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घर खरीदने का सही समय? कीमतों की रफ्तार धीमी, छोटे डेवलपर्स दे रहे डील का मौका

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रियल एस्टेट बाजार में तेजी धीमी पड़ने से खरीदारों को खासकर छोटे डेवलपर्स से बेहतर डील और मोलभाव का मौका मिल रहा है।

Last Updated- April 20, 2026 | 7:02 AM IST
Real Estate
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रिहायशी प्रॉपर्टी बाजार कोविड महामारी के बाद आई तेजी के बाद अब एक ठहराव के दौर में प्रवेश कर चुका है। एनारॉक ग्रुप के अनुसार 2026 की पहली तिमाही में देश के शीर्ष सात शहरों में मकान की औसत कीमतें मामूली बढ़कर 9,456 रुपये प्रति वर्ग फुट हो गईं। एक तिमाही पहले के मुकाबले यह महज 2.1 फीसदी की मामूली वृद्धि है जो इस बात का संकेत है कि पहले की तेज रफ्तार अब सुस्त पड़ रही है।

हाल में क्रिसिल ने भी इसके प्रति आगाह किया था। उसने अनुमान जाहिर किया है कि 2026-27 में रिहायशी मकानों की कीमतों में बढ़ोतरी की रफ्तार धीमी होकर 3 से 5 फीसदी रह जाएगी जो 2021-22 से 2024-25 के बीच 11 फीसदी की दमदार वार्षिक वृद्धि के मुकाबले काफी कम है।

वृद्धि में नरमी

साल 2023 और 2024 की शुरुआत में जो उत्साह देखी गई थी वह अब दिखाई नहीं दे रहा है। बढ़ी हुई प्रॉपर्टी की कीमतों ने लोगों की खरीद क्षमता को प्रभावित किया है और इसलिए लेनदेन की रफ्तार सुस्त पड़ गई है। इंडिया सोथबीज इंटरनैशनल रियल्टी के मुख्य कार्याधिकारी अश्विन चाधा ने कहा, ‘दो अंकों की दमदार वृद्धि के दौर के बाद कीमतों में कुछ ठहराव दिखना लाजिमी है।’ एनारॉक ग्रुप के कार्यकारी निदेशक और प्रमुख (अनुसंधान एवं परामर्श) प्रशांत ठाकुर ने कहा, ‘पश्चिम एशिया में युद्ध और व्यापक वैश्विक चिंताओं के कारण छंटनी और नौकरी संबंधी अनिश्चितताएं बढ़ गई हैं। ऐसे में खरीदारों को अपनी खरीद योजनाएं स्थगित करनी पड़ रही है।’ साल 2026 की पहली तिमाही के दौरान देश के शीर्ष 7 शहरों में मकानों की आपूर्ति बढ़ी है। इस दौरान 1.25 लाख से अधिक मकान लॉन्च किए गए।

अवसरों का लाभ उठाएं

कीमत वृद्धि में नरमी खरीदारों के लिए अवसर लेकर आती है। ठाकुर ने कहा, ‘बड़े डेवलपर अधिक छूट की पेशकश नहीं कर रहे हैं मगर वे भुगतान में कुछ सहूलियत प्रदान कर रहे हैं। दूसरी ओर अधिक स्टॉक वाले छोटे डेवलपरों के साथ बातचीत और मोलभाव के विकल्प खुले हैं।’ विशेषज्ञों का कहना है कि देश के शीर्ष 7 शहरों के द्वितीयक बाजारों में काफी अवसर पैदा हो रहे हैं। चाधा ने कहा, ‘लक्जरी श्रेणी में भी चुनिंदा अवसर उपलब्ध हैं जहां कुछ निवेशक जल्दबाजी में बेहतर सौदे पेश कर सकते हैं।’ बड़े और सूचीबद्ध डेवलपरों के साथ बातचीत करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। ऐसा विशेष रूप से कम स्टॉक वाली परियोजनाओं में दिखता है। ठाकुर ने कहा, ‘अच्छी कीमत चाहने वाले खरीदार छोटे डेवलपरों की ओर रुख कर सकते हैं बशर्ते निर्माण संबंधी उनका ट्रैक रिकॉर्ड अच्छा हो।’ इस बीच कुछ बड़े डेवलपरों द्वारा पेश की जाने वाली सीमित अवधि की लचीली भुगतान योजनाएं भी कुछ खरीदारों की खरीद क्षमता में सुधार कर सकती हैं। चाधा ने सुझाव दिया कि डेवलपरों द्वारा सार्वजनिक रूप से कीमतों में कटौती की संभावना नहीं है लेकिन गुप्त रूप से बातचीत की गुंजाइश बनी हुई है।

देरी से रहें सावधान

पश्चिम एशिया में युद्ध के बीच निर्माण की लागत बढ़ गई है। हालांकि अधिकतर बड़े और सूचीबद्ध डेवलपर वित्तीय तौर पर दमदार हैं। वे निर्माण में देरी के प्रति काफी सतर्क हो गए हैं। ठाकुर ने कहा, ‘छोटे डेवलपरों की अधिक स्टॉक वाली परियोजनाओं में समस्याएं दिख सकती हैं। ऐसे में खरीदारों को पूरी जांच-परख के साथ सतर्क रहने की जरूरत है।’

अधिक ऋण से बचें

वित्तीय विशेषज्ञ खरीदारों को अधिक ऋण बोझ से बचने की सलाह देते हैं। सेबी में पंजीकृत निवेश सलाहकार और सहजमनी डॉट कॉम के संस्थापक अभिषेक कुमार ने कहा, ‘ऋण बनाम मूल्य अनुपात में रूढ़िवादी नजरिया बनाए रखने से ब्याज दरों में वृद्धि या आय में उतार-चढ़ाव की स्थिति में ऋण से निपटने में मदद मिलती है।’ एक विवाहित जोड़े को अपनी कुल ईएमआई को शुद्ध पारिवारिक आय के 35 से 40 फीसदी के दायरे में रखना चाहिए। कुमार ने कहा, ‘डिफॉल्ट के जोखिम से बचने के लिए खरीदारों को ईएमआई सहित 6 से 12 महीनों के खर्चों को कवर करने लायक एक आपातकालीन कोष भी बनाए रखना चाहिए।’

निवेशकों को करना पड़ेगा इंतजार

प्रीमियम श्रेणी (5 से 20 करोड़ रुपये) के मकानों में निवेशकों की गतिविधियां अधिक दिखती हैं और इसलिए वहां जोखिम भी अधिक होता है। ऐसा खास तौर पर गुरुग्राम, नोएडा, पुणे और हैदराबाद जैसे बाजारों में दिखता है। चाधा ने कहा, ‘साल 2024-25 की तेजी के दौरान नए निवेशकों को बाहर होने के लिए लंबी समय-सीमा का सामना करना पड़ सकता है। उन्हें अपने रिटर्न की उम्मीदों को भी कम करना चाहिए।’

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First Published - April 20, 2026 | 7:02 AM IST

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