यूरिया इकाइयों को एलएनजी की आपूर्ति 75 से 80% तक बढ़ गई है। पिछले छह महीनों में इसकी आपूर्ति कुल औसत खपत का लगभग 60% तक गिर गई थी। केंद्र सरकार ने सोमवार को दावा किया कि स्पॉट बाजारों में वैकल्पिक व्यवस्था कर एलएनजी आपूर्ति को संभाला गया है। इन प्रयासों से मासिक उत्पादन हानि 6 से 7 लाख टन तक कम हो गई है, जबकि पहले 9 से 10 लाख टन नुकसान का अनुमान लगाया गया था।
सरकार का कहना है कि मौजूदा मार्च माह में लगभग 18 लाख टन यूरिया का उत्पादन किया गया, जो पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में लगभग 27% कम था। इसके अलावा 9 से 10 लाख टन पी और के उर्वरकों का उत्पादन किया गया। यह भी पिछले वर्ष मार्च की तुलना में 16 से 24% तक कम रहा।
उर्वरक विभाग में अपर सचिव अपर्णा शर्मा ने सोमवार को संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में कहा कि गैस की उपलब्धता बढ़ने के कारण देश में दैनिक यूरिया उत्पादन अब लगभग 12,000 से 15,000 टन हो गया है। सरकार ने इस वर्ष के खरीफ सीजन में लगभग 3.9 करोड़ टन की कुल उर्वरक आवश्यकता का अनुमान लगाया है, जबकि पिछले सीजन में 3.61 करोड़ टन की वास्तविक बिक्री हुई थी। इस तरह इसमें कुल 8% की वृद्धि हुई है।
इसके मुकाबले शर्मा ने कहा कि मार्च के अंत तक देश में कुल उर्वरक भंडार लगभग 1.8 करोड़ टन था, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 22.44% अधिक 1.47 करोड़ टन था। सरकार ने फरवरी के मध्य में 13 लाख टन यूरिया के लिए वैश्विक निविदा जारी की थी, जिसमें से 90% देश में पहले ही आ चुका है। इसके अलावा, सरकार ने केप ऑफ गुड होप मार्ग के माध्यम से रूस से 28 लाख टन यूरिया के लिए व्यवस्था कर ली है।
सऊदी अरब से भी प्रति वर्ष 31.1 लाख टन डीएपी की दीर्घकालिक आपूर्ति व्यवस्था पहले ही की जा चुकी है। अतिरिक्त ओआईएमएफसी (ओमान) से प्रति वर्ष 10 लाख टन और एसएबीआईसी (सऊदी अरब) से 7 लाख टन यूरिया की आपूर्ति भी होगी। यह शिपमेंट इस वर्ष अक्टूबर तक आने की उम्मीद है।
शर्मा ने कहा, ‘सरकार ने रूस, मोरक्को, ऑस्ट्रेलिया, इंडोनेशिया, मलेशिया, जॉर्डन, कनाडा, अल्जीरिया, मिस्र, फिनलैंड और टोगो सहित कई देशों से उर्वरक खरीद सुनिश्चित कर आपूर्ति में विविधता पर जोर दिया है। विदेशों में 16 भारतीय मिशन वैकल्पिक आपूर्ति स्रोतों की पहचान करने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं।’
शर्मा ने यह भी कहा कि भारत अपनी कुल आवश्यकता का 20-30% यूरिया और 30% डीएपी खाड़ी क्षेत्र से आयात करता है। कुल आयात का लगभग 50% एलएनजी भी यहीं से आता है। यह यूरिया उत्पादन के लिए एक प्रमुख फीडस्टॉक है।