कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) की कोयले से गैस बनाने की परियोजनाओं में 50,000-60,000 करोड़ रुपये का निवेश हो सकता है। सार्वजनिक क्षेत्र की यह कंपनी कोयले के इस्तेमाल का विविधीकरण करके इसे रसायनों और सिंथेटिक ईंधन बदलने की कवायद तेज कर रही है।
कंपनी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बिज़नेस स्टैंडर्ड को बताया कि सीआईएल इस समय ऐसी तीन परियोजनाओं पर काम कर रही है, जिनमें से सबसे प्रमुख ओडिशा के लखनपुर में स्थित परियोजना है। उन्होंने बताया कि इस प्रमुख परियोजना पर अकेले लगभग 20,000 करोड़ रुपये का अनुमानित लागत आएगी।
अधिकारी ने कहा, ‘पहली परियोजना में अधिक लागत आ रही है क्योंकि यह स्वदेशी तकनीक पर आधारित है।’ उन्होंने कहा कि विदेशी तकनीकें अपेक्षाकृत सस्ती साबित हो सकती हैं। कंपनी ने लखनपुर साइट पर शुरुआती और जमीनी काम शुरू कर दिया है, जहां ऑर्डर दिए जा चुके हैं और पिछले छह से सात महीनों से प्रौद्योगिकी प्रदाता काम कर रहे हैं। परियोजना के पर काम करने के लिए इसे इंजीनियरिंग और कार्यान्वयन के लिए कई पैकेजों में विभाजित किया गया है।
अन्य दो परियोजनाएं अभी भी तकनीकी प्रदाताओं के चयन के लिए निविदा प्रक्रिया चल रही है। इनमें से एक वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (डब्ल्यूसीएल) के सहयोग से भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) के साथ मिलकर महाराष्ट्र के चंद्रपुर जिले में स्थापित की जा रही है। अधिकारी ने बताया कि पश्चिम बंगाल के बर्दवान जिले में कोयला गैसीकरण की तीसरी परियोजना पर गेल के सहयोग से काम होगा।
तीनों परियोजनाएं कोयला गैसीकरण पर आधारित हैं, लेकिन इनका उद्देश्य विभिन्न डाउनस्ट्रीम उत्पादों का उत्पादन करना है। लखनपुर परियोजना अमोनियम नाइट्रेट उत्पादन के लिए है, जबकि अन्य दो सिंथेटिक नैचुरल गैस का उत्पादन करेंगी, जो आयातित प्राकृतिक गैस का विकल्प बन सकती है।
अधिकारी ने संकेत दिया कि शेष दो परियोजनाओं में से प्रत्येक पर लगभग 20,000 करोड़ रुपये का खर्च आ सकता है, और तीनों परियोजनाओं पर कुल निवेश 60,000 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। सीआईएल परियोजनाओं के लिए घरेलू और विदेशी दोनों तकनीकों का मूल्यांकन कर रही है, जिसमें यूरोपीय और चीनी फर्मों की तकनीकें भी शामिल हैं।
अधिकारी ने कहा, ‘चीन में तकनीक बहुत उन्नत’ हो गई है और उसका कोयला गैसीकरण में व्यापक अनुभव है। अधिकारी ने उन्नत तकनीक की खरीद में चुनौतियों का भी उल्लेख किया, खासकर जब विदेशी फर्म इंजीनियरिंग, खरीद और निर्माण (ईपीसी) अनुबंधों के साथ तकनीक पेश कर रही हैं। एक सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यम के रूप में सीआईएल को चयन प्रक्रिया के दौरान सरकारी खरीद नियमों का पालन करना होता है।
लखनपुर परियोजना को 2029-30 तक चालू करने का लक्ष्य रखा गया है, जबकि अन्य दो परियोजनाओं के 2030-31 के आसपास चालू होने की उम्मीद है।अधिकारी के अनुसार, परियोजनाओं के लिए तकनीकी बोलियों को जून में अंतिम रूप दिया जा सकता है।
पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव से उत्पन्न ऊर्जा सुरक्षा और आपूर्ति व्यवधान पर बढ़ती चिंता के बीच आयातित ईंधन और रसायनों पर निर्भरता कम करने के केंद्र की रणनीति के एक प्रमुख घटक के रूप में कोयला गैसीकरण उभरा है, जबकि यह घरेलू कोयला भंडार के स्वच्छ उपयोग को भी बढ़ावा देता है।
केंद्र सरकार ने 13 मई को लगभग 750 लाख टन कोयले और लिग्नाइट का गैसीकरण करने में सक्षम परियोजनाओं को प्रोत्साहित करने के लिए 37,500 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन योजना को मंजूरी दी, जो 2030 तक 10 करोड़ टन कोयला गैसीकरण करने के भारत के व्यापक लक्ष्य में योगदान देगा।