कमर्शियल गाड़ियां बनाने वाली भारत की दूसरी सबसे बड़ी और दुनिया की चौथी सबसे बड़ी बस बनाने वाली कंपनी अशोक लीलैंड अपने डिफेंस मोबिलिटी बिजनेस के एक नए दौर में कदम रखने के लिए तैयार है। कंपनी के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक कंपनी की डिफेंस टीम कई नए विकल्पों पर विचार कर रही है। इनमें लॉजिस्टिक्स ड्रोन बिजनेस में संभावित प्रवेश और अपने मशहूर डिफेंस ब्रांड ‘स्टैलियन’ का ऑटोनॉमस वर्सन शामिल है।
यह कंपनी व्हीकल फैक्ट्री जबलपुर (वीएफजे) के साथ मिलकर हाइड्रोजन-फ्यूल पर चलने वाले स्टैलियन पर भी काम कर रही है। कंपनी अगले तीन से पांच वर्षों में भारत में 11,000 करोड़ रुपये के डिफेंस मोबिलिटी टेंडरों पर बड़ा दांव लगा रही है।
कंपनी का रक्षा प्रभाग अपने विदेशी कारोबार से राजस्व को मौजूदा लगभग 10 प्रतिशत से बढ़ाने पर ध्यान दे रहा है। उसकी योजना इसे 25 प्रतिशत करने की है। साथ ही वह विदेश में विस्तार भी करना चाहता है। इस समय अशोक लीलैंड के पास सशस्त्र बलों को सेवा देने वाले लगभग 30 प्लेटफॉर्म हैं, जिनमें से अधिकांश आयातित वाहनों को बदल रहे हैं या नए वाहन अनुप्रयोगों में इस्तेमाल किए जा रहे हैं। अशोक लीलैंड के रक्षा व्यवसाय के अध्यक्ष अमनदीप सिंह ने कहा, ‘अगले तीन से पांच वर्षों में, मोबिलिटी और लैंड मोबिलिटी के संदर्भ में भारत में लगभग 11,000 करोड़ रुपये का कुल बाजार होना चाहिए।’
नई पीढ़ी की वाहन योजनाओं के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, ‘भारतीय सशस्त्र बलों के मुख्य वाहन स्टेलियन को ऑटोनोमस बनाना एक चुनौती है। हम इस पर काम कर रहे हैं। यह भविष्य का कार्यक्रम है और इसमें कनेक्टेड वाहन शामिल होंगे।’ इन वाहनों का उपयोग आपूर्ति पक्ष और कुछ महत्त्वपूर्ण अग्रिम संचालन में होने की संभावना है। उन्होंने कहा, ‘हम रक्षा उद्देश्यों के लिए लॉजिस्टिक्स ड्रोन क्षेत्र में प्रवेश की भी संभावना तलाश रहे हैं।’
फिलहाल अशोक लीलैंड के पास रक्षा क्षेत्र के लगभग 2,000 करोड़ रुपये के ऑर्डर हैं, जिनमें से 90 प्रतिशत घरेलू हैं। कंपनी का लक्ष्य भविष्य में विदेशी बाजार से होने वाली कमाई के हिस्से को बढ़ाकर लगभग 25 प्रतिशत करना है।
इंडोनेशिया की प्रमुख सरकारी रक्षा एवं औद्योगिक उपकरण बनाने वाली कंपनी पीटी पिंडाड के साथ हाल में हुई साझेदारी के जरिये वह मुख्य रूप से सार्क देशों, अफ्रीका और आसियान पर ध्यान केंद्रित कर रही है।
उन्होंने कहा, ‘हम खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) के देशों पर भी ध्यान दे रहे हैं। यूएई में हमारा पहले से ही एक संयंत्र है और हम खाड़ी में एक और प्लांट लगाने पर विचार कर रहे हैं।’अशोक लीलैंड के अब दुनिया भर में 13 संयंत्र हैं।
पीटी पिंडाड के साथ करार इंडोनेशिया की इलेक्ट्रिक बसों (ईवी) और रक्षा वाहनों के संयुक्त विकास और निर्माण के लिए महत्त्वपूर्ण सहयोग का ढांचा है।
इस साझेदारी का उद्देश्य अशोक लीलैंड के वाणिज्यिक ईवी प्लेटफॉर्म और रक्षा गतिशीलता समाधानों में वैश्विक विशेषज्ञता का लाभ उठाना है, साथ ही पिंडाड की गहरी इंजीनियरिंग क्षमताओं, स्थानीय विनिर्माण शक्ति और इंडोनेशिया के रक्षा पारिस्थितिकी तंत्र में लंबे समय से चले आ रहे योगदान का भी फायदा उठाना है।