राष्ट्रीय कौशल विकास निगम (एनएसडीसी) अकादमी के कौशल विकास कार्यक्रम में दाखिला लेने वाले लोगों में एक चौथाई से भी कम रोजगार हासिल कर पाते हैं। एनएसडीसी के सार्वजनिक सूचना पृष्ठ (पब्लिक डैशबोर्ड) पर उपलब्ध आंकड़ों से यह जानकारी हासिल हुई है। ये आंकड़े इस बात की ओर इशारा कर रहे हैं कि प्रशिक्षण को नौकरी में तब्दील करने में किस तरह चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
एनएसडीसी अकादमी के जरिये 8 जून, 2026 तक दाखिला लेने वाले 28.3 लाख उम्मीदवारों में केवल 6,60,586 को नौकरी मिली थी। यानी प्लेसमेंट रेट या रोजगार लगने की दर लगभग 23 प्रतिशत है। डैशबोर्ड से यह भी पता चला कि 14 लाख उम्मीदवारों को प्रमाणपत्र मिले थे, यानी दाखिला लेने वाले लोगों में आधे से भी कम ने प्रमाणपत्र पाने के लिए जरूरी शर्तें पूरी कीं।
ये आंकड़े दाखिला, प्रमाणन (सर्टिफिकेशन) और नौकरी के बीच बड़े अंतर को दिखाते हैं। हालांकि, शुरुआत के बाद से इस प्लेटफॉर्म ने नए कौशल सीखने की ललक रखने वाले लाखों लोगों को आकर्षित किया है मगर दाखिला ले चुके हर चार उम्मीदवारों में एक से भी कम को नौकरी मिली।
सर्टिफिकेशन पूरा करने वालों में भी एक बड़ा हिस्सा अपने प्रशिक्षण को नौकरी में नहीं बदल पाया।
अब तक अलग-अलग कंपनियों में नाम दर्ज कराने वाले कुल 28.3 लाख उम्मीदवारों में 24 लाख को प्रशिक्षण दिए गए, 20.4 लाख की समीक्षा की गई और 14 लाख को प्रमाणपत्र दिए गए।
एनएसडीसी अकादमी की शुरुआत वर्ष 2023 में हुई थी। यह एक ऐसा प्लेटफॉर्म है जो बड़े ‘स्किल इंडिया ईकोसिस्टम’ के हिस्से के तौर पर विश्वविद्यालय, कॉलेज और प्रशिक्षण साझेदारों के जरिये उद्योग से जुड़े कौशल विकास और उच्च शिक्षा कार्यक्रम की पेशकश करता है। इसका मकसद कौशल विकास को उच्च शिक्षा के साथ जोड़ना और कई क्षेत्र में रोजगारोन्मुखी पाठ्यक्रम के जरिये रोजगार की क्षमता को बेहतर बनाना है। ये आंकड़े इस पहल से हासिल हुई उपलब्धियों की एक झलक दिखाते हैं और साथ ही प्रशिक्षण में हिस्सा लेने वालों को नौकरी दिलाने की चुनौती को भी उजागर करते हैं। सरकारी मदद वाले कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रम कितने असरदार हैं इसे मापने के लिए प्लेसमेंट के नतीजों पर तेजी से ध्यान दिया जा रहा है।
इसका कारण यह है कि नीति-निर्माता अब दाखिले की संख्या के बजाय रोजगार पैदा करने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। कौशल सिखाने की सरकारी पहल की संसदीय जांच में प्लेसमेंट के नतीजे लगातार चर्चा का विषय रहे हैं। श्रम, कपड़ा और कौशल विकास पर बनी संसदीय स्थायी समिति ने प्लेसमेंट के आंकड़ों को कौशल-विकास कार्यक्रमों की सफलता का ‘असली पैमाना’ बताया है। ये आंकड़े 8 जून, 2026 तक एनएसडीसी अकादमी डैशबोर्ड पर उपलब्ध कुल डेटा पर आधारित हैं। पूरे डेटाबेस से पता चला कि कई कंपनियों ने कई छात्रों का दाखिला लिया मगर कम छात्रों को प्रशिक्षण और प्रमाणपत्र दिए और एक भी छात्र को नौकरी नहीं दिलाई।
एनएसडीसी अकादमी विश्वविद्यालय, कॉलेज और प्रशिक्षण साझेदारों के जरिये कई तरह के कौशल और उच्च शिक्षा कार्यक्रम चलाती है। इन पाठ्यक्रम में डिजिटल कौशल, कारोबार एवं प्रबंधन, सॉफ्टवेयर और उभरती तकनीक जैसे क्षेत्र शामिल हैं और ये सर्टिफिकेट, डिप्लोमा और डिग्री-संबंद्ध प्रारूप में कराए जाते हैं। कार्यक्रम की अवधि अलग-अलग होती है। अल्प अवधि के रोजगार-उन्मुख पाठ्यक्रम की अवधि कुछ सप्ताहों से लेकर प्रमाणन और कौशल-विकास कार्यक्रमों के लिए कई महीनों तक की होती है।