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मेडिकल निर्यात को मिलेगी ‘खुराक’: अमेरिका के टैरिफ कटौती से भारतीय उपकरणों की बढ़ेगी मांग

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उद्योग के अधिकारियों का कहना है कि इस कदम से प्रतिस्पर्धा के समीकरण बदल जाएंगे क्योंकि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला चीन से हट रही हैं

Last Updated- February 03, 2026 | 10:20 PM IST
medical device
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

भारतीय वस्तुओं पर अमेरिकी आयात शुल्क (टैरिफ) में भारी कटौती भारत के स्वास्थ्य सेवा विनिर्माण क्षेत्र के लिए सेहत की खुराक साबित हो रही है। इसमें चिकित्सा उपकरण सबसे बड़े लाभार्थियों में हैं। उद्योग के अधिकारियों का कहना है कि इस कदम से प्रतिस्पर्धा के समीकरण बदल जाएंगे क्योंकि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला चीन से हट रही हैं। साथ ही भारत के लिए अमेरिका से अत्याधुनिक मेडिकल तकनीक आयात करना आसान और सस्ता हो जाएगा।

टैरिफ में कटौती से भारतीय मेडिकल उपकरण निर्यातकों के लिए लंबे समय से मार्जिन में कमी जैसी कमजोरी दूर होगी। भारत से अमेरिका जाने वाले निर्यात में मेडिकल डिस्पोजबल सामान जैसे सिरिंज, सुई, आईवी एडमिनिस्ट्रेशन सेट और बुनियादी एसेसरीज की बहुलता है। इन श्रेणियों में कीमत तय करने की गुंजाइश सीमित है और लागत में छोटा सा बदलाव भी निविदा के नतीजे तय कर सकता है। निर्यात आंकडों  से पता चलता है कि ये उत्पाद पहले से ही अमेरिका में भारत के मेडिकल उपकरण निर्यात का महत्त्वपूर्ण हिस्सा हैं, जो टैरिफ में बदलाव के प्रति इस सेगमेंट की संवेदनशीलता दर्शाते हैं।

राजीव नाथ, हिंदुस्तान सिरिंज ऐंड मेडिकल डिवाइसेस (एचएमडी) के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक (सीएमडी) है जो डिस्पोजेबल सिरिंज बनाने वाली प्रमुख कंपनी है और वह एसोसिएशन ऑफ इंडियन मेडिकल डिवाइस इंडस्ट्री (एआईएमईडी) के फोरम संयोजक भी हैं। उन्होंने टैरिफ में कटौती को एक निर्णायक मोड़ बताया। नाथ ने कहा कि इस कदम से भारत की स्थिति चीन के आपूर्तिकर्ताओं की तुलना में काफी बेहतर हो गई है, जो मेडिकल उपकरण पर धारा 301 के तहत लगने वाले ऊंचे शुल्क का सामना कर रहे हैं।

नाथ ने कहा, ‘भारतीय वस्तुओं पर टैरिफ में 18 प्रतिशत की कटौती से मेडिकल उपकरणों को चीन की तुलना में प्रतिस्पर्धा के स्तर पर बढ़त मिलेगी। पहले, भारत को बहुत अधिक शुल्क का सामना करना पड़ता था जबकि चीन को अपेक्षाकृत फायदा था। लेकिन नया करार निर्णायक रूप से चीन+1 के पक्ष में होने के कारण भारत के हक में संतुलनकारी है।’

नाथ के अनुसार, इस अंतर का असर पहले से ही खरीददारों की बातचीत, निवेश योजना और क्षमता उपयोग से जुड़े फैसलों पर पड़ रहा है। साथ ही यह अमेरिका की स्वास्थ्य सेवा प्रणाली के लिए भारत को एक विश्वसनीय दीर्घकालिक आपूर्तिकर्ता के रूप में स्थापित करने के मामले को भी मजबूत कर रहा है।

फिलहाल चीन से अमेरिका को होने वाले मेडिकल उपकरण निर्यात पर 30-34 प्रतिशत की दर से टैरिफ लगता है जबकि भारतीय निर्यात पर लगभग 18 प्रतिशत टैरिफ है। इस तरह दोनों में लगभग 12 प्रतिशत का अंतर है।

भारत ने वर्ष 2024-25 में अमेरिका को 6,384 करोड़ रुपये के मेडिकल उपकरणों का निर्यात किया जो वित्त वर्ष 2021 के 3,890 करोड़ रुपये की तुलना में लगातार बढ़ रहा है।

उद्योग के अधिकारियों का कहना है कि टैरिफ में कटौती से भारत को अपनी स्थिति मजबूत करने और अपने दायरे के विस्तार में मदद मिल सकती है, खासतौर पर तब जब वैश्विक खरीददार चीन से जोखिम कम करने की कोशिश कर रहे हैं।

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First Published - February 3, 2026 | 10:20 PM IST

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