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मजदूरों को वापस बुलाने के लिए कंपनियां दे रहीं फ्री फ्लाइट और ज्यादा सैलरी, फिर भी नहीं लौट रहे लोग

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दक्षिण भारत की कंपनियां प्रवासी मजदूरों को वापस बुलाने के लिए मुफ्त हवाई टिकट, लग्जरी बस और वेतन वृद्धि जैसी सुविधाएं दे रही हैं

Last Updated- May 14, 2026 | 11:06 AM IST
Labour

श्रमिकों के गंभीर संकट से जूझ रहीं दक्षिण भारत की कई कंपनियां उनको वापस लाने के लिए मुफ्त हवाई टिकट, लग्जरी बस से यात्रा और वेतन वृद्धि तक हरसंभव पेशकश कर रही हैं। हालिया विधान सभा चुनावों में मतदान करने के लिए अपने गृह राज्य गए पश्चिम बंगाल और असम जैसे राज्यों

के प्रवासी श्रमिक काम पर लौटने से हिचकिचा रहे हैं। इससे कई उद्योग की चिंता बढ़ गई है। उद्योग सूत्रों का कहना है कि फिलहाल केरल, तमिलनाडु और कर्नाटक जैसे राज्य गंभीर श्रमिक संकट से जूझ रहे हैं। पश्चिम एशिया में युद्ध के प्रभाव के कारण संभावित छंटनी, एलपीजी किल्लत, दक्षिण भारत में आगामी बारिश का मौसम, ईंधन की कमी और भीषण गर्मी जैसी चिंताओं के कारण श्रमिक अपने गृह राज्य से वापसी में हिचकिचा रहे हैं।

इसके अलावा बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश में बुनियादी ढांचे के काम बढ़ने से भी दक्षिण भारत में श्रमिकों की किल्लत बढ़ रही है। श्रमिक अपने घर के करीब रोजगार के अवसर मिलने पर वहीं रुकना पसंद कर रहे हैं।

सेंटर फॉर माइग्रेशन ऐंड इन्क्लूसिव डेवलपमेंट (सीएमआईडी) के कार्यकारी निदेशक बिनॉय पीटर ने कहा, ‘पिछले वर्षों के विपरीत पश्चिम बंगाल और असम के लगभग सभी श्रमिक मतदान के लिए अपने गृह राज्य गए थे। इसकी मुख्य वजह मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) से संबंधित चिंताएं थीं। इन राज्यों में हुए मतदान प्रतिशत में भी श्रमिकों की वापसी का असर दिखा है।

वे शायद अपने राज्य में स्कूल की छुट्टियों, केरल में आगामी बारिश, बकरीद और कृषि सीजन के खत्म होने का इंतजार कर रहे होंगे।’ पश्चिम बंगाल में प्रवासी श्रमिकों की वापसी के कारण रिकॉर्ड 92.47 फीसदी मतदान हुआ और असम में 85.96 फीसदी मतदान हुआ। उद्योग के अनुमानों के अनुसार केरल, तमिलनाडु और कर्नाटक में लगभग 1.3 करोड़ उत्तर भारतीय मजदूर काम कर रहे हैं।

पश्चिम एशिया संकट के कारण निर्माण में टाइल्स और प्लाईवुड में रेजिन जैसी प्रमुख सामग्रियों की कमी से भी श्रमिकों की वापसी में देरी हो रही है। श्रमिकों को भविष्य में नौकरी छूटने का डर भी सता रहा है। केरल सबसे बुरी तरह प्रभावित राज्यों में शामिल है जहां होटल, आतिथ्य सेवा और रियल एस्टेट क्षेत्र लगभग ठप हो गए हैं।

बिल्डर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के महानिदेशक राजू जॉन ने कहा, ‘केरल में इसका प्रभाव अधिक है क्योंकि श्रमिक मुख्य रूप से पश्चिम बंगाल और असम से आते हैं। मुझे लगता है कि कई लोगों ने हवाई टिकट और वेतन वृद्धि की भी पेशकश की थी। वे श्रमिकों को वोट डालने के लिए लग्जरी बसों में ले गए थे। मगर इसके बावजूद वे लौटने में हिचकिचा रहे हैं।’ सीएमआईडी के आंकड़ों के अनुसार करीब 40 लाख प्रवासी मजदूरों में से 70 फीसदी पश्चिम बंगाल और असम से हैं।

लायम ग्रुप के चेयरमैन जी रमेश ने कहा, ‘दक्षिण भारत में हर उद्योग इससे पीड़ित है। एक अन्य प्रभाव उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड जैसे राज्यों में हो रहे विकास का भी दिखेगा। दक्षिण की राज्य सरकारों और कंपनियों को श्रम प्रबंधन के तरीके पर नए सिरे से विचार करना होगा।’ लायम ग्रुप देश भर में 65 से अधिक कंपनियों को कुशल श्रमबल उपलब्ध कराता है।

लायम ग्रुप के चेयरमैन जी रमेश ने कहा, ‘पश्चिम बंगाल में नई सरकार द्वारा उद्योग खोले जाने के साथ ही वे यहां नहीं आएंगे। पश्चिम बंगाल, झारखंड और ओडिशा हमारे सबसे बड़े श्रम बाजार हैं। अगर विनिर्माण और निर्माण गतिविधियां बढ़ती हैं तो यह चिंता का विषय होगा।’ उन्होंने कहा कि उनकी कंपनी उत्तरी राज्यों में वेल्डिंग श्रमिकों की तलाश कर रही है। अधिकतर लोग 30,000 से 33,000 रुपये तक का वेतन मांग रहे हैं जो दक्षिण में लगभग 20,000 रुपये के औसत वेतन से अधिक है।

तमिलनाडु की निटवियर राजधानी तिरुपुर का ही उदाहरण लेते हैं। तिरुपुर एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष और केएम निटवियर के प्रवर्तक केएम सुब्रमण्यम ने कहा कि कंपनियों ने अपने अधिकारियों को उत्तर और पूर्वी भारत के गांवों में पहले ही भेज दिया है ताकि उन मजदूरों को वापस लाया जा सके जो त्योहारी सीजन और चुनावों के दौरान चले गए थे। उन्होंने कहा, ‘हम अभी 70 फीसदी क्षमता पर काम कर रहे हैं।’

तिरुपुर एक्सपोर्टर्स ऐंड मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष एम. मुथुरतिनम ने भी इससे सहमति जताई। उन्होंने कहा, ‘पश्चिम एशिया संकट के कारण ऑर्डर भी कम है। उन्हें संभावित मांग में नरमी का डर भी हो सकता है।’

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First Published - May 14, 2026 | 11:06 AM IST

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