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फार्मा सेक्टर का नया फॉर्मूला! भारत से अफ्रीका तक खास दवाओं के दम पर बढ़ेगा मुनाफा

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भारतीय फार्मा कंपनियां अब जेनेरिक दवाओं से आगे बढ़कर स्पेशलिटी ड्रग्स, बायोसिमिलर और नए वैश्विक बाजारों के जरिए कमाई बढ़ाने पर जोर दे रही हैं।

Last Updated- June 17, 2026 | 8:07 AM IST
Indian Pharma’s New Growth Formula: Specialty Drugs Drive Profits from India to Africa
Representative image

देश की फार्मास्युटिकल (फार्मा) कंपनियां अब अपनी वृद्धि के लिए पारंपरिक अमेरिकी जेनेरिक बाजार से आगे देख रही हैं। वे विस्तार के अगले चरण के लिए भारत और उभरते बाजारों में खास दवाइयों, बायोसिमिलर, क्रॉनिक थेरेपी और ब्रांडेड कारोबारों पर दांव लगा रही हैं।

सन फार्मास्युटिकल इंडस्ट्रीज, डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज, सिप्ला और ल्यूपिन जैसी बड़ी दवा कंपनियों के प्रबंधन की टिप्पणियों से पता चलता है कि उद्योग में व्यापक बदलाव हो रहा है और अब वह ज्यादा मूल्य वाले उत्पादों और अलग-अलग भौगोलिक क्षेत्रों से होने वाली कमाई की दिशा में बढ़ रहा है।

इस बदलाव का एक स्पष्ट संकेत सन फार्मा से मिलता है। उसके ग्लोबल इनोवेटिव मेडिसिन्स कारोबार ने साल 2025-26 (वित्त वर्ष 26) में 1.4 अरब डॉलर का आंकड़ा पार कर लिया है और अब उसकी संयुक्त बिक्री में 22 प्रतिशत से अधिक की हिस्सेदारी है। कंपनी ने कहा कि उभरते बाजारों में वृद्धि तेजी से नवीन उपचारों के साथ-साथ ब्रांडेड जेनेरिक दवाओं से संचालित हो रही है।

सन फार्मा के मुख्य परिचालन अधिकारी आलोक सांघवी ने वित्त वर्ष 26 की चौथी तिमाही (जनवरी-मार्च) वित्तीय वर्ष के आय परिणामों की बातचीत के दौरान कहा, ‘नवीन दवाइयां इस वर्ष उभरते बाजारों में विकास के मामले में नई अहम संचालक रही हैं और इल्यूम्या ने रोमानिया, ब्राजील और चीन जैसे साझेदार बाजारों में अच्छा प्रदर्शन किया है।’

सन फार्मा की रणनीति इस क्षेत्र में व्यापक रुझान को दर्शाती है, क्योंकि भारतीय दवा कंपनियां सस्ती जेनेरिक सप्लायरों से विकसित होकर वैश्विक स्तर पर विविधता वाली विशेष दवा कंपनियों के रूप में बनना चाहती हैं।

डॉ. रेड्डीज ने जटिल उत्पाद बनाने में निवेश जारी रखते हुए विशिष्ट दवाओं, बायोसिमिलर और विशेष दवाओं की प्रमुख वृद्धि क्षेत्र के रूप में पहचान की है। डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज के मुख्य वित्तीय अधिकारी (सीएफओ) एमवी नरसिम्हम ने कहा, ‘वित्त वर्ष 26 ने उत्पाद-विशिष्ट बाधाओं और कुछ एकमुश्त प्रभावों के बीच दमदार परिचालन का प्रदर्शन किया और अब तक का सर्वाधिक वार्षिक राजस्व कमाया। इस प्रमुख कारोबार ने तिमाही के साथ-साथ समूचे वित्त वर्ष 26 के दौरान दो अंकों में वृद्धि जारी रखी।’

इसी बीच सिप्ला ने दक्षिण अफ्रीका, श्वसन उपचार और ब्रांडेड नुस्खे वाले कारोबारों को विकास के प्रमुख संचालकों के रूप में बताया है। साथ ही उसने अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपनी मौजूदगी का विस्तार किया है। सिप्ला के प्रबंध निदेशक और वैश्विक मुख्य कार्य अधिकारी अचिन गुप्ता ने कहा, ‘हमारे अफ्रीकी कारोबार ने बाजार का नेतृत्व करने वाली वृद्धि लगातार जारी रखी। हमारे उभरे बाजार और यूरोप के कारोबार का परिचालन सार्थक रूप से बढ़कर 40 करोड़ डॉलर से अधिक वाली कारोबार इकाई बन गया। ये सब उपलब्धियां हमारे अनुशासित क्रियान्वयन और विभिन्न भौगोलिक इलाकों में विविध विकास के बारे में हमारी प्रतिबद्धता दर्शाती हैं।’

ल्यूपिन ने भी इसी तरह की विविधता वाली रणनीति अपनाई है। इसके बल पर उसने भारत, उभरते बाजारों और अमेरिका के बाहर विकसित बाजारों में मजबूत वृद्धि दर्ज की है। साथ ही जटिल इंजेक्शनों, श्वसन संबंधी दवओं और बायोसिमिलर में निवेश किया है।

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First Published - June 17, 2026 | 8:07 AM IST

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