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भारत में Telegram बैन पर भड़के CEO Pavel Durov, बोले- असली दोषी बचे, 15 करोड़ यूजर्स को मिली सजा

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NEET-UG 2026 री-एग्जाम से पहले Telegram पर लगी अस्थायी रोक को लेकर CEO Pavel Durov ने भारत सरकार के फैसले की आलोचना की है।

Last Updated- June 17, 2026 | 11:52 AM IST
Telegram founder and chief executive officer (CEO) Pavel Durov
Telegram founder and chief executive officer (CEO) Pavel Durov

NEET Re-exam 2026: नीट-यूजी 2026 की री-एग्जाम से पहले नकल और गलत जानकारी के प्रसार को रोकने के लिए भारत में मैसेजिंग प्लेटफॉर्म टेलीग्राम को अस्थायी रूप से प्रतिबंधित कर दिया गया है। हालांकि, इस फैसले की टेलीग्राम के संस्थापक और सीईओ पावेल ड्यूरोव (Telegram CEO Pavel Durov) ने आलोचना की है। उनका कहना है कि इससे लाखों सामान्य उपयोगकर्ता प्रभावित हो रहे हैं, जबकि मूल समस्या का समाधान नहीं हो रहा।

केंद्र सरकार ने मंगलवार को टेलीग्राम की सेवाओं पर 22 जून 2026 तक रोक लगाने का फैसला किया। यह प्रतिबंध 21 जून को होने वाली नीट-यूजी 2026 पुनर्परीक्षा और उसके बाद की अवधि को ध्यान में रखकर लगाया गया है। यह कदम राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (एनटीए) की सिफारिशों के आधार पर उठाया गया है। आदेश के बाद गूगल ने अपने प्ले स्टोर से टेलीग्राम ऐप हटा दिया है, जबकि एप्पल से भी इसी तरह का कदम उठाने की उम्मीद है।

“करोड़ों आम यूजर्स को भुगतनी पड़ रही है सजा”

पावेल ड्यूरोव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि कुछ लोगों द्वारा परीक्षा से जुड़ी गोपनीय सामग्री साझा किए जाने की वजह से पूरे प्लेटफॉर्म को बंद करना उचित नहीं है। उनके मुताबिक इस फैसले का असर भारत में टेलीग्राम का इस्तेमाल करने वाले 15 करोड़ से अधिक वैध और सामान्य यूजर्स पर पड़ा है, जबकि असली दोषी वे लोग हैं जिन्होंने परीक्षा सामग्री लीक की।

“लीक रोकने के बजाय दूसरी ऐप्स पर शिफ्ट हुई गतिविधियां”

ड्यूरोव का कहना है कि टेलीग्राम पर रोक लगाने से प्रश्नपत्र लीक जैसी गतिविधियां बंद नहीं हुईं। उन्होंने दावा किया कि ऐसी सामग्री साझा करने वाले लोग केवल दूसरे डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर चले गए हैं। उनके अनुसार इस तरह की कार्रवाई समस्या की जड़ तक पहुंचने के बजाय आम उपयोगकर्ताओं को परेशान करती है।

ड्यूरोव के अनुसार, टेलीग्राम ने कथित तौर पर परीक्षा सामग्री लीक करने और उससे जुड़े फर्जीवाड़े में शामिल सैकड़ों चैनलों को हटाया है। उन्होंने बताया कि प्लेटफॉर्म संदेशों पर दिखाई देने वाले “एडिटेड” टैग को और अधिक स्पष्ट बनाने पर भी काम कर रहा है, ताकि संदेशों में बाद में बदलाव कर गलत जानकारी फैलाने या समय-सीमा से छेड़छाड़ करने जैसी गतिविधियों पर रोक लगाई जा सके।

उन्होंने कहा कि टेलीग्राम लोगों के लिए एक उपयोगी मंच है और उस पर अस्थायी प्रतिबंध लगाना सही कदम नहीं माना जा सकता।

22 जून तक लागू रहेगी रोक

सरकार ने 21 जून को होने वाली नीट यूजी 2026 पुनर्परीक्षा के मद्देनजर टेलीग्राम की सेवाओं को 22 जून तक अस्थायी रूप से निलंबित करने का निर्णय लिया है। यह कदम परीक्षा में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी और अफवाहों को रोकने के उद्देश्य से उठाया गया है।

दरअसल, 3 मई को आयोजित मूल परीक्षा के दौरान प्रश्नपत्र लीक होने के आरोप सामने आए थे, जिसके बाद पुनर्परीक्षा कराने का फैसला लिया गया।

NTA की सिफारिश पर लिया गया फैसला

राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) की सिफारिश के आधार पर यह प्रतिबंध लागू किया गया है। एनटीए का मानना है कि टेलीग्राम के मैसेज एडिट फीचर का कुछ मामलों में दुरुपयोग किया गया, जहां परीक्षा के बाद संदेशों में बदलाव कर उन्हें पहले से मौजूद लीक सामग्री के रूप में पेश करने की कोशिश की गई।

इसी कारण सरकार ने टेलीग्राम को भारत में पहले से पोस्ट किए गए संदेशों को संपादित करने की सुविधा 30 जून तक बंद रखने का निर्देश भी दिया है।

ऐप स्टोर और प्ले स्टोर पर भी असर

सरकारी निर्देश के बाद गूगल ने अपने प्ले स्टोर से टेलीग्राम को हटा दिया है। वहीं, रिपोर्टों के अनुसार, एप्पल भी आने वाले दिनों में अपने ऐप स्टोर से इस एप्लिकेशन को हटाने की तैयारी कर रहा है।

प्रतिबंध को लेकर उठे सवाल

डिजिटल नीति विशेषज्ञों और कई अधिकार समूहों ने इस फैसले पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि कुछ गलत गतिविधियों को रोकने के लिए पूरे प्लेटफॉर्म को प्रतिबंधित करना उन करोड़ों उपयोगकर्ताओं को भी प्रभावित करता है, जिनका इन मामलों से कोई संबंध नहीं है।

फर्जी संदेशों पर रोक लगाना उद्देश्य

एनटीए के महानिदेशक अभिषेक सिंह ने पीटीआई से कहा कि परीक्षा की शुचिता बनाए रखने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस कार्रवाई के पीछे किसी नए प्रश्नपत्र लीक की घटना नहीं है।

उनके अनुसार, परीक्षा से जुड़े फर्जी संदेश बड़ी संख्या में प्रसारित किए जा रहे थे, जिससे अभ्यर्थियों में भ्रम, चिंता और मानसिक तनाव बढ़ रहा था। इसी को देखते हुए सख्त कदम उठाने का निर्णय लिया गया।

आईटी एक्ट के तहत जारी हुआ आदेश

इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 69A के तहत यह निर्देश जारी किया है। इसके अलावा, एक अलग आदेश के जरिए टेलीग्राम को भारत में अपने मैसेज एडिट फीचर पर भी अस्थायी रोक लगाने को कहा गया है।

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First Published - June 17, 2026 | 10:04 AM IST

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