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अब नहीं डूबेगा आपका पैसा, UP RERA ने बदले रियल एस्टेट के नियम

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UP RERA के नए नियमों से अब बिल्डर्स खरीदारों का पैसा दूसरी जगह इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे, जिससे हाउसिंग प्रोजेक्ट्स में पारदर्शिता और सुरक्षा बढ़ेगी।

Last Updated- May 22, 2026 | 1:10 PM IST
UP RERA rules
Representative image

उत्तर प्रदेश में फ्लैट खरीदने वालों के हित में एक अहम कदम उठाया गया है। उत्तर प्रदेश रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (UP RERA) ने नया वित्तीय ढांचा लागू करते हुए बिल्डरों द्वारा घर खरीदारों के पैसे के दुरुपयोग पर रोक लगाने के निर्देश जारी किए हैं। इसके तहत “अशोर्ड रिटर्न” जैसी योजनाओं में घर खरीदारों के धन के इस्तेमाल पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया है।

11 मई के दिशानिर्देशों के तहत नया नियम

UP RERA द्वारा 11 मई को जारी किए गए बैंकिंग नियमों और प्रोजेक्ट अकाउंट गाइडलाइंस के अनुसार अब सभी RERA-पंजीकृत परियोजनाओं के लिए तीन अलग-अलग बैंक खातों का संचालन अनिवार्य कर दिया गया है। यह व्यवस्था पारदर्शिता बढ़ाने और फंड डायवर्जन रोकने के उद्देश्य से लागू की गई है।

तीन अलग बैंक खातों का नियम अनिवार्य

नए नियमों के तहत हर RERA पंजीकृत प्रोजेक्ट को अब तीन अलग बैंक खातों का पालन करना होगा। इनमें शामिल हैं

  • कलेक्शन अकाउंट
  • सेपरेट अकाउंट
  • ट्रांजैक्शन अकाउंट

इस व्यवस्था का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि खरीदारों से प्राप्त धन केवल उसी परियोजना में उपयोग हो और किसी अन्य काम में न लगाया जा सके।

फंड निकासी पर सख्त निगरानी

UP RERA ने प्रोजेक्ट फंड की निकासी प्रक्रिया को भी कड़ा कर दिया है। अब बिल्डर बिना निर्धारित प्रक्रिया और निगरानी के धन का उपयोग नहीं कर पाएंगे। इससे अधूरी परियोजनाओं और देरी से डिलीवरी की समस्याओं पर रोक लगाने में मदद मिलेगी।

इस नए वित्तीय ढांचे पर चर्चा के लिए UP RERA की ओर से एक बैठक आयोजित की गई, जिसकी अध्यक्षता चेयरमैन संजय भूसरेड्डी ने की। बैठक में राष्ट्रीयकृत बैंकों, वित्तीय संस्थानों और स्टेट लेवल बैंकर्स कमेटी के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। सभी पक्षों ने रियल एस्टेट सेक्टर में वित्तीय अनुशासन को और मजबूत करने पर सहमति जताई।

अधिकारियों का कहना है कि इस कदम का मुख्य उद्देश्य घर खरीदारों के हितों की रक्षा करना है। कई मामलों में यह देखा गया कि बिल्डर प्रोजेक्ट फंड का उपयोग अन्य जगहों पर कर देते थे, जिससे परियोजनाएं समय पर पूरी नहीं हो पाती थीं। नया नियम इस तरह की अनियमितताओं को रोकने में मदद करेगा।

नोएडा, ग्रेटर नोएडा, लखनऊ और गाजियाबाद जैसे शहरों में घर खरीदने का सपना देख रहे लाखों लोगों के लिए राहत भरी खबर है। उत्तर प्रदेश रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी यानी यूपी RERA ने ऐसी नई व्यवस्था लागू की है, जिससे बिल्डरों द्वारा प्रोजेक्ट का पैसा दूसरी जगह लगाने पर रोक लगेगी। माना जा रहा है कि इससे अधूरे और लेट हाउसिंग प्रोजेक्ट्स की समस्या काफी हद तक कम हो सकती है।

