कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और तेल विपणन कंपनियों तथा विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) की मजबूत डॉलर मांग की वजह से रुपया डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर 93.72 पर आ गया। एक ही सत्र में रुपया 1.15 फीसदी गिर गया जो 24 फरवरी 2022 के बाद की सबसे बड़ी एकदिवसीय गिरावट है। दिन के कारोबार में भारतीय मुद्रा 93.77 प्रति डॉलर के निचले स्तर तक भी पहुंची।
रुपया चालू वित्त वर्ष में अब तक डॉलर के मुकाबले 8.8 फीसदी कमजोर हुआ है। यह वित्त वर्ष 2014 के बाद सबसे खराब प्रदर्शन है जब उसमें 9.37 फीसदी की गिरावट आई थी। मार्च में अब तक रुपया 2.92 फीसदी कमजोर हुआ है। विदेशी मुद्रा व्यापारियों का कहना है कि भारतीय रिजर्व बैंक के हस्तक्षेप के बिना रुपया आज संभवतः 95 प्रति डॉलर तक गिर सकता था। उनका मानना है कि आरबीआई ने आज 4 से 5 अरब डॉलर की बिकवाली की होगी।
इंडियन क्रूड बास्केट की कीमत बढ़कर लगभग 156 डॉलर प्रति बैरल हो गई जिससे घरेलू मुद्रा पर दबाव और बढ़ गया। पश्चिम एशिया में संकट के बाद से इंडियन क्रूड बास्केट की कीमत 120 फीसदी बढ़ी है।
छह मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की मजबूती को मापने वाला डॉलर सूचकांक 0.35 फीसदी बढ़कर 99.58 पर कारोबार कर रहा था।
आईएफए ग्लोबल के संस्थापक और सीईओ अभिषेक गोयल ने कहा, ‘आज रुपये की चाल पूरी तरह से ईंधन कीमतों के रुख के अनुरूप रही। यह 4 साल से अधिक समय में सबसे बड़ी एकदिवसीय गिरावट थी। युद्ध के भड़कने और उत्पादन केंद्रों को निशाना बनाए जाने के कारण ऊर्जा आपूर्ति (ब्रेंट क्रूड और एलएनजी दोनों) के लिए खतरा है।’
कच्चे तेल की लगातार बढ़ती कीमतें चालू खाते के घाटे में जबरदस्त वृद्धि के संकेत दे रही हैं। मगर शॉर्ट फॉरवर्ड बुक का तेजी से बढ़ना भी रुपये में गिरावट का एक कारक रहा है।
फिनरेक्स फॉरेक्स एडवाइजर्स के कार्यकारी निदेशक और ट्रेजरी प्रमुख अनिल कुमार भंसाली ने कहा, ‘बाजार को पता चला कि आरबीआई के पास मार्च के मध्य तक 107 अरब डॉलर की ओवरसोल्ड पोजीशन थी, जिसे उसे आने वाले दिनों में खरीदना होगा। मगर इनमें से करीब 30 फीसदी दो साल से अधिक की अवधि के लिए हैं।’ जनवरी के अंत तक फॉरवर्ड बुक में डॉलर का घाटा 68.4 अरब डॉलर था।
भंसाली ने कहा कि इस पोजीशन के परिपक्व होने पर आरबीआई को बड़ी मात्रा में डॉलर की खरीदारी करनी होगी। इससे डॉलर की मांग बढ़ेगी और रुपये में गिरावट का जोखिम पैदा होगा। इसका मतलब साफ है कि भले ही युद्ध समय से पहले खत्म हो जाए लेकिन रुपये के मजबूत होने के बजाय कमजोर होने की अधिक आशंका है।
डीलरों ने कहा कि भारतीय मुद्रा पर दबाव बना रहेगा और केंद्रीय बैंक केवल मूल्यह्रास की गति को धीमा कर सकता है लेकिन उसकी दिशा को पलट नहीं सकता।