मुंबई के पुनर्विकास से 2031 तक लगभग 1.5 लाख करोड़ रुपये मूल्य के करीब 59,000 नए घर आ सकते हैं। रियल एस्टेट कंसल्टेंसी फर्म नाइट फ्रैंक इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार यह शहर की भविष्य की आवास आपूर्ति के प्रमुख चालकों में से एक के रूप में पुनर्निर्माण की पुष्टि करता है।
मुंबई के डेवलपर समझौते पुनर्विकास की बढ़ती जरूरत को दर्शाते हैं। यह समझौते 2010 के बाद पहली बार 1,050 के आंकड़े को पार कर गए हैं। अभी 1,094 सोसायटियां पुनर्विकास के दौर से गुजर रही हैं। ये सोसयटियां सामूहिक रूप से शहर में 432 एकड़ भूमि का पुनर्विकास कर रही हैं। मुंबई की पुनर्विकास गतिविधियों में 2026 के बाद मजबूत शुरुआत हुई है। वर्ष 2024 और 2025 में शुरुआत के ढाई महीनों में कुल दर्ज डेवलपमेंट समझौतों में 30 प्रतिशत से अधिक दर्ज हुए हैं।
इस क्रम में 15 मार्च, 2026 तक करीब 70 सोसायटियों में 52.2 एकड़ भूमि पर पुनर्विकास का कार्य शुरू हुआ है जबकि 2024 में 196 सोसाइटियों में 101.3 एकड़ और 2025 में 229 सोसायटियों में 104.8 एकड़ भूमि में पुनर्विकास का कार्य शुरू हुआ था।
नाइट फ्रैंक इंडिया के चेयरमैन व प्रबंध निदेशक (सीएमडी) शिशिर बैजल ने कहा ‘परियोजनाओं के बढ़ते पैमाने और उपनगरीय माइक्रो-मार्केट में बढ़ती गतिशीलता यह दर्शाती है कि यह क्षेत्र अधिक संगठित और आर्थिक रूप से व्यवहार्य विकास मॉडल में विकसित हो रहा है।’ इसके अलावा सोसाइटी पुनर्विकास परियोजनाओं की पूरी अवधि के दौरान 9,115 करोड़ रुपये से अधिक का स्टाम्प ड्यूटी राजस्व मिलने की उम्मीद है।
बृहन्मुंबई नगर निगम की 2017 की ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार मुंबई में 1.6 लाख इमारतें 30 साल से अधिक पुरानी हैं और उन्हें संरचनात्मक ऑडिट के लिए पहचाना गया है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि मार्च 2026 तक मुंबई की लगभग 8 प्रतिशत किराये की मांग पुनर्विकास गतिविधियों से पूरी हुई। इसमें आगे डेवलपमेंट कंट्रोल ऐंड प्रमोशन रेगुलेशंस 2034 और सेल्फ-रीडेवलपमेंट पॉलिसी जैसे प्रमुख नीतिगत सुधारों के बाद पुनर्विकास गतिविधि में बड़े भूमि खंडों की ओर धीरे-धीरे बदलाव पर प्रकाश डाला गया।
वर्ष 2026 में 10,000 वर्ग मीटर से बड़े भूमि खंडों ने कुल पुनर्विकास क्षेत्र का आधे से अधिक हिस्सा कवर किया। मुंबई स्थित एक रियल एस्टेट फर्म एस राहेजा के एमडी राम रहेजा ने बताया, ‘क्लस्टर पुनर्विकास के आसपास की नीतिगत सुधारें जारी हैं, डील की मात्रा और अनलॉक की गई भूमि दोनों बहु-वर्षीय उच्च स्तर पर हैं।’