भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने पेटीएम पेमेंट्स बैंक को जारी किया गया बैंकिंग लाइसेंस आज रद्द कर दिया है। नियामक का तर्क था कि पेटीएम के संस्थापक विजय शेखर शर्मा और वन97 कम्युनिकेशंस के स्वामित्व वाली इस इकाई का आचरण जमाकर्ताओं के हितों के लिए हानिकारक था।
यह कार्रवाई बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 22(4) के तहत की गई है, जो 24 अप्रैल, 2026 को कारोबार बंद होने के समय से प्रभावी होगी। इसके परिणामस्वरूप पेटीएम पेमेंट्स बैंक (पेटीएम पीबी) को कानून के तहत ‘बैंकिंग’ का कारोबार करने से प्रतिबंधित कर दिया गया है। आरबीआई पेटीएम पेमेंट्स बैंक को बंद करने के संबंध में उच्च न्यायालय के समक्ष एक आवेदन प्रस्तुत करेगा।
हाल के समय में अपनी तरह का यह पहला फैसला आया है। इससे पहले साल 2022 में आरबीआई ने पेटीएम पेमेंट्स बैंक को नए ग्राहक जोड़ने से मना कर दिया था और दो साल पहले यानी 2024 से जमा या उधारी लेनदेन से भी रोक दिया गया था। आरबीआई ने कहा, ‘बैंक के कामकाज को ऐसे तरीके से चलाया जा रहा था जो बैंक और उसके जमाकर्ताओं के हितों के लिए नुकसानदायक था।’ नियामक ने कहा कि बैंक के प्रबंधन का सामान्य स्वरूप जमाकर्ताओं के हितों के साथ-साथ जनहित के लिए भी नुकसानदायक है।
सूत्रों के अनुसार बैंकिंग नियामक को किसी न किसी तरह का फैसला लेना ही था। बैंक को न तो नए ग्राहक जोड़ने की अनुमति थी और न ही जमा या ऋण से जुड़े लेन-देन करने की। ऐसी परिस्थितियों में लाइसेंस रद्द करना ही एकमात्र विकल्प था।
पेटीएम ने कहा कि पेमेंट्स बैंक लाइसेंस रद्द होने का कंपनी पर कोई वित्तीय असर नहीं पड़ा है। कंपनी ने एक बयान में कहा, ‘जैसा कि पहले 1 मार्च, 2024 को बताया गया था, कंपनी का पेटीएम पीबी में कोई निवेश नहीं है और न ही इसके साथ कोई बड़ा कारोबारी समझौता है। कंपनी द्वारा दी जाने वाली कोई भी सेवा पेटीएम पीबी के साथ साझेदारी में नहीं है।’ कंपनी ने कहा कि पेटीएम पीबी स्वतंत्र रूप से काम करता है और इसमें कंपनी के बोर्ड या प्रबंधन का कोई दखल नहीं है।
नियामक ने स्पष्ट किया कि पेटीएम पेमेंट्स बैंक के पास इतनी लिक्विडिटी है कि बैंक के बंद होने पर वह अपनी पूरी जमा देनदारी चुका सके। 31 मार्च, 2025 तक बैंक के पास वॉलेट, चालू और बचत खातों में ग्राहकों की कुल जमा राशि 1,395.22 करोड़ रुपये थी और कुल गिफ्ट साधन 33.13 करोड़ रुपये के हैं। फरवरी 2024 में वन97 कम्युनिकेशंस ने पेटीएम पीबी बोर्ड से अपने नामित को हटा लिया और विजय शेखर शर्मा ने अंशकालिक गैर-कार्यकारी चेयरमैन और बोर्ड सदस्य के पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद अनुभवी बैंकर एस श्रीधर को गैर-कार्यकारी चेयरमैन नियुक्त किया गया था।
2015 में आरबीआई ने 11 पेमेंट्स बैंकों को लाइसेंस जारी किया था। इनमें से अभी केवल 6 बैंक ही काम कर रहे हैं।