पीरामल फार्मा लगातार बढ़ते प्रतिस्पर्धी जेनेरिक जीएलपी-1 पेप्टाइड विनिर्माण बाजार से दूरी बना रही है। मोटापे की दवाओं की वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में होड़ के बावजूद वह ऐसा कर रही है। इसके बजाय वह खास और अधिक मार्जिन वाले पेप्टाइड अवसरों पर ध्यान केंद्रित कर रही है। इसी वजह यह है कि वह अनुबंध पर विकास और विनिर्माण (सीडीएमओ) कारोबार में सुधार की तैयारी कर रही है।
चेयरपर्सन नंदिनी पीरामल ने बिजनेस स्टैंडर्ड को बताया, ‘हम जीएलपी-1 पर ध्यान केंद्रित नहीं कर रहे हैं। हम ऐसे खास पेप्टाइड्स पर विचार कर रहे हैं जिनका अपना बाजार है।’ कंपनी सेमाग्लूटाइड और टिर्जेपेटाइड जैसी मोटापा कम करने वाली कामयाब दवाओं से जुड़े बड़े स्तर पर कमोडिटी विनिर्माण के बजाय खास तरह के, विज्ञान आधारित पेप्टाइड अवसरों पर दे रही है। उन्होंने कहा, ‘हम बड़े स्तर पर कमोडिटी के अवसरों पर काम नहीं करते हैं। हम और ज्यादा खास, विज्ञान आधारित पेप्टाइड्स पर ध्यान दे रहे हैं।’
यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है, जब कई वैश्विक और भारतीय सीडीएमओ कंपनियां मोटापे और मधुमेह की दवाओं की बढ़ती मांग के बीच पेप्टाइड विनिर्माण क्षमता में भारी भरकम निवेश कर रही हैं। उद्योग पर नजर रखने वाले इस बारे में लगातार चिंता जता चुके हैं कि जब वर्तमान विस्तार परियोजनाओं का काम पूरा हो जाएगा, तो क्या इस क्षेत्र में अतिरिक्त क्षमता हो सकती है।
पीरामल ने कहा कि वह जान-बूझकर ऐसी अत्यधिक प्रतिस्पर्धी श्रेणियों से बच रहे हैं, जहां मार्जिन पर दबाव आ सकता हो। पीरामल ने कहा, ‘हमें बहुत ज्यादा प्रतिस्पर्धी वाली जगह पसंद नहीं हैं क्योंकि जब जीएलपी-1 के 30 या 50 ब्रांड हों, तो कोई मार्जिन नहीं बचेगा। यह काफी मुश्किल काम होगा।’
कंपनी की पेप्टाइड इकाइयां अपेक्षाकृत छोटी हैं और बड़े स्तर पर जीएलपी-1 विनिर्माण के बजाय खास अवसरों के लिए हैं। यह रणनीति ऐसे समय में बनाई जा रही है जब पीरामल वित्त वर्ष 26 की कठिनाइयों के बाद अपने सीडीएमओ कारोबार में वृद्धि फिर से बहाल करने की कोशिश कर रही है। इस श्रेणी में वित्त वर्ष 26 के दौरान 4,915 करोड़ रुपये का राजस्व दर्ज किया गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 10 प्रतिशत कम रहा। इसे एक बड़ी ऑन-पेटेंट वाणिज्यिक दवा में स्टॉक कम किए जाने और पहली छमाही के दौरान शुरुआती चरण के ऑर्डर में धीमी रफ्तार से झटका लगा।
अलबत्ता पीरामल ने इस बात का संकेत दिया कि प्रदर्शन पर भारी पड़ने वाले स्टॉक घटाने का चक्र अब खत्म हो गया है। उन्होंने ‘हम उससे आगे निकल चुके हैं। यह पूरा हो चुका है। कंपनी 13 से लेकर 15 से 17 प्रतिशत राजस्व वृद्धि का लक्ष्य कर रही है। उसे उम्मीद है कि वित्त वर्ष 27 में वृद्धि बड़ी ऑन-पेटेंट वाली दवा की बिक्री के बजाए नए ग्राहक जोड़ने से आएगी। उन्होंने गंवाए हुए कारोबार का जिक्र करते हुए कहा, ‘इस समय हम इसे शामिल नहीं कर रहे हैं।’
इसके बजाय कंपनी जोरदार ऑर्डर, बायोटेक क्षेत्र में बेहतर फंडिंग तथा विशिष्ट विनिर्माण सेवाओं की बढ़ती मांग पर दांव लगा रही है। पीरामल के सीडीएमओ कारोबार का लगभग 40 प्रतिशत राजस्व विशिष्ट पेशकशों से आता है। इनमें एंटीबॉडी-ड्रग कंजुगेट्स (एडीसी), हाई-पोटेंसी ऐक्टिव फार्मा स्युटिकल इंग्रेडिएंट्स (एचपीएपीआई), स्टराइल इंजेक्टेबल्स, पेप्टाइड्स और ऑन-पेटेंट विनिर्माण सेवाएं शामिल हैं।