अरबपति गौतम अदाणी ने शुक्रवार को अदाणी समूह के भीतर बड़े बदलाव की योजना पेश की। इसका मुख्य उद्देश्य तेजी से फैसले लेना, कॉन्ट्रैक्टर्स के साथ मजबूत साझेदारी बनाना और बड़े स्तर पर कर्मचारियों को प्रशिक्षित करना है। उन्होंने इसे भारत के विकास लक्ष्यों से भी जोड़ा। अंतरराष्ट्रीय श्रमिक दिवस के मौके पर कर्मचारियों को संबोधित करते हुए अदाणी ने कहा कि समूह एक “थ्री-लेयर मॉडल” अपनाएगा, जिससे ग्रुप में संगठनात्मक स्तर संरचना कम होगी और काम तेजी से होगा।
अदाणी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अदाणी ने कहा, “हम चाहते हैं कि जो फैसले अभी तीन दिन में होते हैं, वे सिर्फ तीन घंटे में हो जाएं।” उन्होंने एक “पार्टनरशिप मॉडल” की भी घोषणा की, जिसका उद्देश्य कॉन्ट्रैक्टर्स और सप्लायर्स की संख्या कम करके चुनिंदा भरोसेमंद साझेदारों के साथ काम करना है। इसके साथ ही कर्मचारियों के प्रशिक्षण और करियर ग्रोथ पर भी जोर दिया जाएगा, जिसके लिए अदाणी ट्रेनिंग अकादमी जैसी पहल की योजना है। उन्होंने कहा कि ये तीनों बदलाव एक-दूसरे के बिना अधूरे हैं और समूह की भविष्य की ग्रोथ के लिए जरूरी हैं।
अदाणी ने कहा कि जैसे-जैसे संगठन बड़ा होता है, फैसले लेने की प्रक्रिया धीमी हो जाती है। इसे रोकने के लिए 3-लेयर मॉडल अपनाया जाएगा, जिससे जिम्मेदारी स्पष्ट होगी और फैसले तेजी से लिए जा सकेंगे। उन्होंने कहा कि जब स्तर कम होते हैं, तो फैसले तेजी से होते हैं, काम की गति बढ़ती है और पूरे संगठन में नई ऊर्जा आती है।
उन्होंने बताया कि फिलहाल कई प्रोजेक्ट्स में 100 से ज्यादा ठेकेदार एक साथ काम कर रहे हैं, जिससे समन्वय में दिक्कत आती है और फैसले धीमे हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि हम इसे बदलना चाहते हैं। हमारा लक्ष्य है कि हम कम लेकिन मजबूत और भरोसेमंद साझेदारों के साथ काम करें, जो पूरे प्रोजेक्ट की जिम्मेदारी लेकर उसे तेजी और बेहतर तरीके से पूरा करें। इससे समन्वय आसान होगा, जिम्मेदारी स्पष्ट होगी और काम की गति बढ़ेगी।
अदाणी ने कहा कि कर्मचारियों का लगातार सीखना और आगे बढ़ना जरूरी है। उन्होंने कहा कि हम चाहते हैं कि हर व्यक्ति के लिए आगे बढ़ने का स्पष्ट रास्ता हो। अगर कोई अकुशल है, तो वह अर्ध-कुशल बने, फिर कुशल और आगे चलकर सुपरवाइजर, मैनेजर या लीडर बने।
उन्होंने जोर देकर कहा कि इन तीनों बदलावों के जरिए समूह अपने विकास को और तेज करना चाहता है। इसी उद्देश्य के तहत अदाणी समूह अदाणी ट्रेनिंग अकादमी स्थापित कर रहा है, ताकि लोग अपनी स्किल्स को अपग्रेड कर सकें और नई तकनीक सीख सकें।
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अदाणी ने इस बदलाव को भारत की दीर्घकालिक आर्थिक दिशा से जोड़ते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2047 तक देश को विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि यह संकल्प किसी एक व्यक्ति के प्रयास से पूरा नहीं हो सकता… 1.4 अरब नागरिकों को एकजुट होना होगा।
पोर्ट से पावर तक फैला अदाणी समूह इस समय तेजी से विस्तार के दौर में है। अदाणी ने कहा कि समूह ने अपने पहले 35 वर्षों में लगभग ₹2 लाख करोड़ की संपत्तियां बनाई थीं और अब वह एक ही साल में इतनी ही संपत्ति जोड़ने की उम्मीद कर रहा है। उन्होंने कर्मचारियों से कहा कि यह सिर्फ एक आंकड़ा नहीं है, यह आप सभी की मेहनत का नतीजा है।
उन्होंने मुंद्रा पोर्ट, केरल का विझिनजम पोर्ट, गुजरात के खवड़ा में बड़ा नवीकरणीय ऊर्जा पार्क और नवी मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा जैसे प्रोजेक्ट्स को “राष्ट्र निर्माण” में समूह की भूमिका के उदाहरण के रूप में पेश किया।
सामाजिक बुनियादी ढांचे की बात करते हुए अदाणी ने मुंबई की धारावी पुनर्विकास परियोजना को “मानव परिवर्तन का दुनिया का सबसे बड़ा और चुनौतीपूर्ण प्रयास” बताया। उन्होंने कहा कि हमने यह फैसला मुनाफे के लिए नहीं लिया… धारावी हमारी सामूहिक विफलता का प्रतीक रही है। इस परियोजना का उद्देश्य वहां के निवासियों के जीवन स्तर को बेहतर बनाना है।
अदाणी ने कर्मचारियों पर केंद्रित कदमों का भी जिक्र किया, जिसमें स्थानीय भर्ती को प्राथमिकता देना, स्किल डेवलपमेंट कार्यक्रमों का विस्तार और श्रमिक कल्याण में सुधार शामिल है। समूह मुंद्रा और खवड़ा में 50,000 कर्मचारियों के लिए एयर-कंडीशंड आवास बनाने की योजना बना रहा है, साथ ही मुंद्रा में एक बड़ी रसोई सुविधा विकसित की जाएगी, जहां रोजाना 1,00,000 लोगों के लिए भोजन तैयार किया जा सकेगा।
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कंपनी की यात्रा को याद करते हुए अदाणी ने कहा कि 20 लोगों की छोटी टीम से शुरू होकर आज यह समूह 4,00,000 से अधिक कर्मचारियों तक पहुंच चुका है। उन्होंने कहा, “भले ही मैं हर नाम याद न रख पाऊं, लेकिन आप सभी के साथ मेरा रिश्ता उतना ही मजबूत है।”
साझा योगदान के महत्व पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि यह मायने नहीं रखता कि आपका योगदान छोटा है या बड़ा, मायने यह रखता है कि आपने योगदान दिया। अंत में उन्होंने कर्मचारियों को भारत की विकास गाथा का अहम हिस्सा बताते हुए कहा, “आप केवल कर्मचारी नहीं हैं… आप राष्ट्र निर्माता हैं।”