23 पेश किया।

इकनॉमिक सर्वे के मुताबिक, देश की अर्थव्यवस्था 2023-24 में चालू वित्त वर्ष के सात प्रतिशत की तुलना में 6.5 प्रतिशत की दर से बढ़ेगी। हालांकि, भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बना रहेगा।  पिछले वित्त वर्ष में वृद्धि दर 8.7 प्रतिशत रही थी।

इकनॉमिक सर्वे में कहा गया है कि भारत पीपीपी (purchasing power parity) के मामले में दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी और विनिमय दर के मामले में पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है।

वित्त वर्ष 2023-24 के लिए वर्तमान कीमतों पर वृद्धि दर के 11 प्रतिशत रहने का अनुमान है।

इकनॉमिक सर्वे की मुख्य बातें :-

-रुपये की विनिमय दर में गिरावट को लेकर चुनौती बरकरार

-देश के पास पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार

-कर्ज वितरण, पूंजी निवेश चक्र, सार्वजनिक डिजिटल मंच का विस्तार और उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजनाएं (पीएलआई), राष्ट्रीय लॉजिस्टिक नीति और पीएम गतिशक्ति जैसी योजनाएं अर्थव्यवस्था को गति देंगी।

-मुद्रास्फीति में नरमी, कर्ज लागत कम होने से बैंक ऋण में वृद्धि वित्त वर्ष 2023-24 में तेज रह सकती है

-छोटे कारोबारियों को कर्ज वृद्धि पिछले साल जनवरी से नवंबर के दौरान 30.5 प्रतिशत रही

-पुरानी मांग के सामने आने और बिना बिके मकानों की संख्या कम होने के साथ घरों के दाम बढ़ रहे हैं

-केंद्र सरकार का पूंजीगत व्यय चालू वित्त वर्ष में अप्रैल-नवंबर के दौरान 63.4 प्रतिशत बढ़ा

-भारत की आर्थिक मजबूती से वृद्धि की गति खोए बिना रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण बाह्य मोर्चे पर उत्पन्न असंतुलन को दूर करने में मदद मिली है

-विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों के बाजार से लगातार पैसा निकालने के बावजूद शेयर बाजार ने 2022 में सकारात्मक रिटर्न दिया

-वित्त वर्ष 2020-21 में गिरावट के बाद छोटे व्यापारियों के जीएसटी भुगतान में वृद्धि हुई है और यह अब महामारी पूर्व स्तर को पार कर गया है।

-चालू वित्त वर्ष में आर्थिक वृद्धि की अगुवाई में निजी खपत और पूंजी निर्माण से रोजगार सृजन में मदद मिली है

-वैश्विक वृद्धि दर सुस्त हो रही है, वैश्विक व्यापार में कमी से चालू वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में निर्यात को नुकसान

-उधार लेने की लागत लंबी अवधि के लिए ‘अधिक’ रह सकती है, ऊंची मुद्रास्फीति उच्च ब्याज दर के चक्र को लंबा कर सकती है

-चालू वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में निर्यात (export) वृद्धि में सुस्ती आई

-ज्यादातर अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में भारत ने असाधारण चुनौतियों का बेहतर ढंग से सामना किया

-वैश्विक जिंस (commodities) कीमतें ऊंची स्तर पर बनी रहने से चालू खाते का घाटा  (current account deficit) बढ़ सकता है, रुपया पर भी आ सकता है दबाव

-महामारी के बाद देश में रिकवरी काफी तेज। वृद्धि को घरेलू मांग से समर्थन, पूंजीगत निवेश (capital investment) तेज

-अर्थव्यवस्था ने कोरोना महामारी काल में जो खोया, वह लगभग पा लिया है, जो रुका था, बहाल हो गया। जिसकी गति मंद पड़ी, उसने अपनी गति फिर से हासिल कर ली

-देश की अर्थव्यवस्था 2023-24 में चालू वित्त वर्ष के सात प्रतिशत की तुलना में 6.5 प्रतिशत की दर से बढ़ेगी। पिछले वित्त वर्ष में वृद्धि दर 8.7 प्रतिशत रही थी

-भारत दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था बनी रहेगी

-वित्त वर्ष 2023-24 के लिए वर्तमान कीमतों पर वृद्धि दर के 11 प्रतिशत रहने का अनुमान

-अमेरिकी केंद्रीय बैंक (US Central Bank) द्वारा ब्याज दरों में और वृद्धि की संभावना के बीच रुपये में गिरावट की चुनौती बनी रहेगी

-चालू वित्त वर्ष के लिए 6.8 प्रतिशत की मुद्रास्फीति इतनी अधिक नहीं है कि निजी खपत को कम कर सके या इतनी कम नहीं है कि निवेश में कमी आए

-भारत पीपीपी (क्रय शक्ति समानता) के लिहाज से दुनिया की तीसरी, विनिमय दर के लिहाज से दुनिया की 5वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था

 

इकनॉमिक सर्वे एक वार्षिक रिपोर्ट है जो अर्थव्यवस्था के विभिन्न सेक्टर की स्थिति को रेखांकित करती है और विकास को गति देने के लिए किए जाने वाले सुधारों का सुझाव देती है।

इससे पहले बजट सत्र के पहले दिन संसद के दोनों सदनों के संयुक्त अधिवेशन को संबोधित करते हुए कहा राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मंगलवार को कहा कि देश में अमृतकाल का 25 वर्ष का कालखंड, स्वतन्त्रता की स्वर्णिम शताब्दी का और विकसित भारत के निर्माण का कालखंड है और हमें 2047 तक ऐसे राष्ट्र का निर्माण करना है जो अतीत के गौरव से जुड़ा हो और जिसमें आधुनिकता का हर स्वर्णिम अध्याय हो।

अपने अभिभाषण में राष्ट्रपति ने कहा कि अमृतकाल का यह 25 वर्ष का कालखंड, स्वतन्त्रता की स्वर्णिम शताब्दी का और विकसित भारत के निर्माण का कालखंड है।

इस बीच अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष  (IMF) ने अनुमान जताया है कि अगले वित्त वर्ष में भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि में कुछ नरमी आ सकती है और यह 6.1 फीसदी रह सकती है, जो 31 मार्च को खत्म होने जा रहे चालू वित्त वर्ष की 6.8 फीसदी की वृद्धि के मुकाबले कम है।

 

 

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First Published - January 31, 2023 | 10:17 AM IST

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