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टाटा संस को लिस्ट करने की मांग फिर तेज, इनगवर्न ने कहा: बेहतर पूंजी आवंटन के लिए लिस्टिंग जरूरी

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सलाहकार फर्म इनगवर्न ने टाटा समूह की कंपनियों पर व्यापक प्रभाव और पारदर्शिता की जरूरत का हवाला देते हुए टाटा संस को सार्वजनिक रूप से सूचीबद्ध करने की मांग दोहराई है

Last Updated- May 24, 2026 | 10:39 PM IST
Tata Group
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

कॉरपोरेट गवर्नेंस सलाहकार फर्म इनगवर्न ने टाटा संस से सार्वजनिक सूचीबद्धता की अपनी मांग फिर से दोहराई है। फर्म का तर्क है कि होल्डिंग कंपनी का विशाल आकार और सूचीबद्ध समूह कंपनियों पर उसका प्रभाव होने से ज्यादा पारदर्शिता और खुलासा मानकों की जरूरत बढ़ जाती है। टाटा संस : द लिस्टिंग इम्परेटिव’ शीर्षक वाली रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रमुख निवेश कंपनी के तौर पर अपना पंजीकरण रद्द करवाने के कंपनी के आवेदन को सिर्फ एक तकनीकी अनुपालन का मामला नहीं माना जाना चाहिए बल्कि भारत की कुछ सबसे बड़ी सूचीबद्ध कंपनियों पर इसके नियंत्रण को देखते हुए इसे गवर्नेंस से जुड़ी व्यापक चिंता के तौर पर देखा जाना चाहिए।

इनगवर्न ने कहा, टाटा संस की पूरे सिस्टम में अहम जगह है। लेकिन इसका मौजूदा प्राइवेट ढांचा, पूंजी के आवंटन, समूह के भीतर आपस में मदद और मूल कंपनी व उसकी सूचीबद्ध सहायक कंपनियों के बीच के आर्थिक रिश्तों को समझने में रुकावट होता है। रिपोर्ट में बताया गया कि भारतीय रिजर्व बैंक अभी भी टाटा संस को अपर-लेयर एनबीएफसी के दायरे में ही मानता है। इससे संकेत मिलता है कि नियामक इसे इतना अहम मानता है कि इस पर ज्यादा निगरानी रखने की जरूरत है। रिपोर्ट में कहा गया है, अगर नियामकीय नजरिये से टाटा संस पूरे सिस्टम के लिए अहम है तो इस बात के लिए एक मज़बूत तर्क है कि गवर्नेंस के मामले में भी उसे पूरे सिस्टम के लिए पारदर्शी होना चाहिए।

इस नोट में टाटा ट्रस्ट के भीतर अलग-अलग राय राय से जुड़ी हालिया रिपोर्टों का भी जिक्र किया गया है। नोट में कहा गया है कि सूचीबद्धता के सवाल पर टाटा ट्रस्ट के भीतर अलग-अलग विचारों का सामने आना उसके बाजार -उन्मुख ढांचे की जरूरत को और मजबूत करता है। इस नोट में टाटा समूह की सूचीबद्ध कंपनियों के बड़े आकार का भी जिक्र किया गया है। इनमें टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, टाटा मोटर्स, टाटा स्टील, टाइटन कंपनी, इंडियन होटल्स कंपनी और टाटा पावर जैसी प्रमुख हिस्सेदारियों का हवाला दिया गया है, जिनका कुल मूल्य 25 ट्रिलियन रुपये से भी ज्यादा है।

रिपोर्ट में इस चिंता पर भी बात जताई गई है कि अगर टाटा संस सूचीबद्ध होती है, उसे संभावित होल्डिंग कंपनी डिस्काउंट का सामना करना पड़ सकता है। उसने तर्क दिया है कि हालांकि सूचीबद्ध होल्डिंग कंपनियां अक्सर अपने अंदरूनी निवेशों की नेट एसेट वैल्यू से कम कीमत पर ट्रेड करती हैं, लेकिन यह डिस्काउंट सार्वजनिक बाजार से दूर रहने का कोई पर्याप्त कारण नहीं है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इसके बजाय यह मुद्दा गवर्नेंस की गुणवत्ता, पूंजी आवंटन में अनुशासन और प्रवंधन पर निवेशकों के भरोसे को दर्शाता है।

इनगवर्न के अनुसार ज्यादा खुलासे के मानक, पारदर्शी लाभांश नीति और ज्यादा स्पष्ट पूंजी आवंटन ढांचा समय के साथ किसी भी वैल्यूएशन डिस्काउंट को कम करने में मदद कर सकते हैं। उसने कहा कि मौजूदा निजी ढांचा ही टाटा संस की होल्डिंग्स के असली मूल्य को छिपा सकता है और बाजार-आधारित मूल्य निर्धारण को सीमित करता है।

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First Published - May 24, 2026 | 10:39 PM IST

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