facebookmetapixel
Advertisement
M&M का EV प्लान! सिर्फ नई कार नहीं, पूरी फैक्ट्री बदल रही कंपनीराज्य की प्रतिक्रिया और अभिव्यक्ति की सीमाएं testtestभारत का डिफेंस प्रोडक्शन ऑल-टाइम हाई पर, FY26 में15.6% बढ़कर ₹1.78 लाख करोड़ पर पहुंचाHCL Tech के नतीजों की तारीख तय, 13 जुलाई को आएगा रिपोर्ट कार्ड; डिविडेंड पर भी होगा फैसलारिटर्न कहीं और, निवेश कहीं और! क्या सही फंड चुन रहे हैं निवेशक? एक्सपर्ट से समझेंAI के दम पर नई छलांग की तैयारी में Coforge? शेयर में 50% तक तेजी की उम्मीद, एक्सपर्ट्स बुलिशकच्चा तेल सस्ता हो रहा है, फिर पेट्रोल-डीजल क्यों नहीं?20 लाख रुपये से ज्यादा पैकेज वाली नौकरियों में उछाल, ब्रोकरेज ने बताए 4 पसंदीदा IT स्टॉक्सJio IPO का इंतजार खत्म! ₹4 अरब के मेगा IPO की तैयारी तेज, जल्द दाखिल होंगे ड्राफ्ट पेपरसरकार के आदेश के खिलाफ Telegram का पलटवार, Delhi HC पहुंची याचिका

NCLAT ने पार्श्वनाथ लैंडमार्क डेवलपर्स के खिलाफ दिवालिया याचिका खारिज की

Advertisement

NCLAT के आदेशों को बरकरार रखा, जिसने 17 अक्टूबर 2023 को तकनीकी आधार पर उनकी याचिका खारिज कर दी थी क्योंकि याचिकाकर्ताओं की संख्या केवल चार थी।

Last Updated- April 11, 2024 | 1:27 PM IST
NCLAT
Representative Image

राष्ट्रीय कंपनी विधि अपील अधिकरण (NCLAT) ने पार्श्वनाथ लैंडमार्क डेवलपर्स की अनुषंगी कंपनी के खिलाफ दिवालिया कार्यवाही शुरू करने के लिए पार्श्वनाथ लैंडमार्क डेवलपर्स के चार इकाई खरीदारों द्वारा दायर याचिका को खारिज कर दिया है।

अपीलीय न्यायाधिकरण ने राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) की प्रधान पीठ के आदेशों को बरकरार रखा, जिसने 17 अक्टूबर 2023 को तकनीकी आधार पर उनकी याचिका खारिज कर दी थी क्योंकि याचिकाकर्ताओं की संख्या केवल चार थी, जबकि पार्श्वनाथ लैंडमार्क द्वारा आवंटितों की कुल संख्या 488 है। मामला रियल एस्टेट कंपनी के दिल्ली स्थित प्रोजेक्ट ला ट्रॉपिकाना खैबर पास से जुड़ा है।

इसके अलावा, अपीलीय न्यायाधिकरण ने फ्लैट खरीदारों की इस दलील को भी खारिज कर दिया कि वे एक अलग वर्ग के हैं और दिल्ली रेरा के एक आदेश में डेवलपर को 22 अक्टूबर 2022 को ब्याज के साथ राशि वापस करने का निर्देश दिया गया था। डेवलपर पर आदेश के 45 दिन के भीतर राशि वापस करने का दायित्व था, लेकिन किसी राशि का भुगतान नहीं किया गया। इस प्रकार उसने प्रत्येक याचिकाकर्ता को 10 प्रतिशत ब्याज के साथ 24.14 करोड़ रुपये वापस नहीं करके चूक की थी।

उनके अनुसार वे रियल एस्टेट आवंटियों की श्रेणी में वित्तीय ऋणदाता नहीं हैं, लेकिन डिक्री धारकों की श्रेणी में वित्तीय ऋणदाता हैं। हालांकि, एनसीएलएटी ने उच्चतम न्यायालय के उस फैसले का हवाला देते हुए दलीलों को खारिज कर दिया, जिसमें शीर्ष अदालत ने कहा था कि ‘‘वित्तीय ऋणदाता’’ के रूप में आवंटियों की स्थिति नहीं बदलती है।

Advertisement
First Published - April 11, 2024 | 1:27 PM IST (बिजनेस स्टैंडर्ड के स्टाफ ने इस रिपोर्ट की हेडलाइन और फोटो ही बदली है, बाकी खबर एक साझा समाचार स्रोत से बिना किसी बदलाव के प्रकाशित हुई है।)

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement