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यूरिया उत्पादन पर नहीं पड़ा युद्ध का साया, पश्चिम एशिया संकट के बीच सरकार ने बढ़ाई खाद की उपलब्धता

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पश्चिम एशिया संकट के बावजूद भारत में यूरिया उत्पादन स्थिर बना हुआ है। सरकार ने खरीफ सीजन के लिए पर्याप्त घरेलू उत्पादन और भारी आयात सुनिश्चित किया है

Last Updated- April 30, 2026 | 9:57 PM IST
Fertilizer
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

सरकार ने मार्च-अप्रैल में यूरिया उत्पादन में गिरावट की किसी भी आशंका को खारिज किया। इस सिलसिले में सरकार ने गुरुवार को कहा कि पश्चिम एशिया संकट के बावजूद इस अवधि में उत्पादन 37 लाख टन तक पहुंच गया, जो पिछले वर्ष के स्तर के लगभग बराबर है। इसके अलावा, खरीफ सीजन से पहले यूरिया की कमी को पूरा करने के लिए 37 लाख टन यूरिया का आयात भी किया गया है।

पश्चिम एशिया संकट के बावजूद घरेलू यूरिया उत्पादन मार्च-अप्रैल में 37.49 लाख टन रहा, जो पिछले साल के लगभग बराबर है। साथ ही खरीफ सत्र से पहले कमी को पूरा करने के लिए 37 लाख टन यूरिया आयात भी सुनिश्चित किया गया है।

मार्च-अप्रैल के दौरान कुल घरेलू उर्वरक उत्पादन (डीएपी, एनपीकेएस और अन्य) 62.37 लाख टन रहा जबकि आयात 15.3 लाख टन था। 

पश्चिम एशिया पर जानकारी देने के लिए अंतर-मंत्रालयी संवाददाता सम्मेलन में उर्वरक विभाग में अतिरिक्त सचिव अपर्णा एस. शर्मा ने कहा, ‘संकट के बाद भी उर्वरकों का घरेलू उत्पादन और आयात मजबूत बना हुआ है। इस अवधि में लगभग 78 लाख टन उर्वरक की उपलब्धता बढ़ाई गई है।’

उन्होंने कहा कि भारत ने मार्च में 16.4 लाख टन और अप्रैल में 21 लाख टन यूरिया का उत्पादन किया। इससे कुल उत्पादन 37.4 लाख टन हो गया। यह पिछले वर्ष की समान अवधि के लगभग बराबर है।

यूरिया की कमी को आयात के जरिये पूरा किया जा रहा है। शर्मा ने कहा, ‘हमने वैश्विक निविदा जारी कर लगभग 37 लाख टन यूरिया सुनिश्चित किया है।’

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First Published - April 30, 2026 | 9:45 PM IST

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