इन्फोसिस के हालिया इतिहास में वर्ष 2027 एक अहम साल साबित हो सकता है। अगले साल 31 मार्च को कंपनी के मुख्य कार्याधिकारी (सीईओ) सलिल पारिख का दूसरा कार्यकाल समाप्त होना है। इसके साथ ही स्थिरता और पुनर्निर्माण का वह दौर भी खत्म होगा जिसने भारत की दूसरी सबसे बड़ी सूचना प्रौद्योगिकी कंपनी को उसके सबसे कठिन दौर में से एक से निकाला था। इसी दौरान गैर-कार्यकारी चेयरमैन नंदन निलेकणि की कंपनी में वापसी के 10 साल भी पूरे होंगे। अब कंपनी के बोर्ड के सामने सबसे बड़ा सवाल है कि तेजी से बदलते आर्टिफिशल इंटेलिजेंस (एआई) के दौर में कंपनी का नेतृत्व कौन करेगा।
मामले से जुड़े कई सूत्रों के अनुसार इसका जवाब फिर से सलिल पारिख ही हो सकते हैं। लेकिन इस बार उनका तीसरा कार्यकाल छोटा (1-2 साल) हो सकता है। उद्योग सूत्रों के मुताबिक एक संभावना यह भी है कि पारिख को चेयरमैन बनाया जाए और नए सीईओ की घोषणा की जाए। इस पर औपचारिक घोषणा जून में कंपनी की सालाना आम बैठक में हो सकती है।
इन्फोसिस की सेवानिवृत्ति नीति के अनुसार किसी कार्यकारी निदेशक या प्रबंध निदेशक की सेवानिवृत्ति की उम्र 60 वर्ष होती है। हालांकि पारिख यह उम्र पिछले साल ही पार कर चुके हैं और उनका मौजूदा अनुबंध खत्म होने तक उनकी उम्र लगभग 62 वर्ष हो जाएगी। हालांकि कंपनी की नामांकन और वेतन समिति (एनआरसी) शेयरधारकों की मंजूरी से कार्यकाल बढ़ा सकती है। इसके लिए विशेष प्रस्ताव लाना होता है जिसमें 75 फीसदी वोट समर्थन में होना जरूरी है। एचएफएस रिसर्च के सीईओ और संस्थापक फिल फर्स्ट ने कहा, ‘तीसरा कार्यकाल देने का नकारात्मक पहलू यह हो सकता है कि इससे यह संदेश जाए कि इन्फोसिस बड़े बदलाव खास तौर पर एआई आधारित सेवाओं के बजाय स्थिर संचालन को प्राथमिकता दे रही है। ऐसे में कुछ निवेशक यह सवाल उठा सकते हैं कि क्या कंपनी एआई के दौर में खुद को तेजी से बदल पा रही है।’ हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि इसका सकारात्मक पक्ष निरंतरता है। उनके मुताबिक पारिख के पास ग्राहकों का गहरा भरोसा, निवेशकों से मजबूत संबंध और अनुशासित तरीके से कंपनी चलाने का अनुभव है। तकनीक के क्षेत्र में बने अनिश्चितता वाले माहौल में कंपनियों के बोर्ड अक्सर बदलाव की बजाय स्थिरता को प्राथमिकता देते हैं। पारिख के भविष्य को लेकर इन्फोसिस को भेजे गए सवालों पर कोई जवाब नहीं मिला। फर्म पर नजर रखने वाले एक वरिष्ठ विश्लेषक ने कहा, ‘यदि कंपनी उनका कार्यकाल नहीं बढ़ाती है तो एक विकल्प यह होगा कि वह अपने किसी कारोबार के प्रमुख को शीर्ष भूमिका में पदोन्नत करे।’ कार्यकारी की तलाश करने वाली एक फर्म के प्रमुख ने कहा कि सीईओ को तीसरा कार्यकाल मिलना असामान्य है क्योंकि यह निवेशकों और विश्लेषकों को संकेत दे सकता है कि कंपनी ने भविष्य के नेताओं की एक मजबूत बेंच तैयार नहीं की है।
पारिख का ट्रैक रिकॉर्ड ऐसा है जिस पर विवाद करना मुश्किल है। उन्होंने जनवरी 2018 में इन्फोसिस की कमान संभाली थी जो महत्त्वपूर्ण क्षण था। सह-संस्थापक एनआर नारायण मूर्ति और तत्कालीन सीईओ विशाल सिक्का के बीच कड़वे सार्वजनिक विवाद ने कंपनी को हिला दिया था और कॉरपोरेट प्रशासन के लिए अपनी मेहनत से अर्जित प्रतिष्ठा को धूमिल कर दिया था। इसके बाद अनुशासित वृद्धि की अवधि रही। पारिख के नेतृत्व में इन्फोसिस की आय दोगुनी होकर 31 मार्च, 2025 तक 1.62 लाख करोड़ रुपये हो गई जो 2017-18 में 70,522 करोड़ रुपये थी। इसी अवधि में शुद्ध लाभ 16,029 करोड़ रुपये से बढ़कर 26,713 करोड़ रुपये हो गया। पारिख के कमान संभालने के बाद से इन्फोसिस ने 12-13 कंपनियों का अधिग्रहण किया है, जिनमें से अधिकांश छोटी, रणनीतिक अधिग्रहण थे।
2023-24 तक पारिख ने फर्म की एआई-प्रथम रणनीति की घोषणा कर दी थी। उन्होंने हाल ही में दो आयामी दृष्टिकोण की रूपरेखा तैयार की। उन्होंने पहली बार यह भी खुलासा किया कि 2025-26 की तीसरी तिमाही में एआई-संबंधित राजस्व कुल आय का 5.5 फीसदी था। उन्होंने कहा कि एआई सेवाओं से अगले कुछ वर्षों में 300 अरब डॉलर का अवसर मिलेगा, जिसमें पुराने सिस्टम का आधुनिकीकरण के साथ-साथ एआई इंजीनियरिंग पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। इन्फोसिस ने दूरसंचार, वित्तीय सेवाओं, विनिर्माण और सॉफ्टवेयर विकास सहित विभिन्न क्षेत्रों में उद्यम एआई समाधान विकसित करने और वितरित करने के लिए एंथ्रोपिक के साथ साझेदारी भी की है।