अब हर प्रोजेक्ट के लिए होंगे तीन अलग खाते

यूपी RERA के नए नियमों के मुताबिक, हर रजिस्टर्ड हाउसिंग प्रोजेक्ट के लिए अब तीन अलग-अलग बैंक अकाउंट रखना अनिवार्य होगा। इनमें कलेक्शन अकाउंट, अलग से एस्क्रो जैसी व्यवस्था वाला अकाउंट और ट्रांजैक्शन अकाउंट शामिल हैं।

इस व्यवस्था का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि घर खरीदारों से लिया गया पैसा सिर्फ उसी प्रोजेक्ट पर खर्च हो, जिसके लिए वह जमा कराया गया है।

70 फीसदी रकम सीधे जाएगी अलग खाते में

नए नियम का सबसे अहम हिस्सा यह है कि होमबायर्स से मिलने वाली कम से कम 70 फीसदी रकम अब रोजाना अपने आप “सेपरेट अकाउंट” में ट्रांसफर होगी।

इस खाते में जमा रकम का इस्तेमाल केवल दो कामों के लिए किया जा सकेगा। पहला जमीन की लागत और दूसरा निर्माण कार्य का खर्च। यानी बिल्डर अब इस पैसे को किसी दूसरे प्रोजेक्ट, पुराने कर्ज चुकाने या बड़े मार्केटिंग खर्चों में इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे।

घर खरीदारों का भरोसा बढ़ाने की कोशिश

रियल एस्टेट सेक्टर में लंबे समय से यह शिकायत रही है कि कई बिल्डर एक प्रोजेक्ट से जुटाए गए पैसे को दूसरे प्रोजेक्ट में लगा देते हैं। इससे निर्माण कार्य धीमा पड़ जाता है और खरीदारों को सालों तक इंतजार करना पड़ता है।

यूपी RERA का मानना है कि नई व्यवस्था से फंड की पारदर्शिता बढ़ेगी और प्रोजेक्ट समय पर पूरे होने की संभावना मजबूत होगी। इससे खासतौर पर उन शहरों के खरीदारों को फायदा मिल सकता है, जहां बड़ी संख्या में हाउसिंग प्रोजेक्ट्स चल रहे हैं।

होमबायर्स के लिए क्यों अहम हैं यूपी रेरा के नए नियम?

घर खरीदने वालों की सबसे बड़ी शिकायत लंबे समय से यही रही है कि बिल्डर्स एक प्रोजेक्ट के नाम पर खरीदारों से पैसा जुटाते हैं, लेकिन बाद में उसी रकम का इस्तेमाल दूसरी जगहों पर करने लगते हैं। इसमें नई जमीन खरीदना, नए प्रोजेक्ट लॉन्च करना, पुराने कर्ज चुकाना या दूसरे कारोबार में पैसा लगाना शामिल होता है।

खरीदारों का पैसा दूसरी जगह लगाने से बढ़ती थी परेशानी

जब किसी प्रोजेक्ट का पैसा दूसरे कामों में खर्च हो जाता है, तो संबंधित हाउसिंग प्रोजेक्ट में फंड की कमी होने लगती है। इसका सीधा असर निर्माण कार्य पर पड़ता है। कई बार प्रोजेक्ट समय पर पूरे नहीं हो पाते, लंबे समय तक लटके रहते हैं या बीच में ही बंद होने की नौबत आ जाती है।

ऐसी स्थिति में सबसे ज्यादा नुकसान उन लोगों को उठाना पड़ता है जिन्होंने अपनी जीवनभर की कमाई घर खरीदने में लगा दी होती है।

अब खरीदारों के पैसे पर रहेगी कड़ी निगरानी

यूपी रेरा के नए नियमों का मकसद यही सुनिश्चित करना है कि घर खरीदारों से लिया गया पैसा उसी प्रोजेक्ट पर खर्च हो, जिसके लिए वह राशि जमा कराई गई है। यानी बिल्डर्स अब खरीदारों के फंड को दूसरे प्रोजेक्ट या कारोबार में आसानी से ट्रांसफर नहीं कर सकेंगे।

