एलऐंडटी टेक्नॉलजीज सर्विसेज (एलटीटीएस) अगले तीन साल के दौरान आर्टिफिशल इंटेलिजेंस (एआई) और जेनएआई क्षेत्र में पेटेंट की संख्या दोगुने से भी ज्यादा करना चाहती है। ऐसा करके वह अपने ग्राहकों को इस तकनीक में अपनी क्षमताओं को दिखाना चाह रही है। वह केवल इस पर निर्भर नही रहना चाहती कि इस क्षेत्र में कितने कर्मचारियों को किस हद तक प्रशिक्षण दिया गया है। कंपनी के मुख्य प्रौद्योगिकी अधिकारी (सीटीओ) ने यह जानकारी दी है।
कंपनी की नवीनतम वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार पिछले साल तक उसके पास 1,706 पेटेंट आवेदनों का पोर्टफोलियो था। इसमें से अकेले एआई और जेनएआई में 237 पेटेंट शामिल हैं। कंपनी के दुनिया भर में 22 ग्लोबल डिजाइन सेंटर और 98 इनोवेशन लैब हैं।
सीटीओ आशिष खुशु ने पिछले सप्ताह मैसूरु में बिज़नेस स्टैंडर्ड के साथ बातचीत में कहा, ‘हमारा लक्ष्य अगले 3 साल में 500 पेटेंट तक पहुंचना है। यह प्रमुख पैमाने में से एक रहना चाहिए।’ उन्होंने कहा, ‘आधुनिक समय के किसी राक्षस या दैत्य से लड़ने की कोशिश के लिए हम पुराने जमाने की भाषा में बात नहीं कर सकते। यह निदेशक मंडल से मेरा वादा है। वहां तक पहुंचने के लिए मुझे सब कुछ सही करना होगा। आप केवल यह कहकर ग्राहकों के सामने एआई की तैयारी की लड़ाई नहीं लड़ सकते कि मैंने अपने कर्मचारियों को प्रशिक्षित कर दिया है।’
उनके अनुसार पेटेंट आवेदन करने का मतलब है कि कंपनी ने किसी कौशल विकास वाले दृष्टिकोण से प्रशिक्षण में निवेश किया है। उन्होंने यह भी कहा ‘इसका मतलब है कि आपके पास ऐसे लोगों का समूह है जिन्होंने वास्तव में काम किया है। किसी एक पेटेंट का आवेदन करने के लिए कम से कम 20 से 30 अन्य लोग उस पर काम कर रहे होंगे। यह हमारे इंजीनियरों पर वर्षों से किए गए निवेश का परिणाम है।’ उनकी टीम में लगभग 150 लोग हैं।
पांच साल की रणनीति के तहत एलटीटीएस सॉफ्टवेयर-डिफाइंड व्हीकल्स (एसडीवी), संयंत्र इंजीनियरिंग, चिकित्सा तकनीक, ऊर्जा स्वचालन और औद्योगिक स्वचालन पर ध्यान केंद्रित करेगी। इसके अलावा वह डेटा सेंटर निर्माण पर भी ध्यान केंद्रित करेगी। इसमें कंप्यूट, स्टोरेज, सेमीकंडक्टर, हार्डवेयर डिजाइन और डेटा इंजीनियरिंग शामिल हैं।