Bengaluru House Sales: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की वजह से आईटी नौकरियों पर खतरे की आशंका और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बावजूद बेंगलुरु का रियल एस्टेट बाजार मजबूती दिखा रहा है। जमीन पर किए गए सर्वे से पता चला है कि घर खरीदने वालों की दिलचस्पी बनी हुई है और नए प्रोजेक्ट्स में अच्छी संख्या में ग्राहक पहुंच रहे हैं।
ब्रोकरेज फर्म एंटीक स्टॉक ब्रोकिंग की रिपोर्ट के मुताबिक, बेंगलुरु के रिहायशी बाजार में फिलहाल मांग पर किसी तरह का बड़ा असर नहीं दिख रहा है। खासकर आईटी और आईटीईएस सेक्टर के कर्मचारी अब भी घर खरीदने वालों का सबसे बड़ा वर्ग बने हुए हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, बेंगलुरु में घरों की कुल मांग का करीब 65 से 80 फीसदी हिस्सा आईटी और आईटीईएस सेक्टर से आता है। AI की वजह से नौकरियां जाने की आशंकाओं के बावजूद आईटी कर्मचारियों की घर खरीदने में दिलचस्पी कम नहीं हुई है। ज्यादातर प्रोजेक्ट्स में 70 से 75 फीसदी खरीदार आईटी सेक्टर से जुड़े लोग हैं। इनमें निवेशकों के मुकाबले खुद रहने के लिए घर खरीदने वालों की संख्या ज्यादा है।
रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले 3 से 4 साल में बेंगलुरु में घरों की कीमतों में 30 से 50 फीसदी तक की बढ़ोतरी हो चुकी है। ऐसे में अब डेवलपर्स को कीमतों में बड़ी बढ़ोतरी की बजाय ज्यादा प्रोजेक्ट लॉन्च करने और नए इलाकों में विस्तार करने पर ध्यान देना पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में रियल एस्टेट कंपनियों की ग्रोथ कीमत बढ़ाने की बजाय बिक्री की मात्रा बढ़ाने से आएगी।
बेंगलुरु के ईस्टर्न कॉरिडोर में कई बड़े प्रोजेक्ट्स में अच्छी बिक्री देखने को मिल रही है। गोदरेज पार्कशायर प्रोजेक्ट जनवरी 2026 में लॉन्च हुआ था। इसके करीब 1,150 फ्लैट्स में से लगभग 70 फीसदी बिक चुके हैं। कंपनी को एक हफ्ते में करीब 300 ग्राहक विजिट भी मिले। प्रोजेक्ट की कीमत 10,000 रुपये प्रति वर्ग फुट से बढ़कर 12,000 रुपये प्रति वर्ग फुट पहुंच गई है।
ब्रिगेड लेकक्रेस्ट और ब्रिगेड बेल्वेडियर प्रोजेक्ट्स में भी अच्छी मांग देखने को मिली। लेकक्रेस्ट में 65-70 फीसदी यूनिट्स बिक चुकी हैं, जबकि हाल ही में लॉन्च हुए बेल्वेडियर की शुरुआती दो टावरों में से करीब 50 फीसदी यूनिट्स बिक गई हैं। वहीं सोभा होसकोटे प्रोजेक्ट 14,000 से 15,000 रुपये प्रति वर्ग फुट की कीमत पर लॉन्च होने की तैयारी में है, जो आसपास के प्रोजेक्ट्स से काफी ज्यादा है।
रिपोर्ट के मुताबिक, घर खरीदने वालों में करीब 70 फीसदी लोग खुद रहने के लिए घर खरीद रहे हैं, जबकि 30 फीसदी निवेशक हैं। इसके अलावा, करीब 60 फीसदी ग्राहक सीधे प्रोजेक्ट साइट पर पहुंचकर जानकारी ले रहे हैं, जबकि 40 फीसदी ग्राहक चैनल पार्टनर्स के जरिए आ रहे हैं। 2 और 3 बीएचके फ्लैट्स की मांग सबसे ज्यादा बनी हुई है क्योंकि इनकी कीमत अपेक्षाकृत किफायती होती है और किराये पर देने में भी फायदा मिलता है।