इस कदम से प्रोजेक्ट्स के लिए जरूरी फंड सुरक्षित रहेगा और निर्माण कार्य समय पर पूरा होने की संभावना बढ़ेगी।

अब बिल्डर्स मनमर्जी से नहीं निकाल सकेंगे खरीदारों का पैसा

घर खरीदारों के हितों की सुरक्षा को मजबूत करने के लिए उत्तर प्रदेश रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी यानी UP RERA ने बड़ा कदम उठाया है। अब बिल्डर्स प्रोजेक्ट अकाउंट से अपनी मर्जी से पैसा नहीं निकाल सकेंगे। इसके लिए उन्हें तय प्रक्रिया और जरूरी प्रमाणपत्रों का पालन करना होगा। इस फैसले का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि खरीदारों का पैसा सिर्फ निर्माण कार्य पर ही खर्च हो।

लागू हुआ “थ्री सर्टिफिकेट सिस्टम”

UP RERA ने प्रोजेक्ट अकाउंट से रकम निकालने के लिए सख्त “थ्री सर्टिफिकेट सिस्टम” लागू किया है। इसके तहत बिल्डर्स को किसी भी निकासी से पहले तीन अलग-अलग विशेषज्ञों की मंजूरी लेनी होगी।

इनमें शामिल हैं:

  • आर्किटेक्ट
  • इंजीनियर
  • चार्टर्ड अकाउंटेंट

इन तीनों के प्रमाणपत्र के बिना प्रोजेक्ट अकाउंट से पैसा नहीं निकाला जा सकेगा। यह व्यवस्था इस बात की निगरानी करेगी कि निकाली गई रकम वास्तव में निर्माण कार्य की प्रगति के अनुरूप ही हो।

निर्माण की प्रगति के आधार पर ही होगी निकासी

नई व्यवस्था का उद्देश्य फंड के गलत इस्तेमाल को रोकना है। पहले कई मामलों में आरोप लगते रहे हैं कि बिल्डर्स एक प्रोजेक्ट का पैसा दूसरे प्रोजेक्ट में लगा देते थे या मनमाने तरीके से फंड ट्रांसफर कर देते थे। अब निर्माण की वास्तविक स्थिति के हिसाब से ही रकम जारी होगी।

बैंकों के लिए भी जारी हुए सख्त निर्देश

UP RERA ने बैंकों और वित्तीय संस्थानों को भी स्पष्ट निर्देश दिए हैं। प्रोजेक्ट अकाउंट्स के लिए अब बैंक:

  • चेक बुक जारी नहीं करेंगे
  • डेबिट कार्ड उपलब्ध नहीं कराएंगे
  • अनियंत्रित ऑनलाइन ट्रांजैक्शन की अनुमति नहीं देंगे

इस कदम का मकसद प्रोजेक्ट फंड पर बेहतर निगरानी बनाए रखना है।

खरीदारों के पैसे पर नहीं लगाया जा सकेगा कब्जा

अथॉरिटी ने यह भी साफ किया है कि बैंक, NBFCs या निवेशक प्रोटेक्टेड प्रोजेक्ट अकाउंट पर किसी तरह का लियन नहीं लगा सकेंगे। यानी खरीदारों के निर्माण कार्य के लिए जमा किए गए पैसों को कोई वित्तीय संस्था जब्त या ब्लॉक नहीं कर पाएगी।

“अश्योर्ड रिटर्न” स्कीम्स को बड़ा झटका

UP RERA के नए रुख का सबसे बड़ा असर तथाकथित “अश्योर्ड रिटर्न” हाउसिंग स्कीम्स पर पड़ सकता है।

