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किरण मजूमदार-शॉ की SEBI से अपील: बायोटेक स्टार्टअप्स के लिए बदलें IPO से जुड़े कड़े नियम

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उन्होंने कहा कि हमारे पास सूचीबद्धता के ऐसे नियम नहीं हैं, जो कंपनियों को राजस्व से पहले या क्लीनिकल से पहले की कंपनियों के रूप में सूचीबद्ध होने की अनुमति दें

Last Updated- April 07, 2026 | 10:02 PM IST
Kiran Mazumdar
बायोकॉन की अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक किरण मजूमदार-शॉ | फाइल फोटो

किरण मजूमदार-शॉ ने देश के आईपीओ ढांचे पर फिर से विचार करने की मांग की है। उनका तर्क है कि सूचीबद्धता के मौजूदा नियम बायोटेक्नॉलजीज नवाचार की वास्तविकताओं के लिए अनुपयुक्त हैं। उन्होंने बताया कि बायोटेक फर्मों को राजस्व कमाने से पहले आम तौर पर एक दशक या उससे भी अधिक का समय अनुसंधान और क्लीनिकल परीक्षणों में लगाना पड़ता है। इससे उनके लिए देश की राजस्व ट्रैक रिकॉर्ड की स्थापित आवश्यकता को पूरा करना मुश्किल हो जाता है। उन्होंने कहा, ‘हमारे पास सूचीबद्धता के ऐसे नियम नहीं हैं, जो कंपनियों को राजस्व से पहले या क्लीनिकल से पहले की कंपनियों के रूप में सूचीबद्ध होने की अनुमति दें।’

इसे वैश्विक बाजारों के विपरीत बताते हुए उन्होंने कहा, ‘अमेरिका में आप यह सब कर सकते हैं। भारत में सेबी को तीन साल के राजस्व ट्रैक रिकॉर्ड की आवश्यकता होती है। क्लीनिकल चरण वाली बायोटेक इसे कैसे पूरा कर सकती है?’ उनके अनुसार नियमन और बायोटेक नवाचार की प्रकृति के बीच इस विरोधाभास गंभीर नतीजे होते हैं। यह पूंजी तक पहुंच रोकता है, उद्यम की वित्तीय सहायता के पारिस्थितिकी तंत्र को कमजोर करता है और भारत में वैज्ञानिक प्रतिभा को जोड़े रखना कठिन बना देता है।

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First Published - April 7, 2026 | 9:53 PM IST

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