बेंगलुरु में मजबूत किराया बाजार भी घरों की मांग को सहारा दे रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, निवेशकों को 2.5 से 3 फीसदी तक का किराया रिटर्न मिल रहा है। यही वजह है कि अच्छी लोकेशन वाले प्रोजेक्ट्स में मांग बनी हुई है और बड़े डेवलपर्स के प्रोजेक्ट्स लॉन्च के 4 से 6 महीने के भीतर करीब 50 फीसदी इन्वेंट्री बेचने में सफल हो रहे हैं।
रियल एस्टेट सेक्टर के सामने मजदूरों की कमी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। हालांकि, डेवलपर्स अब इससे निपटने के लिए नई तकनीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं। कई कंपनियां एलएंडटी, टाटा और शापूरजी जैसी बड़ी निर्माण कंपनियों के साथ साझेदारी कर रही हैं। इसके अलावा निर्माण कार्य में ऑटोमेशन और रोबोटिक्स का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है।
रिपोर्ट के अनुसार, निर्माण स्थलों पर अब मटेरियल उठाने वाले रोबोट और दीवारों व छत की फिनिशिंग करने वाली मशीनों का इस्तेमाल बढ़ रहा है। इन तकनीकों की मदद से निर्माण की रफ्तार 10 गुना तक बढ़ सकती है। साथ ही लागत में करीब तीन गुना तक कमी और मजदूरों पर निर्भरता में 80 फीसदी तक गिरावट आने की उम्मीद है।
रिपोर्ट में कमर्शियल रियल एस्टेट को लेकर भी सकारात्मक तस्वीर सामने आई है। 2025 में देश में कमर्शियल स्पेस की कुल लीजिंग 86.4 मिलियन वर्ग फुट के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई। वहीं 2026 की पहली तिमाही में ही करीब 30 मिलियन वर्ग फुट की लीजिंग हो चुकी है।
कमर्शियल रियल एस्टेट की मांग में सबसे बड़ा योगदान ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCC) का है। देश के प्रमुख शहरों में ऑफिस स्पेस की कुल मांग में इनकी हिस्सेदारी करीब 50 फीसदी तक पहुंच गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि जीसीसी की बढ़ती मांग पारंपरिक आईटी कंपनियों की कमजोर मांग की भरपाई कर रही है।
रिपोर्ट के मुताबिक, देशभर में 2025 के दौरान करीब 3.48 लाख घर बिके। वहीं 2026 की पहली तिमाही में 84,800 यूनिट्स की बिक्री दर्ज की गई। मुंबई सबसे मजबूत बाजार बना हुआ है, जहां 2025 में करीब 97,200 घर बिके। वहीं बेंगलुरु में नए प्रोजेक्ट लॉन्च रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गए हैं।
हालांकि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में बिक्री में कुछ नरमी देखने को मिली है और वहां इन्वेंट्री का दबाव बढ़ा है।
मजबूत मांग, बेहतर कमर्शियल गतिविधियों और आकर्षक वैल्यूएशन को देखते हुए एंटीक स्टॉक ब्रोकिंग ने अदित्य बिड़ला रियल एस्टेट (ABREL) और ब्रिगेड एंटरप्राइजेज (BRGD) पर ‘बाय’ रेटिंग दी है। ब्रोकरेज का मानना है कि रिहायशी और कमर्शियल दोनों सेगमेंट में मजबूत मांग आगे भी रियल एस्टेट सेक्टर को सहारा देती रहेगी।
(डिस्क्लेमर: यहां दी गई राय ब्रोकरेज की है। बिज़नेस स्टैंडर्ड इन विचारों से सहमत होना जरूरी नहीं समझता और निवेश से पहले पाठकों को अपनी समझ से फैसला करने की सलाह देता है।)