इन योजनाओं में बिल्डर्स खरीदारों को प्रोजेक्ट का कब्जा मिलने तक हर महीने तय रिटर्न देने का वादा करते थे। लंबे समय से यह आरोप लगते रहे हैं कि कई डेवलपर्स नए निवेशकों से आए पैसों का इस्तेमाल पुराने खरीदारों को रिटर्न देने में कर रहे थे।

रेगुलेटर्स अब इस मॉडल को वित्तीय रूप से जोखिमभरा और टिकाऊ नहीं मान रहे हैं। ऐसे में UP RERA के नए निर्देशों के बाद बिल्डर्स के लिए खरीदारों के फंड से इस तरह के भुगतान करना मुश्किल हो जाएगा।

NBFC लोन पर ब्याज खर्च की सीमा तय

प्राधिकरण ने एक और अहम फैसला लेते हुए गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों यानी NBFCs से लिए गए कर्ज पर मान्य ब्याज खर्च की सीमा तय कर दी है।

अब ब्याज खर्च को SBI के MCLR आधारित बेंचमार्क रेट्स के अनुसार ही स्वीकार किया जाएगा।

UP RERA का मानना है कि कुछ डेवलपर्स फाइनेंसिंग कॉस्ट को बढ़ा-चढ़ाकर दिखा रहे थे और ज्यादा ब्याज भुगतान के जरिए प्रोजेक्ट फंड्स को बाहर निकाल रहे थे। नए नियमों के बाद ऐसी गतिविधियों पर रोक लगाने की कोशिश की जाएगी।

बिल्डर्स को देनी होगी ज्यादा जानकारी

नए नियमों के तहत डेवलपर्स को अब वित्तीय मामलों में अधिक पारदर्शिता रखनी होगी। उन्हें हर तिमाही वित्तीय जानकारी पोर्टल पर अपलोड करनी होगी।

इसके अलावा प्रोजेक्ट से जुड़े लोन, फंडिंग सोर्स और वित्तीय व्यवस्था की जानकारी भी हलफनामे के जरिए साझा करनी होगी।

ये सभी जानकारियां UP RERA पोर्टल पर उपलब्ध रहेंगी, जिससे खरीदार, बैंक और रेगुलेटरी एजेंसियां प्रोजेक्ट की वित्तीय स्थिति पर बेहतर नजर रख सकेंगी।

दोबारा सक्रिय करने के लिए जरूरी होगी मंजूरी

नए ढांचे के मुताबिक, फ्रीज किए गए खाते तभी दोबारा चालू किए जा सकेंगे जब:

  • यूपी रेरा से अनुमति मिले
  • या प्रोजेक्ट रजिस्ट्रेशन की अवधि बढ़ाई जाए

इस कदम का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि खरीदारों का पैसा किसी अनियमित या अधूरी परियोजना में गलत तरीके से इस्तेमाल न हो।

अलग खाते बंद करने के लिए भी तय हुई प्रक्रिया

अथॉरिटी ने प्रोजेक्ट से जुड़े अलग बैंक खातों को बंद करने के लिए भी एक औपचारिक प्रक्रिया तय की है। अब इन खातों को तभी बंद किया जा सकेगा जब:

  • प्रोजेक्ट पूरी तरह पूरा हो जाए
  • कॉमन एरिया का हस्तांतरण हो जाए
  • और अथॉरिटी से अंतिम मंजूरी मिल जाए

यानी बिल्डर अपनी सुविधा से खाते बंद नहीं कर सकेंगे।

घर खरीदारों के लिए क्या बदलेगा?

इन सुधारों का सबसे बड़ा फायदा आम घर खरीदारों को मिलने वाला है। नए नियमों का सीधा मकसद खरीदारों की रकम को ज्यादा सुरक्षित बनाना है।

इससे यह उम्मीद बढ़ेगी कि खरीदारों का पैसा केवल उसी प्रोजेक्ट पर खर्च हो, जिसके लिए वह लिया गया है। साथ ही अधूरे या विवादित प्रोजेक्ट्स में फंड के दुरुपयोग पर भी रोक लगेगी।

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First Published - May 22, 2026 | 1:10 PM IST

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