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Pharma Sector: चौथी तिमाही में बनी रहेगी राजस्व की रफ्तार, पर मुनाफे पर मंडरा रहे संकट के बादल

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चौथी तिमाही में घरेलू मांग और लाइफस्टाइल दवाओं की अच्छी बिक्री के बावजूद, अमेरिकी बाजार की चुनौतियों और बढ़ती लागत से फार्मा कंपनियों के मुनाफे पर दबाव रह सकता है

Last Updated- April 21, 2026 | 10:28 PM IST
Pharma
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

देश की दवा और स्वास्थ्य सेवा कंपनियां वित्त वर्ष 26 की चौथी तिमाही में स्थिर राजस्व वृद्धि दर्ज करेंगी। हालांकि ब्रोकरेज कंपनियां अमेरिका का जेनेरिक चक्र कमजोर होने और बढ़ती लागतों के बीच मुनाफे पर दबाव की लगातार चेतावनी दे रही हैं। उम्मीद है कि दवा कंपनियां वित्त वर्ष 26 की चौथी तिमाही में सालाना आधार पर 8 से 10 प्रतिशत की मध्य से लेकर ऊंचे स्तर पर एक अंक की राजस्व वृद्धि दर्ज करेंगी, लेकिन मुनाफे पर दबाव में रहने की संभावना है।

मोतीलाल ओसवाल ने राजस्व वृद्धि सालाना आधार पर लगभग 9 प्रतिशत और एबिटा बढ़ोतरी लगभग 5.4 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है, जबकि नुवामा इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज़ और बीऐंडके के अनुमानों के अनुसार इसके क्रमशः लगभग 10 से 10.4 प्रतिशत और 7.9 प्रतिशत रहने की संभावना है। कमाई के मोर्चे पर अनुमानों में काफी अंतर है।

मोतीलाल और नुवामा कर के बाद लाभ (पीएटी) में सालाना आधार पर आधार पर मामूली से 6 प्रतिशत तक की गिरावट का संकेत दे रही हैं, जबकि बीऐंडके को अपने विश्लेषण वाली कंपनियों के लिए लगभग 9 प्रतिशत वृद्धि की उम्मीद है।

इस दबाव का मुख्य कारण अमेरिकी जेनेरिक बाजार का कमजोर प्रदर्शन है, विशेष रूप से कैंसर की दवा रेवलिमिड के जेनेरिक संस्करण की कीमतों में आई गिरावट का। इसके साथ ही अधिक मार्जिन वाली दवाओं में बढ़ती प्रतिस्पर्धा और मार्केटिंग तथा आरऐंडडी का बढ़ा हुआ खर्च भी इसके लिए जिम्मेदार है। इसमें भारत में सेमाग्लूटाइड दवा पेश करने से जुड़ी शुरुआती लागत भी शामिल हैं।

हालांकि रुपये के मूल्य में सालाना आधार पर लगभग 6 प्रतिशत की गिरावट से कुछ हद तक सहारा मिला है और घरेलू फॉर्मूलेशन, खास तौर पर पुरानी बीमारियों के इलाज वाले उपचार दमदार बने हुए हैं, लेकिन फिर भी ये कारक मार्जिन पर पड़ रहे दबाव को पूरी तरह से कम करने के लिए काफी नहीं हैं।

मोतीलाल ओसवाल के विश्लेषकों का अनुमान है कि घरेलू फॉर्मूलेशन की बिक्री में सालाना आधार पर 13 प्रतिशत की बढ़ोतरी होगी। इस वृद्धि को गंभीर बीमारियों के इलाज वाले उपचारों की बिक्री में सुधार और पुरानी बीमारियों वाली श्रेणी में बनी हुई रफ्तार से सहारा मिलेगा। चूंकि जेनेरिक सेमाग्लूटाइड को तिमाही के अंत में पेश किया गया था, इसलिए इसकी बिक्री में कोई ठोस बढ़त संभवतः अगली तिमाहियों में ही देखने को मिलेगी। दूसरी ओर निकट भविष्य में इस दवा के प्रदर्शन पर मार्केटिंग और प्रचार-प्रसार पर किए गए भारी खर्च का नकारात्मक असर पड़ सकता है।

इस पूरी तिमाही के दौरान घरेलू मांग का रुझान दमदार बना रहा। जनवरी-फरवरी 2026 के दौरान पुरानी बीमारियों के उपचार वाली श्रेणी में सालाना आधार पर 16.5 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जो वित्त वर्ष 26 की पहली छमाही में दर्ज 11.2 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर से खासी अधिक रही। यह इजाफा जीवनशैली से जुड़ी श्रेणी में लगातार मजबूती दर्शाता है। गंभीर उपचार वाली श्रेणी में भी तेजी आई है और पहली छमाही के 6.3 प्रतिशत की तुलना में सालाना आधार पर बढ़कर 9.5 प्रतिशत हो गई। यह मांग में लगातार सुधार का संकेत है।

नुवामा के विश्लेषकों का अनुमान है कि उनके विश्लेषण वाली कंपनियां घरेलू फॉर्मूलेशन की बिक्री में सालाना आधार पर लगभग 12 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज करेंगी। इसमें सन फार्मा, जाइडस लाइफसाइंसेज और अजंता फार्मा लगभग 15 प्रतिशत के इजाफे के साथ सबसे आगे रहेंगी। साथ ही टॉरंट फार्मास्युटिकल्स (जेबी केमिकल्स को छोड़कर) 15 प्रतिशत, डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज (डीआरएल) लगभग 14 प्रतिशत और इप्का लैबोरेटरीज लगभग 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज करेंगी। दूसरी ओर इस बात के आसार हैं कि ल्यूपिन लिमिटेड और एल्केम 8 से 10 प्रतिशत की अपेक्षाकृत नरम वृद्धि दर्ज करेंगी।

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First Published - April 21, 2026 | 10:04 PM IST

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