अमेरिकी दवा विनिर्माता कंपनी एलाई लिली ने ओरफोरग्लिप्रोन के आकलन वाले अपने अचीव कार्यक्रम के तहत क्लीनिकल परीक्षण के तीसरे चरण के निष्कर्ष जारी किए। यह छोटे-मॉलिक्यूल वाली ओरल ग्लूकागन-लाइक पेप्टाइड-1 (जीएलपी-1) दवा है। कंपनी ने दावा किया कि इसके नतीजे सुरक्षा और असर के मामले में अच्छे रहे हैं। इसमें ओरल सेमाग्लूटाइड की तुलना में ए1सी और शरीर के वजन में काफी कमी देखी गई।
कंपनी ने तीसरे चरण के अचीव-3, अचीव-2 और अचीव -5 परीक्षणों के विस्तृत नतीजे जारी किए। अचीव -3 में उन वयस्कों की तुलना की गई जो ओरफोरग्लिप्रोन और ओरल सेमाग्लूटाइड उपचार शुरू कर रहे थे, जबकि अचीव-2 और अचीव-5 में लिली की दवा की तुलना डेपाग्लिफ्लोजिन से की गई। लिली ने कहा कि उसकी दवा की गोली दिन में एक बार बिना भोजन या पानी से ली जा सकती है।
टेक्सस साउथवेस्टर्न मेडिकल सेंटर विश्वविद्यालय में चिकित्सा के नैदानिक प्रोफेसर और प्रमुख शोधकर्ता डॉ. जूलियो रोसेनस्टॉक ने कहा, एचीव-3 टाइप 2 मधुमेह में ओरल जीएलपी-1 पर पहला तुलनात्मक आंकड़ा मुहैया कराता है, जिसमें ऑर्फोर्ग्लिप्रोन ने ओरल सेमाग्लूटाइड की तुलना में अधिक ए1सी और वजन में कमी दिखाई है, जिसका परीक्षण मधुमेह की स्वीकृत खुराक पर किया गया था।
कंपनी ने दावा किया कि 52 हफ्तों के बाद ओरफ़ोर्ग्लिप्रोन लेने वाले मरीज़ों में ए1सी के स्तर में औसत कमी 9 एमजी डोज के साथ 1.9 फीसदी और 17.2 एमजी डोज के साथ 2.2 फीसदी देखी गई जबकि ओरल सेमाग्लूटाइड के मामले में यह कमी क्रमशः 1.1 फीसदी और 1.4 फीसदी थी।