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डीजल की महंगाई से ट्रांसपोर्टर्स बेहाल, माल ढुलाई दरों में बढ़ोतरी की तैयारी; ग्राहकों की जेब पर पड़ेगा सीधा असर

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ईंधन और परिचालन इनपुट की बढ़ती कीमतों के कारण ट्रांसपोर्टर्स माल ढुलाई दरों में 3.5 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी करने जा रहे हैं, जिससे लॉजिस्टिक्स व क्विक-कॉमर्स पर दबाव बढ़ेगा

Last Updated- May 16, 2026 | 9:47 AM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

शाइन जेकबदेश भर के ट्रक ऑपरेटरों और लॉजिस्टिक्स कंपनियों ने ईंधन की कीमतों में वृद्धि के कारण माल ढुलाई दरों में 3 से 3.5 प्रतिशत की वृद्धि होने का संकेत दिया है। उन्होंने सरकार को चेतावनी दी है कि इससे क्षेत्र पर समग्र मूल्य दबाव के बीच उनके लाभ पर और भी दबाव पड़ेगा।

ईंधन की कीमतों में वृद्धि ऐसे समय में हुई है जब उद्योग कई परिचालन इनपुट की लागत में वृद्धि देख रहा है। इन इनपुट में टायर, भारत स्टेज VI  मानकों के अनुरूप इंजनों में प्रयुक्त डीजल एग्जॉस्ट फ्लूइड, टोल चार्ज, ल्यूब्रिकेंट्स, स्पेयर पार्ट्स और लॉजिस्टिक्स संचालन के लिए आवश्यक अन्य इस्तेमाल होने वाली वस्तुएं शामिल हैं।

पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि से सरकारी तेल कंपनियों को बढ़ते नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। इसके बाद शुक्रवार को ईंधन की कीमतों में 3 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि की गई।

ऑल इंडिया ट्रांसपोर्टर्स वेलफेयर एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक गोयल ने कहा, ‘हमारा डीजल की कीमतों में मौजूदा वृद्धि के मद्देनजर मानना ​​है कि उचित और तर्कसंगत माल ढुलाई शुल्क में बदलाव लगभग 3 से 3.5 प्रतिशत के बीच होना चाहिए और यह मार्ग, वाहन के प्रकार और परिचालन प्रोफाइल पर निर्भर करेगा।’

उद्योग निकाय ने अपने सदस्यों को सलाह दी कि वे ग्राहकों और प्रमुख कंपनियों के साथ रचनात्मक रूप से काम करें ताकि परिचालन लागत में वृद्धि के लिए उचित मुआवजा तय किया जा सके। एसोसिएशन ने टायरों के मामले में कहा कि इनकी कीमतों में बीते एक महीने में 1,000 रुपये की वृद्धि हुई है। 

ईंधन की बढ़ती कीमतें भारत के ई-कॉमर्स, क्विक-कॉमर्स और मटेरियल-हैंडलिंग क्षेत्रों में बड़े संरचनात्मक बदलाव ला रही हैं।

बिजनेस सर्विस प्लेटफॉर्म मैटिरियल हैंडलिंग इक्विपमेंट सोल्यूशंस के वाइस प्रेजिडेंट जय सांचेती ने कहा, ‘ईंधन की कीमतों में 10 प्रतिशत की वृद्धि से अंतिम-मील डिलीवरी लागत में लगभग 5 से 7 प्रतिशत की वृद्धि हो सकती है। इससे पहले से ही कम मुनाफे पर चल रही कंपनियों पर दबाव बढ़ रहा है। इससे क्विक कॉमर्स कारोबार विशेष रूप से प्रभावित हो रहे हैं। इसका कारण यह है कि डिलीवरी खर्च बढ़ने से लाभप्रदता कम हो जाती है जबकि औसत ऑर्डर मूल्य कम रहता है। लिहाजा शहरी उपभोक्ताओं के करीब स्थित माइक्रो फुलमेंट सेंटरों में बदलाव तेजी से हो रहा है ताकि यात्रा की दूरी और डिलीवरी लागत को कम किया जा सके।’

नमक्कल तालुक लॉरी ओनर्स एसोसिएशन के सचिव के अरुल ने ईंधन के दाम बढ़ने के मुद्दे पर कहा, ‘हम इसे पूरी तरह से ग्राहकों पर डालेंगे। यह राज्य के अनुसार 3 प्रतिशत से अधिक हो सकता है। यह ऐसे समय में हो रहा है जब हम परिचालन घाटे में चल रहे हैं और सरकार के इस फैसले से प्रति ट्रक लागत में प्रति माह 10,000 रुपये की और वृद्धि होगी और हमारा मुनाफा खत्म हो जाएगा।’ उन्होंने कहा, ‘केरल जैसे कुछ राज्यों में ईंधन की खपत पर सीमा भी लागू है। इससे दबाव और बढ़ रहा है।’

ऑल इंडिया ट्रांसपोर्टर्स वेलफेयर एसोसिएशन ने सभी ट्रांसपोर्टरों और उद्योग के हितधारकों से आग्रह किया है कि वे इन चुनौतीपूर्ण समय में समग्र लॉजिस्टिक्स लागत को कम करने के लिए नवीन, सहयोगात्मक तरीकों की पहचान करने के लिए अपने ग्राहकों और आपूर्ति श्रृंखला भागीदारों के साथ मिलकर काम करें। बेहतर रूट प्लानिंग, बेड़े के बेहतर उपयोग, टर्नअराउंड ऑप्टिमाइजेशन, ईंधन-कुशल ड्राइविंग प्रथाओं, मल्टीमॉडल एकीकरण और प्रौद्योगिकी को अपनाने से सेवा दक्षता बनाए रखते हुए आर्थिक बोझ को सामूहिक रूप से कम करने में मदद मिल सकती है।

संचेती ने कहा, ‘जैसे-जैसे ईंधन की लागत अस्थिर बनी हुई है, व्यवसाय तेजी से विकसित हो रही आपूर्ति श्रृंखला परिदृश्य में प्रतिस्पर्धी बने रहने के लिए विद्युतीकरण, ऑटोमेशन और विकेंद्रीकृत इन्वेंट्री रणनीतियों को वैकल्पिक निवेश के बजाय आवश्यक कदम के रूप में देख रहे हैं।’ 

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First Published - May 16, 2026 | 9:47 AM IST

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