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अमेरिका में जेनेरिक कारोबार पटरी पर लाने की कोशिश में सन फार्मा

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नए उत्पाद, स्पेशलिटी दवाओं पर बढ़ा फोकस

Last Updated- February 03, 2026 | 9:28 AM IST
Indian Pharma’s New Growth Formula: Specialty Drugs Drive Profits from India to Africa

दवा कंपनी सन फार्मास्युटिकल इंडस्ट्रीज अमेरिका में जेनेरिक दवा विनिर्माण से जुड़े कायदों का बेहतर तरीके से पालन कर रही है और नए उत्पाद भी उतार रही है। इस तरह वह अमेरिका में अपने जेनेरिक दवा कारोबार को पटरी पर लाने की कोशिश कर रही है। साथ ही वह नवाचार के जरिये वृद्धि, चुनिंदा अधिग्रहण और निकट भविष्य के बड़े मौकों पर भी ध्यान बढ़ा रही है। भारत में जेनेरिक सेमाग्लूटाइड पेश करना ऐसा ही मौका है।

कंपनी के दिसंबर तिमाही के नतीजों की घोषणा के बाद सन फार्मा के प्रबंधन ने विश्लेषकों से कहा कि अमेरिकी जेनेरिक कारोबार पर दबाव बढ़ गया है और होड़ भी तेज हो गई है। लेकिन विनिर्माण और नियामक से जुड़ी दिक्कतें कम होने के बाद स्थिति बेहतर होने के आसार हैं। कंपनी के उत्तरी अमेरिका के मुख्य कार्याधिकारी (सीईओ) रिचर्ड एसक्रॉफ्ट ने कहा,‘नए उत्पाद पेश करने के लिए जब हम अपने कई संयंत्रों में विनिर्माण से जुड़े सभी कायदों का पालन शुरू कर देंगे तो जेनेरिक कारोबार पटरी पर आने लगेगा।’

अमेरिका में कंपनी की कमजोर जेनेरिक बिक्री की भरपाई नई दवाओं से हो गई। इससे साफ हो गया कि सन फार्मा अब स्पेशलिटी और नई चिकित्सा पद्धतियों पर ज्यादा ध्यान दे रही है। वित्त वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही में ब्रिटेन में दवाओं की बिक्री 47.7 करोड़ डॉलर रही, जो केवल 0.6 फीसदी अधिक है। जेनेरिक दवा कारोबार में गिरावट के कारण ही इजाफा इतना मामूली रहा। कंपनी की कुल बिक्री में लगभग 27.5 फीसदी हिस्सेदारी अमेरिका की ही रही।
प्रबंधन ने दोहराया कि नवाचार के जरिये होने वाली वृद्धि के लिहाज से अमेरिका उसका प्रमुख बाजार बना हुआ है। कंपनी के एक्जिक्यूटिव चेयरमैन दिलीप सांघवी ने कहा,‘अमेरिका पर हमारा ध्यान बना हुआ है, खासकर नई दवाओं के मामले में।’ उन्होंने कहा कि कंपनी नई दवाओं का अपना पोर्टफोलियो दुनिया भर में पहुंचाने पर भी उतना ही ध्यान दे रही है।

सन फार्मा फिलहाल अमेरिका में दो स्पेशलिटी दवाएं उतारने के लिए कमर कस रहा है। इनमें एक दवा अनलॉक्साइट है, जो एडवांस्ड क्यूटेनियस स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा (त्वचा कैंसर) के लिए इम्यूनोथेरेपी में इस्तेमाल की जाती है। दूसरी दवा लेक्सेल्वी है, जो सीवियर एलोपेसिया एरियाटा (खास तरह का गंजापन) के इलाज में काम आती है। कंपनी के मुताबिक चिकित्सकों और बाजार ने इस पर अच्छी प्रतिक्रिया दी है। अनलॉक्साइट की बात करते हुए एसक्रॉफ्ट ने कहा, ‘हमारी शुरुआती बातचीत अच्छी रही है। हमने दवा का शुरुआती भंडार तैयार कर लिया है और वितरकों से हमें पहला ऑर्डर भी मिल चुका है।’ उन्होंने कहा कि प्रमुख हेल्थ सिस्टम और कैंसर सेंटरों के साथ बातचीत अच्छी तरह से आगे बढ़ी है।

लेक्सेल्वी पर एसक्रॉफ्ट ने कहा कि डॉक्टरों को रोगियों में बाल दोबारा उगने के शुरुआती संकेत मिले हैं, जिनमें कुछ ऐसे मरीज भी शामिल हैं, जिन पर इस तरह की दूसरी दवाएं असर नहीं कर पाई थीं। उन्होंने कहा कि दवा के क्लिनिकल ट्रायल में भी ऐसा ही नजर आया था।

अमेरिका के अलावा सन फार्मा की मध्यम अवधि की नवाचार रणनीति को उन दवाओं की बढ़ती तादाद से दम मिल रहा है, जिनका फिलहाल क्लिनिकल ट्रायल चल रहा है। कंपनी ने हाल ही में टाइप 2 डायबिटीज के इलाज के लिए जीएल0034 के ट्रायल का दूसरा चरण दुनिया भर में शुरू कर दिया है। अगले कुछ महीनों में वैज्ञानिक सम्मेलनों में डायबिटीज और नैश के दूसरे चरण के ट्रायल से जुड़े आंकड़े पेश करने का उसका इरादा है। सांघवी ने कहा,‘वैश्विक जेनेरिक और इनोवेटिव दवा कारोबार के लिए अनुसंधान एवं विकास के लिए हमारा निवेश जारी है।’

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First Published - February 3, 2026 | 9:27 AM IST

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