facebookmetapixel
Advertisement
राज्य की प्रतिक्रिया और अभिव्यक्ति की सीमाएं testtestभारत का डिफेंस प्रोडक्शन ऑल-टाइम हाई पर, FY26 में15.6% बढ़कर ₹1.78 लाख करोड़ पर पहुंचाHCL Tech के नतीजों की तारीख तय, 13 जुलाई को आएगा रिपोर्ट कार्ड; डिविडेंड पर भी होगा फैसलारिटर्न कहीं और, निवेश कहीं और! क्या सही फंड चुन रहे हैं निवेशक? एक्सपर्ट से समझेंAI के दम पर नई छलांग की तैयारी में Coforge? शेयर में 50% तक तेजी की उम्मीद, एक्सपर्ट्स बुलिशकच्चा तेल सस्ता हो रहा है, फिर पेट्रोल-डीजल क्यों नहीं?20 लाख रुपये से ज्यादा पैकेज वाली नौकरियों में उछाल, ब्रोकरेज ने बताए 4 पसंदीदा IT स्टॉक्सJio IPO का इंतजार खत्म! ₹4 अरब के मेगा IPO की तैयारी तेज, जल्द दाखिल होंगे ड्राफ्ट पेपरसरकार के आदेश के खिलाफ Telegram का पलटवार, Delhi HC पहुंची याचिकाब्राजील में पेट्रोल से 70% सस्ता, भारत में सिर्फ 20%: क्या फ्लेक्स-फ्यूल बनेगा हिट? बता रहे एक्सपर्ट

आम आदमी की जेब पर बढ़ने वाला है बोझ? साबुन-डिटर्जेंट-बिस्किट की कीमतें बढ़ाने की तैयारी में कंपनियां

Advertisement

कंपनियां लागत कम करने के लिए छूट और प्रचार खर्चों में कटौती, भंडार प्रबंधन को मजबूत करने और आपूर्ति श्रृंखला को अधिक कुशल बनाने जैसे कदम उठा रही हैं

Last Updated- May 10, 2026 | 10:34 PM IST
FMCG
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

कच्चे तेल से जुड़ी महंगाई, पैकेजिंग सामग्री और ईंधन लागत में बढ़ोतरी के बीच साबुन, डिटर्जेंट, बिस्किट, पैकेट बंद खाद्य पदार्थ और पेय उत्पादों की कीमतें बढ़ सकती हैं। रोजमर्रा के उपभोग का सामान बनाने वाली (एफएमसीजी) देश की प्रमुख  कंपनियां बढ़ती लागत से मुनाफे पर पड़ रहे दबाव को कम करने के लिए चरणबद्ध तरीके से दाम बढ़ाने की तैयारी कर रही हैं। 

एफएमसीजी कंपनियों के अधिकारियों ने हालिया तिमाही नतीजों के दौरान संकेत दिया है कि वे पहले ही तीन से पांच प्रतिशत तक कीमतें बढ़ा चुकी हैं और लागत का दबाव जारी रहने पर आगे भी मूल्य वृद्धि की जा सकती है। कंपनियों का कहना है कि पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के कारण वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हुई है, जिससे कच्चे माल, लॉजिस्टिक्स और पैकेजिंग लागत बढ़ी है। रुपये में कमजोरी ने भी दबाव बढ़ाया है। इसका असर खाद्य उत्पादों, व्यक्तिगत देखभाल, पेय पदार्थ और घरेलू उपयोग के सामान सहित कई क्षेत्रों पर दिखाई दे रहा है।

कंपनियां मुनाफा बनाए रखने के लिए कीमतें बढ़ाने के साथ पैकेट बंद उत्पादों में मात्रा कम करने की रणनीति भी अपना रही हैं। हालांकि पांच, 10 और 15 रुपये वाले छोटे पैक बाजार में बनाए रखने की कोशिश की जा रही है ताकि बिक्री पर असर कम पड़े। 

कंपनियां लागत कम करने के लिए छूट और प्रचार खर्चों में कटौती, भंडार प्रबंधन को मजबूत करने और आपूर्ति श्रृंखला को अधिक कुशल बनाने जैसे कदम उठा रही हैं। इसके बावजूद उपभोक्ताओं पर बढ़ती लागत का कुछ बोझ पड़ने की संभावना है। 

डाबर इंडिया के वैश्विक मुख्य कार्य अधिकारी मोहित मल्होत्रा ने कहा कि कंपनी इस वित्त वर्ष में करीब 10 प्रतिशत महंगाई का सामना कर रही है। उन्होंने कहा कि महंगाई के प्रभाव को कम करने के लिए कंपनी विभिन्न कारोबार खंडों में औसतन चार प्रतिशत तक कीमतें बढ़ा चुकी है और लागत नियंत्रण के उपाय भी कर रही है। 

ब्रिटानिया इंडस्ट्रीज ने भी संकेत दिया है कि ईंधन और पैकेजिंग लागत में करीब 20 प्रतिशत वृद्धि के कारण जल्द ही कीमतें बढ़ाई जा सकती हैं। कंपनी के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्य अधिकारी रक्षित हरगेव ने कहा कि कंपनी सीधे दाम बढ़ाने और पैक के वजन में कमी, दोनों विकल्पों पर विचार कर रही है। ब्रिटानिया के पास गुड डे, मेरी गोल्ड, मिल्क बिकीज और टाइगर जैसे ब्रांड हैं। उन्होंने कहा कि बड़े पैक वाले उत्पादों की कीमतों में बढ़ोतरी की जाएगी। 

Advertisement
First Published - May 10, 2026 | 10:34 PM IST (बिजनेस स्टैंडर्ड के स्टाफ ने इस रिपोर्ट की हेडलाइन और फोटो ही बदली है, बाकी खबर एक साझा समाचार स्रोत से बिना किसी बदलाव के प्रकाशित हुई है।)

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement